Jhansi: वाह! जेल में बंद कैदी बनेंगे हाईटेक, बोलेंगे इंग्लिश और चलाएंगे कंप्यूटर

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रिपोर्ट: शाश्वत सिंह

झांसी की जिला जेल अब सिर्फ़ कैदियों के सजा काटने की जगह नहीं रह गई है. अब यहां कैदियों को आत्मनिर्भर भी बनाया जा रहा है. उन्हें कई तरह के व्यवसायिक हुनर सिखाए जा रहे हैं, जिसकी मदद से वह रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर आजीविका का इंतजाम कर सकें. जेल में बंद कैदियों को कौशल विकास मिशन के तहत विभिन्न प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं. बंदियों को सिलाई कढ़ाई, ऑर्गेनिक खेती, कंप्यूटर प्रशिक्षण और अंग्रेजी भाषा बोलना सिखाया जा रहा है.

कैदियों को साइबर सिक्योरिटी की ट्रेनिंग
झांसी की जिला जेल में कौशल विकास मिशन के तहत अभी 4 बैच चल रहे हैं. एक बैच में 27 कैदियों के हिसाब से कुल 108 कैदियों को ये सभी गुर सिखाए जा रहे हैं. इन सभी कैदियों को कंप्यूटर की शिक्षा के साथ ही अंग्रेजी बोलने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है. इसके साथ ही उन्हें अन्य कोर्स का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.

कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण देने वाले नीरज सिंह ने बताया कि कैदियों को कंप्यूटर प्रशिक्षण के तहत एमएस वर्ड, एक्सेल और प्रेजेंटेशन पर काम करना सिखाया जा रहा है. इसके साथ ही उन्हें सोशल मीडिया से भी अवगत कराया जा रहा है. प्रशिक्षण के तहत कैदियों को साइबर सिक्योरिटी के बारे में भी बताया जा रहा है. उन्हें बताया जा रहा है कि खुद को साइबर अपराधी से कैसे सुरक्षित रखें.

आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास
झांसी जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक रंग बहादुर पटेल ने बताया कि सरकार का उद्देश्य है कि जेल में बंद कैदियों को व्यवसायिक कौशल के प्रशिक्षण से जोड़ा जाए. इससे उन्हें आजीविका और रोजगार के हुनर के माध्यम से भविष्य के लिए आत्मनिर्भर बनाया जा सके. जेल से निकलने के बाद ये कैदी इस हुनर का उपयोग कर काम धंधा करते हुए मुख्य धारा में लौट पाएंगे. भविष्य में भी अन्य कोर्स और बैच शुरू करने पर विचार किया जा रहा है.

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