Gyanvaapi Masjid: हिंदू पक्ष ने शुरू की दलील, कहा- नमाज पढ़ लेने से कोई जगह मस्जिद नहीं हो जाती

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वाराणसी. वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार-गौरी प्रकरण में मंगलवार को 2 घंटे से ज्यादा वक्त तक चली सुनवाई में मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी हो गई और अब हिंदू पक्ष ने अपनी बहस शुरू की. फिलहाल अदालत ने इस मामले में एक दिन बाद ही 13 जुलाई  की अगली तारीख लगा दी. अब 13 जुलाई को भी हिंदू पक्ष अपनी बहस पूरी करेगा और पोषणीयता के विषय में अपनी दलील रखेगा.

बता दें कि वाराणसी के जिला जज की अदालत में सुनवाई चल रही है. बीती तीन तारीखों में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष अपनी दलीलें रख रहा था. करीब 51 बिंदुओं पर मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलें रखी और बहस पूरी की. मंगलवार यानी 12 जुलाई को मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी हो गई और अदालत ने हिंदू पक्ष को अपनी दलील रखने के लिए आदेशित किया पहले दिन करीब आधे घंटे हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलें रखी.

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अदालत में मौजूद रहीं चारों वादी महिलाएं
हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के साथ सुभाष चंद्र चतुर्वेदी और अन्य अधिवक्ताओं ने बहस की. इस दौरान अदालत में चारों वादी महिलाएं भी मौजूद रहीं. हिंदू पक्ष ने अपनी बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि नमाज पढ़ लेने से कोई भी जगह मस्जिद नहीं हो जाती, कभी-कभी किसी सार्वजनिक स्थान पर भी किन्हीं विशेष परिस्थितियों में नमाज पढ़ी जाती है लेकिन ऐसा करने से वह जगह मस्जिद नहीं बन जाती. इस बात को लेकर उन्होंने कई उदाहरण भी दिए.

51 बिंदुओं पर बहस करेगा हिंदू पक्ष
वही मंदिर पक्ष की ओर से कहा गया कि वह जमीन आदि विश्वेश्वर की थी तो मस्जिद को वक्फ किसने किया. अब मंदिर पक्ष भी इन्हीं 51 बिंदुओं पर अपनी बहस पूरी करेगा. माना जा रहा है कि मंदिर पक्ष को भी अपनी बहस पूरी करने में करीब 2 से 3 तारीखों का वक्त लगेगा. अब देखना होगा कि बहस के दौरान मंदिर पक्ष की ओर से कौन कौनसी दलीलें दी जाती हैं.

जज ने कराई थी परिसर की वीडियोग्राफी
गौरतलब है कि दिल्ली निवासी राखी सिंह और अन्य की याचिका पर वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने 26 अप्रैल को ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कराने का निर्देश दिया था. सर्वे का यह काम 16 मई को मुकम्मल हुआ था, जिसकी रिपोर्ट 19 मई को अदालत में पेश की गई थी.

हिंदू पक्ष ने सर्वे के अंतिम दिन ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग मिलने का दावा किया था, जिसे मुस्लिम पक्ष ने नकारते हुए कहा था कि वह शिवलिंग नहीं, बल्कि फव्वारा है. इसके बाद अदालत ने परिसर के विवादित हिस्से को सील करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने मई में ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर मामले को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत से जिला जज के न्यायालय में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर 23 मई से जिला जज की अदालत में इस मामले की सुनवाई हो रही है.

Tags: Gyanvapi Masjid, Gyanvapi Masjid Controversy, Varanasi news



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