International Women’s Day: तानों को पीवी सिंधु ने बनाया ताकत, फिर लिखी नई कहानी

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पीवी सिंधु ने अकाने यामागुची के खिलाफ शानदार वापसी की (Photo Credit: pv sindhu1 Instagram)

वर्ल्‍ड चैंपियन पीवी सिंधु (PV Sindhu) ने खुद इसका खुलासा किया था कि तानों का उनकी मानसिक स्थिति पर काफी बुरा असर पड़ा था

नई दिल्‍ली. सायना नेहवाल के बाद भारतीय बैडमिंटन को एक नई दिशा देने वाली पीवी सिंधु (PV Sindhu) के नाम आज कई बड़े खिताब हैं. ओलिंपिक का सिल्‍वर मेडल और फिर वर्ल्‍ड चैंपियनशिप का खिताब सिंधु ने अपने नाम किया. 5 जुलाई 1995 को हैदराबाद में जन्‍मीं पीवी सिंधु ने 2016 में रियो ओलिंपिक में सिल्‍वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था. फाइनल में उन्‍हें कैरोलिना मारिन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि 2019 में वर्ल्‍ड चैंपियन बनकर सिंधु ने ओलिंपिक में रही कमी को कुछ हद तक पूरा किया. सिंधु के लिए वर्ल्‍ड चैंपियन बनने का रास्‍ता बिल्‍कुल आसान नहीं था. इसके लिए उन्‍होंने सबसे पहले तानों को अनसुना किया और लक्ष्‍य पर ही ध्‍यान लगाए रखा.
तानों पर विजय हासिल करने के बाद ही वह गोल्‍डन गर्ल बनीं. दरअसल वर्ल्‍ड चैंपियन बनने से पहले ओलिंपिक फाइनल के अलावा सिंधु कई बड़े फाइनल में असफल रही थी. जिस वजह से उन्‍हें सिल्‍वर सिंधु कहा जाने लगा था. रियो ओलिंपिक में भी सिल्‍वर जीतने के बाद लोग उन्‍हें ‘फाइनल फोबिया’बताने लगे थे, जिसका उनकी मानसिक स्थिति पर इसका काफी बुरा असर हुआ. एक शो में उन्‍होंने इसका खुलासा किया था.

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सिंधु ने पिछले साल भारतीय क्रिकेटर स्मृति मंधाना और जेमिमा रोड्रिग्स के साथ ‘डबल ट्रबल’ कार्यक्रम में कहा था कि 2019 में विश्व चैंपियनशिप का फाइनल उनका तीसरा फाइनल था. उन्‍होंने पहले ब्रॉन्‍ज भी जीते थे, मगर उन्‍हें किसी की कीमत पर चैंपियन बनना था, क्‍योंकि वो नहीं चाहती थी कि लोग कहें कि वह फिर से फाइनल में हार गई.

बस फिर क्‍या था सिंधु ने ठान लिया कि उन्‍हें चैंपियन बनना है और चैंपियनशिप के फाइनल में जापान की नोजुमी ओकुहारा (Nozomi Okuhara) को एकतरफा मुकाबले में 21-7, 21-7 से हराकर इतिहास रच दिया. भारत ने पहली बार इस चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था.



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