Guru Purnima 2022: क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा? जानें महत्‍व समेत सबकुछ

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रिपोर्ट- सर्वेश श्रीवास्तव

अयोध्या. जीवन में गुरु का महत्वपूर्ण स्थान होता है. शास्त्रों में भी कहा गया है कि बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिलता हैं, इसलिए जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है. सनातन धर्म में गुरु की महिमा का वर्णन अलग-अलग स्वरूपों में किया गया है. गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. इसी दिन वेदों को विभाजन तथा पुराणों की रचना करने वाले वेदव्यास जी का जन्म भी हुआ था. इस दिन को व्यास जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. इस वर्ष आज (13 जुलाई) को गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है. इस दिन अपने गुरुओं का पूजन और सम्मान किया जाता है.

कहा जाता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही व्यास जी ने अपने शिष्यों और मुनियों को श्री भगवत पुराण का ज्ञान दिया था. इसी दिन वेदव्यास के अनेक शिष्यों में से पांच शिष्यों ने गुरु पूजा की परंपरा प्रारंभ की थी. कई मठ और आश्रमों में लोग ब्रह्मालीन संतों समाधि और मूर्तियों की पूजा-अर्चना भी करते हैं.

हनुमानगढ़ी के महंत ने कही ये बात
हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास बताते हैं कि वेद-पुराण, शास्त्र-उपनिषद में तथा सनातन धर्म संस्कृति में गुरु का महत्व भगवान से भी ज्यादा है. जन्म देने वाले माता पिता से बढ़कर गुरु की संज्ञा दी गई है. राजू दास बताते हैं कि गुरु के बिना ज्ञान संभव नहीं है.

वेद पुराण शास्त्रों में भी लिखा है ‘गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरःगुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः’. इसके अलावा भिन्न-भिन्न पुस्तकों में गुरु पूर्णिमा का अलग-अलग तरीके से वर्णन मिलता है. गुरु पूर्णिमा के दिन हर व्यक्ति चाहे वह जिसको गुरु मानता है उसकी पूजा करनी चाहिए. इस दिन गुरु का आशीर्वाद लेने से सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं.

Tags: Ayodhya News, Guru Purnima



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