Chhota Nagpur Rural Police Act 1914 Made Wrongly Basis For Kolhan Country Police Appointment In Jharkhand | छोटा नागपुर रूरल पुलिस एक्ट 1914 का हवाला देकर कर रहे थे युवाओं को गुमराह

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चाईबासा12 घंटे पहले

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युवाओं को गुमराह करने का आरोपी।

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में अलग कोल्हान देश की मांग को लेकर हुए विवाद में नया खुलासा हुआ है। पुलिस की जांच में पता चला है कि कोल्हान गवर्नमेंट स्टेट नाम से संगठन बनाकर गांव के युवाओं को पुलिस में बहाली का सपना दिखाया जा रहा था। अंग्रेजों की ओर से 108 वर्ष पहले बनाए गए कानून का हवाला देकर यह नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई थी। युवाओं को बताया जा रहा था कि छोटा नागपुर रूरल पुलिस एक्ट 1914 के तहत कोल्हान देश के लिए अलग पुलिस होगी। युवाओं को इस बात का भरोसा दिया जा रहा था कि कोल्हान गवर्नमेंट स्टेट में लागू होने वाले कानूनों के अनुपालन कराने का अधिकार कोल्हान देश की पुलिस के पास ही होगा। पुलिस के हाथ दो वीडियो लगे हैं। इसमें पूरी साजिश की बात खुलकर सामने आ गई है।

बहाली के लिए मैदान में जुटे युवक

युवाओं के वेतन का भुगतान कोल्हान गवर्नमेंट स्टेट को प्राप्त होने वाले राजस्व के जरिए करने का दावा किया जा रहा था। इसके साथ-साथ झारखंड सरकार की ओर से स्थापित स्कूली शिक्षा व्यवस्था से अलग हो भाषा और वारंगक्षिति लिपि की पढ़ाई के लिए अलग से शिक्षकों की बहाली की जा रही थी। संगठन स्टेट के नाम पर 10 हजार शिक्षकों और 30 हजार पुलिस के जवानों की बहाली करने वाला था।

पुलिस के चयन के लिए पूरी प्रक्रिया सरकारी पुलिस बहाली की तर्ज पर ही संचालित जा रही थी। इसके लिए CRPF में कार्यरत रहे जवान अजय पाड़ेया को बहाली प्रक्रिया का प्रमुख बनाया गया था। उसे 50 हजार रुपये महीना और कोल्हान देश की पुलिस ने DSP रैंक देने का वादा किया गया था। युवाओं को सबसे पहले संगठन की ओर से जारी किया गया आवेदन पत्र भरना था। इसके बाद बहाली के लिए तय किए गए स्थान पर पहुंचना था। यहां युवाओं की शारीरिक दक्षता की परीक्षा ली जाती थी। इसमें सफल होने वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिया जाता था।

गत 23 जनवरी को पुलिस को इसकी भनक लग गई। पुलिस ने छापा मार कर बहाली करने वाले लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद ही पूरा विवाद भड़का। संगठन के लोगों ने इसे मानकी-मुंडा व्यवस्था में सरकार का जबरन दखल करार दिया।

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विल्किंसन रूल को बनाया जा रहा था आधार
बहाली को सही साबित करने के लिए विल्किंसन रुल का हवाला दिया जा रहा था। ब्रिटिश शासनकाल में सर थामस विल्किंसन साउथ वेस्ट फ्रंटियर एजेंसी के प्रमुख थे। उन्होंने सैन्य हस्तक्षेप कर कोल विद्रोह को दबाया। उन्होंने 1837 में कोल्हान सेपरेट स्टेट की घोषणा कर चाईबासा को उसका मुख्यालय बनाया। तब लोगों को अंग्रेजी शासन के पक्ष में करने के लिए मानकी-मुंडा स्वशासन व्यवस्था को लागू कर दिया गया। इसे विल्किंसन रूल कहा जाता है। इसके तहत सिविल मामलों के निष्पादन का अधिकार मुंडा तथा आपराधिक मामलों के निष्पादन का अधिकार मानकी को दिया गया था।

छोटा नागपुर रूरल पुलिस एक्ट 1914
छोटा नागपुर रूरल पुलिस एक्ट 1914 का प्रावधान वर्ष 1913 में अंग्रेजों ने बिहार-उड़िया गजेटियर में किया था। इसका विस्तार करते हुए पहले इसमें सिंहभूम के अलावा रांची, हजारीबाग,पलामू और धनबाद के इलाके को शामिल किया गया था। इसके तहत इन इलाकों में विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए छोटानागपुर डिविजन के अंतर्गत रुरल इलाके के लिए पुलिस की बहाली की गई थी। इसमें नियुक्ति, बर्खास्तगी, मेंटेनेंस और सेवा का अधिकार छोटानागपुर डिवीजन के अंतर्गत था।

लंबे समय से हो रही मांग
पश्चिमी सिंहभूम जिले में अलग कोल्हान देश की मांग वर्ष 1980 से हो रही है। मांग को हवा देने वाले लोग विल्किंसन रूल का हवाला देते हैं। सबसे पहले 30 मार्च 1980 में चाईबासा की सड़कों पर स्थानीय लोगों का एक समूह एकत्र हुआ था। इसी दौरान आयोजित सभा में सबसे पहले यह मांग उठी।
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