Fake Remdesivir Medicine Production in company busted in himachal hpvk

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कांगड़ा: आरोपी के पास नकली रेमडेसिविर के 16 बॉक्स मिले हैं. एक बॉक्स में 25 इंजेक्शन थे.

Fake Remdesivir Medicine Production in Himachal: दिसंबर 2020 में आरोपी डॉ. विनय त्रिपाठी ने कंपनी के मैनेजर के जरिये फिर से एडिशनल ड्रग कंट्रोलर धर्मशाला से रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के लिए लाइसेंस देने का आवेदन किया था, लेकिन फिर अनुमति नहीं मिली थी.

धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (Kangra) जिले में कोरोना के इलाज में उपयोग होने वाली रेमडेसिविर दवा (Remdesivir) की कालाबाजारी का मामला सामने आया है. यहां पर बिना सरकार की इजाजत के दवा का निर्माण किया जा रहा था. मध्य प्रदेश के इंदौर की क्राइम ब्रांच (Crime Branch) ने अब आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है. जानकारी के अनुसार, कांगड़ा में सूरजपुर स्थित ट्यूलिप फॉर्मूलेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बिना किसी अनुमति के रेमडेसिविर इंजेक्शन बना रही थी. इंदौर क्राइम ब्रांच ने इस मामले में डॉ. विनय त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है. इसके पास नकली रेमडेसिविर के 16 बॉक्स मिले हैं. एक बॉक्स में 25 इंजेक्शन थे. आरोप है कि डॉ. विनय त्रिपाठी इस कंपनी को 2020 से चला रहा है. डीआईजी मनीष कपूरिया ने इस कांड का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि रेमडेसिविर इंजेक्शन का स्टॉक आरोपी के पास है और वह इंदौर में सप्लाई करने वाला है. आरोपी ने बताया कि वह ये इंजेक्शन हिमाचल प्रदेश से लाया है. वो इसके लिए ठोस दस्तावेज भी पेश नहीं कर सका. मामले में क्राइम के साथ ड्रग विभाग की टीम भी जांच कर रही है. पता चला है कि व्यक्ति फार्मा बिजनेस से जुड़ा है. पीथमपुर में उसकी यूनिट भी है. सरकार से मांगी थी इजाजतसूत्रों के अनुसार, डॉ. विनय त्रिपाठी ने दिसंबर 2020 में कंपनी के मैनेजर के माध्यम से कांगड़ा के एडिशनल ड्रग कंट्रोलर धर्मशाला के पास इंजेक्शन के उत्पादन के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन, सरकार ने कंपनी को उत्पादन की अनुमति नहीं दी थी. मौजूदा समय में कंपनी में पैंटाजोल टेबलेट्स का उत्पादन हो रहा है. बताया यह भी जा रहा है कि पिछले साल लॉकडाउन लगने के बाद कंपनी बंद थी. अगस्त 2020 को आरोपी डॉ. विनय त्रिपाठी ने कंपनी में फिर से उत्पादन शुरू करवाया. लाइसेंस के लिए आवदेन दिसंबर 2020 में आरोपी डॉ. विनय त्रिपाठी ने कंपनी के मैनेजर के जरिये फिर से एडिशनल ड्रग कंट्रोलर धर्मशाला से रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के लिए लाइसेंस देने का आवेदन किया था, लेकिन फिर अनुमति नहीं मिली थी. कंपनी में वर्तमान में सात कर्मचारी काम कर रहे हैं. इनमें दो सिक्योरिटी गार्ड भी शामिल हैं. ड्रग कंट्रोलर विभाग ने नूरपुर के ड्रग इंस्पेक्टर को मामले की जांच करने के आदेश दिए गए हैं.



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