Ghaziabad: इन 4 योग आसनों से मजबूत होंगे फेफड़े, बढ़ेगी रोग प्रतिरोधक क्षमता 

0
15


विशाल झा/गाजियाबाद. दिल्ली-एनसीआर (Delhi-Ncr ) की आबोहवा प्रदूषित (Air Pollution ) होती जा रही है. प्रदूषण गाजियाबाद के निवासियों के लिए नई आफत बन गया है. एयर क्वालिटी इंडेक्स (Air Quality Index ) लगातार बेहद खराब श्रेणी में बना हुआ है. खराब प्रदूषण के चलते लोगों को सांस लेने में परेशानी साथी आंखों में जलन भी महसूस हो रही है. कई दिनों से सुबह के समय एनसीआर के कई इलाकों में धुंध की मोटी चादर देखने को मिल रही है. मौजूदा समय में दिल्ली-एनसीआर गैस चैंबर (Delhi-Ncr Gas Chamber ) में तब्दील हो गया है. एनसीआर के अधिकतर इलाकों का प्रदूषण स्तर 400 के पार है जिसके कारण चिंताएं बढ़ गई हैं.

News 18 Local आज आपको बताएगा कि, प्रदूषण से खुद को सुरक्षित रखने के लिए कौन से योग कर सकते हैं. योग एक्सपर्ट रिचा सूद ने बताया कि, प्रदूषण के इस गंभीर श्रेणी के दौर में भस्त्रिका, कपालभाति, बाह्य प्राणायाम और अनुलोम विलोम योग आसन से खुद को स्वस्थ बनाया जा सकता है.

भस्त्रिका
भस्त्रिका का मतलब होता है लोहार की धौकनी जितना गर्मी उत्पन्न करना. इस आसन के लिए सबसे पहले आपको सीधा बैठना है, फिर मुद्रा बनानी है. इसके बाद सांस अंदर लेनी है और छोड़नी है. आसन के दौरान सांस लेने और छोड़ने की गति पहले धीमी फिर मध्यम और बाद में तीव्र रखनी है. इस आसन को तीव्र गति से करने के वक्त अगर हम अपने हाथों को ऊपर उठा लें तो हमारे फेफड़ों की क्षमता और बढ़ जाती है.

अनुलोम -विलोम
अनुलोम विलोम आसन काफी कॉमन योग आसन है. लेकिन इसके काफी सारे फायदे हैं. अनुलोम विलोम करने वालों को फेफड़ों में जमा अतिरिक्त द्रव से छुटकारा मिलता है. अनुलोम विलोम करने के लिए शांत मुद्रा में बैठ जाए फिर अपनी आंखों को बंद करें और दाहिने अंगूठे को नाक के दाहिने छिद्र पर रखें. अब भाई तरफ से गहरी सांसे लें और दाहिनी ओर से छोड़े. इसी प्रक्रिया को नाक की दूसरी तरफ से भी करें.

कपालभाति प्राणायाम
इस आसन को करने के लिए अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा करें और आराम से बैठ जाएं. हाथों को घुटनों पर रखें हथेलियों को आकाश की तरफ रखें. एक लंबी गहरी सांस अंदर लें और फिर सांस छोड़ते हुए अपने पेट को इस प्रकार से अंदर कीजिए कि वे रीड की हड्डी को छू लें. जितना हो सके उतना ही आसन करना लाभकारी होता है. अब पेट की मांसपेशियों को ढीला छोड़ते हुए अपनी नाभि और पेट को आराम देते हुए अपने नाक से जल्दी से सांस छोड़ें.

बाह्य प्राणायाम
बाह्य प्राणायाम फेफड़ों के लिए काफी लाभदायक माना जाता है. इस आसन को नियमित रूप से करने से ऑक्सीजन लेवल में बढ़ोतरी होती है. इस आसन को करने के लिए सुखासन या पद्मासन में बैठा जा सकता है. इसके बाद गहरी लंबी सांस लें और सांस छोड़ते वक्त पेट पर जोर दें और पेट को अंदर की तरफ खींचे. धीरे-धीरे अपनी थोड़ी को छाती पर लगाने की कोशिश करें. इस अवस्था में कुछ देर तक रुकें.

नोट- ऊपर दिए गए योगासन एक्सपर्ट की राय पर आधारित हैं. इसको केवल सुझाव के रूप में लें.

Tags: Ghaziabad News, Uttar pradesh news



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here