Famous Recipe : आप अलीगढ़ आए और बरूले चखे बगैर गए तो पछताएंगे, देखिए ये रेसिपी भी खास है और कहानी भी

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रिपोर्ट – वसीम अहमद

अलीगढ़. वैसे तो शहर में आपको कहीं भी बरूले मिल जाएंगे लेकिन सासनी गेट चौराहा के पास आगरा रोड पर पप्पू सक्सेना के हाथ के बने बरूले का स्वाद एक बार आपने चख लिया तो आप भूल नहीं पाएंगे. हरे धनिए की चटपटी चटनी और गर्म भाप से निकलते हुए बरूलों की खास रेसिपी के साथ सक्सेना ने अपनी उम्र का करीब एक पड़ाव पूरा कर लिया है. करीब 58 साल की उम्र के सक्सेना पिछले 32 सालों से बरूले ही बेच रहे हैं और अब उनका बेटा काम में हाथ बंटा रहा है.

NEWS 18 LOCAL से बातचीत में सक्सेना बताते हैं कि वह आगरा ज़िले के गांव चावली के मूल निवासी हैं और रोज़गार की तलाश में निकल आए थे. उन्होंने देखा कि यहां हर साल की नुमाइश में बरूलों के ठेलों पर भीड़ लगी रहती थी. उन दिनों नुमाइश देखने लोग पैदल आते थे. आगरा और मथुरा की तरफ से आने वाले लोगों की सुविधा के लिए ठेला लगाना शुरू कर दिया. उस समय ₹20 प्रति किलो के हिसाब से बरूले बिकते थे.

मसाले से लाजवाब हो गया ज़ायका

नमाज़ के दिनों के अलावा उन्होंने सामान्य दिनों में ठेला लगाना शुरू कर दिया. हरी चटनी की गुणवत्ता के लिए हरा धनिया व हरी मिर्च और मसाले का पाउडर उन्होंने तैयार किया. सक्सेना के मुताबिक उन्होंने यह मसाला अपने ढंग से ही तैयार किया. इसके डालने से बरूलों का स्वाद लाजवाब हो जाता है. साथ ही अच्छी गुणवत्ता वाले रिफाइंड का भी इस्तेमाल करने का दावा वह करते हैं. ज़ायके का कमाल यह है कि शाम 4 बजते ही ढकेल लगने का इंतज़ार लोग बेसब्री से करने लगते हैं.

कैसे बनते हैं बरूले? यह रही रेसिपी

सक्सेना बताते हैं कि छोटे साइज़ के आलू को उबाला जाता है. इसके बाद आलू के ऊपर बेसन, अरारोट और मसाले का लेप लगाया जाता है. इन मसालों में 6 से अधिक तरह के मसाले मिक्स किए जाते हैं. इसके बाद रिफाइंड में धीमी आंच पर इनको सेंका जाता है. बरूले सिकने के बाद इन्हें हरे धनिया और हरी मिर्च की चटपटी चटनी के साथ परोसा जाता है. जिसे लोग चटखारे लेकर खाते हैं.

Tags: Aligarh news, Food Recipe



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