Indian on 26th number in Tokyo paralympics medal tally manish narwal and pramod bhagat wins gold

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टोक्यो. निशानेबाज मनीष नरवाल (Manish Narwal) ने पैरालंपिक रिकॉर्ड के साथ और बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत (Pramod Bhagat) ने अपने बेहतरीन खेल की बदौलत स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाले. इससे शनिवार को टोक्यो पैरालंपिक (Tokyo Paralympics) में चार पदक के यादगार प्रदर्शन से भारत के पदकों की संख्या 17 तक पहुंच गई. विश्व रिकॉर्डधारी 19 वर्ष के नरवाल ने पी4 मिश्रित 50 मीटर पिस्टल एसएच 1 स्पर्धा में 218.2 का स्कोर करके अपने पहले ही खेलों में पीला तमगा जीता.

मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन भगत ने फाइनल में ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को हराकर पुरूष एकल एसएल3 वर्ग में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता. भारत चार स्वर्ण, सात रजत और छह कांस्य से इन खेलों में 17 पदक लेकर तालिका में 26वें स्थान पर पहुंच गया. अभी एक दिन और बचा है.

भारत ने पिछले रियो चरण में केवल चार पदक जीते थे. भारत ने 1972 में पहली बार पैरालंपिक में हिस्सा लिया था, उसके बाद से पिछले चरण तक भारत की झोली में कुल मिलाकर 12 ही पदक थे. अभी भारत के लिये अंतिम दिन और पदक आने बाकी हैं जिसमें बैडमिंटन खिलाड़ी सुहास यथिराज (एसएल4) और कृष्णा नागर (एसएस6) पुरूष एकल के फाइनल में चुनौती पेश करेंगे. तरुण ढिल्लों को सेमीफाइनल में पराजय का सामना करना पड़ा जिससे वह कांस्य पदक की दौड़ में शामिल हैं. वहीं भगत और उनकी जोड़ीदार पलक कोहली मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 वर्ग में कांस्य पदक के प्लेऑफ में खेलेंगे.

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नरवाल ने पैरालंपिक रिकार्ड के साथ भारत की झोली में तीसरा स्वर्ण पदक डाला जबकि सिंहराज अडाना ने रजत पदक जीता जिससे पी4 मिश्रित 50 मीटर पिस्टल एसएच 1 स्पर्धा में शीर्ष दोनों स्थान भारत के नाम रहे. इस वर्ग का विश्व रिकॉर्ड भी नरवाल के नाम है. नरवाल को बचपन से ही खेलों का शौक था और वह फुटबॉलर बनना चाहते थे. दाहिने हाथ में विकार के कारण वह अपना सपना पूरा नहीं कर सके. उनके पिता पहलवान दिलबाग ने पूरी कोशिश की कि दिव्यांग होने के कारण उनके बेटे के सपने नहीं टूटे.

नरवाल का परिवार 2016 में उन्हें कोच राकेश ठाकुर की निशानेबाजी रेंज में ले गया और वह तुरंत इस खेल की ओर आकृष्ट हुए. वह नियमित अभ्यास करते रहे लेकिन उस समय उन्हें पैरालम्पिक खेलों के बारे में नहीं पता था. कोच जयप्रकाश नौटियाल ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्होंने 2017 बैंकाक विश्व कप में पी1 एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में व्यक्तिगत वर्ग का स्वर्ण जीता.

वहीं पी1 पुरुषों की दस मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में मंगलवार को कांस्य जीतने वाले 39 वर्ष के अडाना ने 216.7 अंक बनाकर रजत पदक अपने नाम किया. इसके साथ ही अडाना एक ही खेलों में दो पदक जीतने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए. निशानेबाज अवनि लेखरा और जोगिंदर सिंह सोढी एक ही पैरालंपिक में कई पदक जीतने वाले खिलाड़ी हैं. लेखरा ने मौजूदा खेलों में एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीता है जबकि सोढी ने 1984 पैरालंपिक में एक रजत और दो कांस्य जीते थे.

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बैडमिंटन इस साल पैरालंपिक खेलों में पदार्पण कर रहा है. दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी भगत इस तरह खेल में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए. दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी भगत ने फाइनल में ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को हराया जबकि मनोज सरकार ने तीसरे स्थान के प्लेऑफ में जापान के दाइसुके फुजीहारा को मात देकर कांसय पदक जीता। दोनों ही खिलाड़ियों ने सीधे गेम में जीत दर्ज की.

एसएल3 वर्ग में उन खिलाड़ियों को हिस्सा लेने की अनुमति होती है जिनके पैर में विकार हो. शीर्ष वरीय भारतीय और एशियाई चैंपियन भगत ने योयोगी नेशनल स्टेडियम में 45 मिनट तक चले रोमांचक फाइनल में दूसरे वरीय बेथेल को 21-14, 21-17 से मात दी. टोक्यो खेलों में भारत को चौथा स्वर्ण पदक दिलाने के बाद भगत ने कहा, ‘यह मेरे लिए बहुत विशेष है, सपना सच हो गया. बेथेल ने बहुत कोशिश की लेकिन मैं संयमित रहा और अपना बेहतर खेल दिखाया. मैं इस पदक को अपने माता-पिता और हर उस व्यक्ति को समर्पित करना चाहूंगा जिसने मेरा समर्थन किया. मैं खुश हूं कि मैं भारत को गौरवान्वित कर सका.’

ओडिशा का 33 साल का यह खिलाड़ी अभी मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 वर्ग में कांस्य पदक की दौड़ में बना हुआ है. भगत और उनकी जोड़ीदार पलक कांस्य पदक के प्लेऑफ में जापान के दाईसुके फुजीहारा और अकिको सुगिनो की जोड़ी से भिड़ेंगे. एसएल3-एसयू5 वर्ग में भगत और पलक की जोड़ी को सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की हैरी सुसांतो एवं लीएनी रात्रि आकतिला से 3-21, 15-21 से हार का सामना करा पड़ा.

चार वर्ष की उम्र में पोलियो के कारण उनका बायां पैर विकृत हो गया था. उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में चार स्वर्ण समेत 45 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं. बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में पिछले आठ साल में उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत जीते. 2018 पैरा एशियाई खेलों में उन्होंने एक स्वर्ण और एक कांस्य जीता.
वर्ष 2019 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार और बीजू पटनायक पुरस्कार से नवाजा गया.

वहीं 31 वर्षीय सरकार जब एक साल के थे तो पोलियो से ग्रस्त हो गए थे. उन्होंने फुजीहारा के खिलाफ शानदार जज्बा दिखाते हुए 22-20 21-13 से जीत हासिल की. पुरुष एकल की एसएल3 वर्ग के सेमीफाइनल में वह ब्रिटेन के बेथेल से 8-21, 10-21 से हार गए थे. सरकार ने पांच साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया था लेकिन अपने बड़े भाइयों के खिलाफ जीत के बाद ही वह इस खेल के प्रति जुनूनी हुए जिसके बाद उन्होंने गंभीरता से खेलना शुरू किया. वह सक्षम खिलाड़ियों के खिलाफ अंतर स्कूल प्रतिस्पर्धा में खेले जिसके बाद उन्होंने 2011 में पैरा बैडमिंटन में खेलना शुरू किया.

उन्होंने बीजिंग में 2016 एशियाई चैम्पियनशिप के एसएल3 एकल में स्वर्ण पदक जीता था। 2018 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला. एसएल4 क्लास में सुहास ने इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 31 मिनट में 21- 9, 21-15 से हराया. अब उनका सामना शीर्ष वरीयता प्राप्त फ्रांस के लुकास माजूर से होगा. कर्नाटक के 38 वर्ष के सुहास के टखनों में विकार है. कोर्ट के भीतर और बाहर कई उपलब्धियां हासिल कर चुके सुहास कम्प्यूटर इंजीनियर हैं और प्रशासनिक अधिकारी भी. वह 2020 से नोएडा के जिला मजिस्ट्रेट हैं और कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में मोर्चे से अगुवाई कर चुके हैं.

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सुहास 2017 में बीडब्ल्यूएफ तुर्की पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में पुरूष एकल और युगल स्वर्ण जीता. इसके अलावा 2016 एशिया चैंपियनशिप में स्वर्ण और 2018 पैरा एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया. दूसरी वरीयता प्राप्त नागर ने ब्रिटेन की क्रिस्टीन कूम्ब्स को एसएच6 क्लास सेमीफाइनल में 21 – 10, 21 – 11 से हराया. अब उनका सामना हांगकांग की चु मान केइ से होगा.

22 वर्ष के नागर ने चार साल पहले ही खेलना शुरू किया. उन्होंने पैरा एशियाई खेलों में रजत और विश्व चैम्पियनशिप 2019 में एकल में कांस्य और युगल में रजत पदक जीता था. दूसरे एसएल4 सेमीफाइनल में माजूर ने दूसरी वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी ढिल्लों को करीबी मुकाबले में 21-16, 16-21, 21-18 से हराया. हिसार के 27 वर्ष के ढिल्लों का सामना कांस्य पदक के लिए सेतियावान से होगा. पुरुषों की एफ41 भाला फेंक स्पर्धा के भारत के नवदीप 40.80 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो से चौथे स्थान पर रहे.

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