Coal shortage in india and kejriwal government made this plan to deal with power shortage

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नई दिल्ली. देश में कोयले की क‍िल्‍लत (Coal Shortage) पैदा हो गई है. द‍िल्‍ली में भले ही कोयले से संचाल‍ित पावर प्‍लांट (Power Plant) नहीं है. लेक‍िन गैस आधारित पावर प्लांट के ल‍िए गैस की  खरीद और महंगी हो गई. राज्यों में कोयले से उत्पादित बिजली की कमी को पूरा करने के लिए द‍िल्‍ली ने  ब‍िजली का उत्‍पादन और तेज कर द‍िया है. इसके ल‍िए उसे मंहगी दर पर गैस की खरीद करनी पड़ रही है और ब‍िजली का उत्‍पादन करना पड़ रहा है. अभी फिलहाल कोयले की क‍िल्‍लत को दूर होता नहीं देख अब द‍िल्‍ली सरकार के ल‍िए भी चिंता हो गई है कि आने वाले समय में बि‍जली संकट और ज्‍यादा हो सकता है.

इस मामले में दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) का‌ कहना है कि दिल्ली में एक भी कोयले से सचालित पावर प्लांट (Power Plant) नहीं है. उर्जा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय तापविद्युत निगम लिमिटेड (एनटीपीसी) दिल्ली सरकार के करार के अनुसार 3500 मेगावाट बिजली देता था, लेकिन आज वह उसकी आधी यानी 1750 मेगावाट बिजली दे रहा है.

सरकार का कहना है कि दिल्ली में गैस से चलने वाले बिजली के पावर प्लांट है. लेकिन केंद्र सरकार (Central Government) ने दिल्ली को निर्धारित दर पर गैस देना बंद कर दिया है, जिसके कारण दिल्ली सरकार (Delhi Government) को बिजली उत्पादन करने के लिए मार्केट रेट पर गैस खरीदनी पड़ रही है. इसकी वजह से बिजली उत्पादन दर बढ़ चुकी है.

इसलिए दिल्ली में कोई भी पॉवर कट नहीं लग रहा है और दिल्ली सरकार दिल्ली के लोगों को 24 घंटे बिजली मुहैया करवा रही है.

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दूसरी तरफ दिल्ली में भी बिजली की कमी महसूस की जा रही है क्योंकि कई राज्यों से कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट से बिजली उत्पादित होकर दिल्ली को सप्लाई होती है. लेकिन थर्मल पावर प्लांट में कोयले की कमी की वजह से बिजली का पर्याप्त उत्पादन नहीं हो रहा है. इसकी वजह से दिल्ली को भी बिजली की आपूर्ति पर्याप्त नहीं की जा रही है.

महंगी गैस खरीद कर भी बिजली उत्पादन कर रही दिल्ली सरकार
लेकिन दिल्ली ने अपने गैस आधारित पावर प्लांट में बिजली का उत्पादन महंगी गैस खरीद कर भी लगातार किया जा रहा है. इसके चलते कोयले की कमी की वजह से कम मिल रही बिजली के बावजूद भी दिल्ली में पावर कट जैसी समस्या पैदा नहीं हो रही है, जबकि दिल्ली को एनटीपीसी से आमतौर पर मिलने वाली बिजली का आधा ही हिस्सा सप्लाई किया जा रहा है.

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दिल्ली में कोयला आधारित पावर प्लांट नहीं, लेकिन बाहर से खरीदी जाती है बिजली
सरकार का कहना है कि दिल्ली में कोई भी कोयले से चलने वाला पॉवर प्लांट नहीं है. दिल्ली सरकार दिल्ली के बाहर स्थित कोयले के पॉवर प्लांट से बिजली खरीदती है. बिजली का बड़ा उत्पादक केंद्र सरकार की एनटीपीसी है.

जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से एनटीपीसी ने अपने पॉवर प्लांट में बिजली का उत्पादन आधा कर दिया है. इस तरह की स्थिति एक प्लांट पर ही नहीं बल्कि देश में स्थित सभी प्लांट में बनी हुई है.

करीब 11 राज्यों में गहराया हुआ है बिजली का संकट
कोयले की कमी से कई राज्यों में बिजली की ज्यादा किल्लत हो रही है. बिजली की किल्लत होने की वजह से कई राज्यों में पावर कट बहुत ज्यादा लगाए जा रहे हैं. इस समस्या को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों की ओर से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भी अवगत कराया गया है. इन राज्यों में पंजाब, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार और कई अन्य राज्य प्रमुख रूप से शामिल हैं. इन राज्यों में कोयले की कमी से बिजली का पर्याप्त उत्पादन नहीं हो पा रहा है. कोयले की कमी से करीब 11 राज्यों में बिजली संकट गहरा गया है.

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कोयले की कमी को पूरा करने की कोशिश में जुटी है केंद्र सरकार
देशभर में कोयले की कमी और पर्याप्त स्टॉक नहीं बचने के मामले को लेकर केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने हाल ही में एक अहम बैठक भी की थी. इस दौरान केंद्र सरकार ने साफ और स्पष्ट कहा है कि देश में पर्याप्त कोयले का स्टॉक है. देश में बिजली की आपूर्ति जारी रहेगी.

वहीं, सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने भी ऊर्जा मंत्री और कोयला मंत्री के साथ संबंधित विभाग के अधिकारियों की अहम बैठक बुलाई थी और पूरी स्थिति का जायजा लिया. वहीं केंद्र का दावा है कि देश में बिजली की समस्या पैदा नहीं होगी. राज्यों को पर्याप्त कोयले की सप्लाई की जा रही है.

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कई थर्मल पावर प्लांट में बंद हो चुका है बिजली का उत्पादन
दूसरी तरफ देखा जाए तो कई राज्यों में थर्मल पावर प्लांट में बिजली का उत्पादन बंद हो चुका है. एनटीपीसी के थर्मल पावर प्लांट में सामान्य तौर पर होने वाली बिजली का उत्पादन 50 से 55 फ़ीसदी रह गया है. दिल्ली को मिलने वाली 4,000 मेगावाट बिजली में से आधी से भी कम मिल रही है. वहीं, संभावना जताई जा रही है कि अगर देश में राज्यों को पर्याप्त कोयले की सप्लाई नहीं होती है तो आने वाले समय में बिजली संकट और गहरा जा सकता है.

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