BJP विधायक विक्रम सैनी की सजा रहेगी बरकरार या लगेगी रोक, हाईकोर्ट आज सुना सकता है फैसला

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हाइलाइट्स

मुजफ्फरनगर दंगे के एक मामले में विधायक विक्रम सिंह सैनी को दो साल की हुई है सजा
इलाहाबद हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की दलील को सुनने के बाद अपना फैसला रखा है सुरक्षित
विक्रम सैनी की सदस्यता रद्द होने के बाद खटाउसली सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है

प्रयागराज. मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से बीजेपी के निवर्तमान विधायक विक्रम सैनी को दो साल की सजा को निलंबित करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट बुधवार को फैसला सुना सकता है. मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से मिली 2 साल की सजा पर रोक लगाए जाने के मामले में मंगलवार को जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

अगर सजा पर रोक लगी तो विक्रम सैनी अपनी बर्खास्तगी खत्म किए जाने और खतौली उपचुनाव पर रोक लगाए जाने की मांग को लेकर नई याचिका दाखिल करेंगे. फिलहाल विक्रम सैनी की सदस्यता रद्द होने की वजह से खतौली विधानसभा सीट पर 5 दिसंबर को उपचुनाव की घोषणा की गई है.

विक्रम सैनी की तरफ से दी गई ये दलील
दरअसल, वर्ष 2013 के चर्चित मुजफ्फरनगर दंगे में स्पेशल कोर्ट ने विक्रम सैनी को सजा सुनाई है. हाईकोर्ट ने सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर विक्रम सैनी की जमानत पहले ही मंजूर कर चुकी है. बता दें कि मुजफ्फरनगर में तीन हिंदू युवकों की हत्या के बाद कई स्थानों पर दंगे भड़के थे. विक्रम सैनी का आरोप है कि उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी, इसलिए राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के कारण से उन्हें झूठे केस में फंसा दिया गया. उनका दलील है कि उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला है. पुलिस की ओर से इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई और सभी गवाह भी पुलिस के ही है. कोई भी स्वतंत्र साक्षी नहीं है. वह निर्वाचित विधायक है और सजा होने की स्थिति में उसकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है और वह भविष्य में चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे. बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया.

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उत्तर प्रदेश
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