Delhi: BSES सस्ती कीमत पर खरीदेगी बिजली, SECI के साथ हुआ 25 साल का करार

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नई दिल्ली. रिलायंस इंफ्रास्ट्र्क्चर (Reliance Infrastructure) के नेतृत्व वाली बीएसईएस डिस्कॉम्स (BSES Discoms) ने आज 510 मेगावॉट अक्षय ऊर्जा के लिए सेकी यानी सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के साथ एक समझौता किया है. 510 मेगावॉट हरित ऊर्जा में से 300 मेगावॉट सौर ऊर्जा होगी और 210 मेगावॉट हाइब्रिड उर्जा (Hybrid Power) होगी.

हाईग्रिड पावर, दरअसल, सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा का मिश्रण है, जिसमें ऊर्जा के दोनों स्रोतों में से हर स्रोत से, कम से कम 33 प्रतिशत ऊर्जा का मिश्रण होना जरूरी है. बीएसईएस ने सेकी से 25 वर्षों का समझौता किया है. समझौते के 18 महीने के बाद, सेकी से सौर और हाईब्रिड ऊर्जा मिलनी शुरू हो जाएगी.

खास बात यह है कि यह बिजली काफी सस्ती दरों पर बीएसईएस को मिलेगी. सौर ऊर्जा 2.44 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिलेगी, जबकि हाईग्रिड ऊर्जा 2.48 रूपये प्रति यूनिट की दर पर मिलेगी. उल्लेखनीय है वर्तमान में बिजली खरीद की औसत दर लगभग साढ़े पांच रुपये प्रति यूनिट है.

इस समझौते के तहत, बीआरपीएल को 320 मेगावॉट बिजली मिलेगी, जिसमें 210 मेगावॉट सौर ऊर्जा होगी और 110 मेगावॉट हाइब्रिड ऊर्जा होगी. वहीं, बीवाईपीएल को इस समझौते से 190 मेगावॉट बिजली मिलेगी, जिसमें 90 मेगावॉट सौर ऊर्जा और 100 मेगावॉट हाइब्रिड ऊर्जा होगी. इसके साथ ही, रिलायंस इंफ्रास्ट्र्क्चर के नेतृत्व वाली बीएसईएस हाईब्रिड पावर की खरीद करने वाली दिल्ली की पहली और देश की चंद कंपनियों में शामिल हो गर्ह है.

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क्या है हाइब्रिड पावरहाइब्रिड पावर में, बिजली के दो स्रोतों यानी सौर तथा पवन ऊर्जा के प्लांट्स एक ही स्थान पर लगे होंगे. इन दोनों प्लांटों की बिजली एक साथ मिक्स होकर बीएसईएस के ग्रिड में जाएगी. खास बात यह है कि वर्तमान में उपलब्ध नेटवर्क से ही ये बिजली ग्रिड में चली जाएगी. इसके लिए अलग से नेटवर्क, लाइन आदि लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

आमतौर पर अलग-अलग तरह की ऊर्जा को ग्रिड में ले जाने के लिए अलग-अलग तरह का विशेष नेटवर्क लगाना होता है. लेकिन हाईब्रिड ऊर्जा एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसमें सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा, दोनों एक ही नेटवर्क से ग्रिड में चली जाएगी. अलग से कोई नेटवर्क, तार आदि लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे उपभोक्ताओं पर अनावश्यक खर्च का बोझ नहीं पड़ेगा.

इसके अलावा, ट्रांसमिशन लाइनों पर पड़ने वाले लोड का भी बेहतर मैनेजमेंट हो पाएगा. क्योंकि सौर ऊर्जा सिर्फ दिन में बनती है जबकि पवन ऊर्जा चौबीसों घंटे बनती है.

बिजली खरीद की औसत कीमत लगभग साढ़े पांच रूपये प्रति यूनिट

जिन दरों पर बीएसईएस ने अक्षय ऊर्जा खरीद के लिए 25 वर्षों का समझौता किया है, वे उपभोक्ताओं के लिए काफी फायदेमंद साबित होंगी. उल्लेखनीय है कि वर्तमान में, बिजली खरीद की औसत कीमत लगभग साढ़े पांच रूपये प्रति यूनिट है. जबकि, बीएसईएस ने ढाई रूपये से भी कम प्रति यूनिट की दर से अक्षय ऊर्जा की खरीद के लिए लंबी अवधि का समझौता किया है.

यानी, प्रति यूनिट लगभग 3 रुपये की बचत. चूंकि, बिजली वितरण एक रेगुलेटेड परिचालन है. इसलिए इस बचत का लाभ उपभोक्ताओं को ही मिलेगा क्योंकि अगर डिस्कॉम्स के पावर परचेज कॉस्ट में कमी आएगी, तो उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों के निर्धारण पर इसका सकारात्मक असर होगा.

पवन ऊर्जा से रात की पीक डिमांड पूरी करने में मदद

यह बात ध्यान देने योग्य है कि दिल्ली में 24 घंटे में दो बार बिजली की खपत उच्चतम स्तर पर पहुंचती है. एक बार दिन में और दूसरी बार रात में. पवन ऊर्जा/विंड पावर चौबीसों घंटे बनती है, जिससे बीएसईस को रात के दौरान बिजली की पीक डिमांड को पूरा करने में मदद मिलेगी.

सौर ऊर्जा का उत्पादन सिर्फ दिन में हो सकता है, जबकि आमतौर पर समुद्री तटों वाले इलाकों में चौबीसों घंटे पवन ऊर्जा का उत्पादन होता है. इसलिए, बीएसईएस अपने बिजली पोर्टफोलियो में पवन ऊर्जा को भी खास अहमियत दे रही है, ताकि उससे रात की पीक डिमांड को पूरा करने में मदद मिल सके.

रिलायंस इंफ्रास्ट्र्क्चर के नेतृत्व वाली बीएसईएस के प्रवक्ता ने मुताबिक, रिलायंस इंफ्रास्ट्र्क्चर के नेतृत्व वाली बीएसईएस टिकाऊ विकास/ सस्टेनेबल ग्रोथ और उसमें अक्षय ऊर्जा की भूमिका के महत्व को बखूबी समझती है. यही वजह है कि बीएसईएस, कम कीमतों पर, तमाम उपलब्ध स्रोतों से अक्षय ऊर्जा की खरीद करती रही है, ताकि उपभोक्ताओं पर कम से कम बोझ पड़े. यह समझौता, बीएसईएस के इन्हीं प्रयासों की एक कड़ी है. यह, दिल्ली के उपभोक्ताओं को हरित और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने का एक और महत्वपूर्ण प्रयास है.

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