Gyanvapi Case: कोर्ट कमीशन की रिपोर्ट से पहले 30 साल पुरानी इन तस्वीरों से देखिए ज्ञानवापी का एक-एक सच !

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रिपोर्ट-अभिषेक जायसवाल,वाराणसी

वाराणसी: काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी (Kashi Vishwanath Gyanvapi) से जुड़े श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन पूजन मामले में वाराणसी के सिविल कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया.कोर्ट ने 17 मई तक कमीशन की कार्यवाही के जरिए पूरे ज्ञानवापी के वीडियोग्राफी की रिपोर्ट मांगी है.कोर्ट कमीशन की कार्यवाही से पहले News 18 लोकल आपको ज्ञानवापी के एक-एक कोने की तस्वीर दिखायेगा.

30 साल पहले खींची गई इन तस्वीरों को देखकर आप समझ सकते हैंकि कमीशन की कार्यवाही के बाद कौन सा सच कोर्ट के सामने आना वाला है.ज्ञानवापी मस्जिद के पश्चिमी हिस्से को देखें तोयहां पुराने मंदिर की आकृति साफ तौर पर देखी जा सकती है.

दीवारों पर हैं सनातनी चिन्ह
मस्जिद के पश्चिमी हिस्से की तमाम दीवारों पर सनातन धर्म के चिन्ह नजर आते हैं.दीवारों के टूटे हिस्से के बीच घण्टी,स्वास्तिक के निशान दिखते हैं.इसके अलावा पीछे के हिस्से में स्थित चबूतरे पर श्रृंगार गौरी का प्राचीन मंदिर भी यहां दिखता है जहां कुछ फूल भी चढ़े हैं.

30 साल पहले ली गई थी तस्वीर
इसके अलावा मस्जिद के दूसरी तरफ जहां वर्तमान में काशी विश्वनाथ का मंदिर है वहां विशाल नंदी मस्जिद की ओर देखता हुआ विराजमान है.इसके बगल में ज्ञानवापी कूप और उसके आस पास छोटे-छोटे कई मंदिर हैं. 30 साल पुराने इन तस्वीरों को वाराणसी के रहने वाले राम प्रसाद सिंह ने 1991 से 1993 के बीच अपने कैमरे में कैद किया था.

आज भी हैंपहले जैसे हालात
राम प्रसाद सिंह वंदे मातरम पत्रिका के संपादक हैं.राम प्रसाद सिंह ने बताया कि उस दौरान अपनी पत्रिका के विशेषांक के लिए उन्होंने इन तस्वीरों को खींचा था.उस दौरान वहां सुरक्षा तो थी लेकिन हालात आज जैसे नहीं थे.उनका दावा है कि उनके पास मस्जिद के एक-एक हिस्से की तस्वीरें हैं और आज भी वहां की वास्तविक स्थिति से इन तस्वीरों का मिलान किया जा सकता है.इन तस्वीरों को देख हर कोई कह सकता है कि वो मस्जिद नहीं बल्कि मन्दिर है.हालांकि अब ये पूरा मामला कोर्ट के अधीन है तो इस मामले में कोर्ट को ही फैसला करना है कि ज्ञानवापी आखिरकार क्या है ?



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