Chirag Paswan in RCP Singh team fire not extinguished inside Nitish Kumar JDU brvj

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पटना. सियासत कब क्या मोड़ लेगी यह कोई नहीं बता सकता. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Election 2020) के परिणाम बाद से ही सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के निशाने पर चिराग पासवान (Chirag Paswan) हैं. पर अब इसी सियासत में एक नया ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. दरअसल बीते दिनों जेडीयू कोटे से केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह (RCP Singh) के मंत्रालय ने चिराग पासवान को अपना हिंदी सलाहकार बनाया है. हिंदी सलाहकार समिति में चिराग पासवान समेत बिहार के पांच लोग को समिति का सदस्य बनाया गया है. चिराग के नाम से सियासी गलियारे में चर्चा तेज हो गई है कि क्या जदयू के भीतर सबकुछ सही है या फिर अंदरखाने कोई ‘आग’ जल रही रही है?

दरअसल, इस्पात मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार इस्पात मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति का पुनर्गठन किया गया है. खास बात यह कि इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह की अध्यक्षता वाली इस 15 सदस्यीय समिति में सांसद चिराग पासवान और जदयू सांसद दिनेशचंद्र यादव समेत बिहार के पांच लोग सदस्य बनाए गए हैं. बता दें कि इस्पात राज्यमंत्री समिति के उपाध्यक्ष हैं. इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह की समिति में जमुई के सांसद चिराग समेत बिहार से चार सदस्य शामिल किए गए हैं.

मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा लोकसभा से नामित सांसद संजय सेठ (झारखंड) एवं सुनील कुमार सोनी (छत्तीसगढ़), जबकि राज्यसभा से दिनेशचंद्र जेमलभाई अनावाडिया (गुजरात) और नरेश गुजराल (पंजाब) को समिति में सदस्य बनाया गया है. वहीं संसदीय राजभाषा समिति द्वारा नामित सांसद चिराग पासवान और दिनेश चंद्र यादव सदस्य हैं.

इस समिति में इस्पात मंत्रालय द्वारा विधान पार्षद डॉ. रामवचन राय (बिहार), पूर्व सांसद स्व. डॉ. रमेंद्र कुमार रवि के पुत्र एवं जदयू नेता डॉ. अमरदीप, डॉ. रिंकु कुमारी (नई दिल्ली) एवं सुधीर कुमार (मध्य प्रदेश) को सदस्य मनोनीत किया गया है. केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद के प्रतिनिधि के तौर पर गोपाल कृष्ण फरलिया (नई दिल्ली) और महेश बंशीधर अग्रवाल (महाराष्ट्र) समिति में सदस्य बनाए गए हैं.

गौरतलब है कि पिछले साल संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग पासवान जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का विरोध कर रहे थे. अपनी हर रैली में चिराग जनता से नीतीश की पार्टी को वोट न देने के लिए कह रहे थे. चिराग अपनी पार्टी और परिवार में टूट का जिम्मेदार नीतीश को ही बता रहे हैं. इसके सात ही चिराग पासवान अब भी लगातार सीएम नीतीश पर उनके पिता दिवंगत राम विलास पासवान के अपमान का आरोप भी लगाते रहे हैं.

वहीं, दूसरा बड़ा तथ्य यह है कि हाल ही में केंद्रीय मंत्री बनने के बाद आरसीपी सिंह और सीएम नीतीश कुमार के बीच दूरी बढ़ जाने की भी खबरें आती रही हैं. हालांकि दोनों ही ओर से ऐसी खबरों का खंडन किया जा चुका है. पर विशेष बात यह भी है कि मंत्री बनने से पहले आरसीपी जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. उनके इस्पात मंत्रालय का जिम्मा संभालने पर जदयू की कमान ललन सिंह को सौंपी गई थी.

जदयू के भीतर बदलाव हुए तो इसे सीधे तौर पर सीएम नीतीश कुमार की आरसीपी सिंह से नाराजगी को जोड़कर देखा जाने लगा. अब सवाल यह है कि चिराग की आरसीपी की टीम में एंट्री का संकेत क्या है? वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि इस खबर को आप जनता दरबार की उस घटना से भी जोड़ सकते हैं जिसमें आरसीपी सिंह जनता दरबार में पहुंच गए. सीएम नीतीश कुमार ने उन्हें बहुत तवज्जो नहीं दी थी. शायद यह उसकी भी प्रतिक्रिया हो.

अशोक कुमार शर्मा कहते हैं. कि ऐसे भी जब से आरसीपी सिंह की जगह जदयू के अध्यक्ष पद पर ललन सिंह को बिठाया गया है आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार के बीच रिश्ते बहुत सामान्य नजर नहीं आ रहे हैं. हालांकि हो सकता है कि अंदरखाने दोनों ही नेताओं की अच्छी बनती हो, लेकिन पब्लिक परसेप्शन तो यही है कि आरसीपी और सीएम नीतीश के बीच भीतर ही भीतर नूरा-कुश्ती जारी है.

जाहिर तौर पहर आरसीपी सिंह द्वारा चिराग पासवान को अपनी किसी भी टीम में शामिल करना सीएम नीतीश कुमार को सीधे तौर पर नाराज करने वाली बात है. ऐसे में कहा जा सकता है कि आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार भले ही जितना भी लोगों के सामने कह लें कि जदयू के भीतर कोई गुटबाजी नहीं है, लेकिन जनता भी अब ऐसे मामलों में अबूझ नहीं है, वह भी यह समझ चुकी है कि जदयू के अंदरखाने कहीं न कहीं कोई ‘आग’ तो जरूर लगी है!

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