Chandra Grahan 2022: शाम 07:25 बजे तक चंद्र ग्रहण का उपच्छाया स्पर्श, जानें मंदिरों में कितने बजे से होगी पूजा-आरती

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हाइलाइट्स

भोपाल में चंद्र ग्रहण शाम को 05 बजकर 10 मिनट पर होगा.
वाराणसी में चंद्र ग्रहण का प्रारंभ शाम 05:14 बजे से होगा.

Chandra Grahan 2022: आज मंगलवार शाम को साल 2022 का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने वाला है. हालांकि इसके सूतक काल, ग्रहण समय, मंदिरों के कपाटों के बंद होने और ग्रहण बाद पूजा आरती के समय पर पंचांगों के विरोधाभास के कारण लोगों में असमंजस की स्थिति बन गई है. आज का चंद्र ग्रहण शाम को 06 बजकर 19 मिनट पर खत्म हो रहा है लेकिन चंद्र ग्रहण के उपच्छाया का अंतिम स्पर्श शाम 07:25 बजे पर हो रहा है. ऐसे में अब असमंजस यह है कि पूजा और आरती शाम को 07:25 बजे के बाद की जाए या फिर जब चंद्र ग्र​हण समाप्त हो रहा है तब की जाए?

भोपाल में शाम 07:00 बजे से होगी पूजा-आरती
दैनिक भास्कर में छपी खबर के अनुसार, भोपाल में चंद्र ग्रहण शाम को 05 बजकर 10 मिनट पर होगा क्योंकि इस समय ही चंद्रोदय हो रहा है. शाम को 05:45 बजे ग्रहण का मध्य काल और चंद्र ग्रहण का मोक्ष यानि समापन शाम 06 बजकर 23 मिनट पर होगा. ग्रहण शाम को 05:10 पर लग रहा है, ऐसे में इसका सूतक काल आज सुबह 08:10 बजे से प्रारंभ हो गया है क्योंकि चंद्र ग्रहण का सूतक काल 09 घंटा पहले शुरू होता है.

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चंद्र ग्रहण शाम को 06:23 तब है, इसलिए मंदरों के कपाट सुबह 08:10 बजे से बंद हैं और शाम को 6:23 बजे के बाद खुलेंगे. उसके बाद मंदिरों का शुद्धिकरण होगा. फिर शाम 07:00 बजे के बाद मंदिरों में पूजा और आरती की जाएगी.

वाराणसी के मंदिरों में पूजा-आरती का समय
काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट के अनुसार, वाराणसी में चंद्र ग्रहण का प्रारंभ शाम 05:14 बजे से होगा और इसका मोक्ष शाम को 06:19 बजे होगा. चंद्र ग्रहण के समापन के बाद मंदिरों की साफ-सफाई और शुद्धिकरण होगा. फिर शाम को 07:00 बजे से पूजा और आरती की जाएगी. भक्तों के लिए मंदिरों के कपाट भी शुद्धिकरण के बाद खोल दिए जाएंगे.

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चंद्र ग्रहण का उपच्छाया स्पर्श
ज्योतिषाचार्य भट्ट का कहना है कि चंद्र ग्रहण का उपच्छाया ग्रहण के समापन के कुछ समय तक रहता है, लेकिन इस उस उपच्छाया में पूजा-पाठ की मनाही नहीं होती है. इसमें चंद्र ग्रहण का प्रभाव नहीं होता है. ग्रहण में पूजा पाठ की मनाही सूतक काल के प्रारंभ से लेकर ग्रहण के मोक्ष समय तक होता है. ग्रहण के मोक्ष होने के बाद शुद्धिकरण करके पूजा पाठ किया जाता है.

तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ कृष्ण कुमार भार्गव के अनुसार, ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से ग्रहण के उपच्छाया के समापन समय का महत्व नहीं होता है. आज के ग्रहण का उपच्छाया से अंतिम स्पर्श शाम 07:25 बजे हो रहा है तो इसमें पूजा पाठ वर्जित नहीं है. ग्रहण समाप्त होने के बाद पूजा और आरती कर सकते हैं.

ग्रहण समय की कैसे करें गणना
ज्योतिषाचार्य भार्गव का कहना है कि ग्रहण समय और उसके सूतक काल की गणना का सबसे आसान तरीका यह है कि आपके स्थान या शहर में चंद्रोदय कब हो रहा है, उससे 09 घंटे पूर्व का समय देख लें, उस समय से आपके शहर में सूतक काल प्रारंभ होगा. उसके बाद चंद्रोदय के समय पर ग्रहण है, जो चंद्रोदय समय है, वही आपके शहर में चंद्र ग्रहण के प्रारंभ का समय है. चंद्र ग्रहण का समापन शाम को 06:19 बजे हो रहा है. हर स्थान का अलग-अलग चंद्रोदय समय है, इसलिए ग्रहण के समय में हर जगह अंतर है.

Tags: Chandra Grahan, Lunar eclipse



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