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जयपुर. राजस्थान विधानसभा सत्र (Rajasthan Assembly Session) से ठीक पहले लेटर बम फोड़ने वाले कैलाश मेघवाल (Kailash Meghwal) ने गुरुवार को भाजपा (Rajasthan BJP Crisis) विधायक दल की बैठक से दूरी बनाई. बुधवार शाम तक गुलाबचंद कटारिया (Gulabchand Kataria) के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने पर अड़े मेघवाल ने अरुण सिंह की समझाइश पर यू टर्न जरूर लिया, मगर कटारिया की अध्यक्षता में होने वाली बैठक का बहिष्कार कर साफ बता दिया कि कटारिया का विधानसभा में नेतृत्व उन्हें मंजूर नहीं. न्यूज 18 से मेघवाल ने कहा, ‘मैं बीमारी की वजह से सदन देरी से आता हूं’. वो उस वक्त विधानसभा पहुंचे, जब विधायक दल की बैठक खत्म हो चुकी थी.

दरअसल, गुलाबचंद कटारिया संघ निष्ठ हैं, तो कैलाश मेघवाल भैरोंसिंह शेखावत के जमाने में बड़े दलित नेता. इनकी दशकों से प्रदेश की दलित राजनीति में तूती बोलती आई है. दोनों में अदावत दशकों पुरानी हैं. कटारिया वसुंधरा राजे के साथ रहकर भी अंदर से राजे के विरोधी रहे. पर मेघवाल पहले राजे से दूर रहे, बाद में नजदीकियां ऐसी हुईं कि आज राजे के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं. मेघवाल के पार्टी विधायक दल की बैठक से दूर रहने के कारण भाजपा नेतृत्व ने राहत की सांस ली.

मेघवाल ने किए एक तीर से दो निशाने

मेघवाल ने एक तीर से दो शिकार किए. पार्टी आलाकमान तक संदेश भी पहुंचा दिया कि प्रदेश भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं है. आज बैठक से दूरी बनाकर ये भी साफ कर दिया कि कटारिया को वो कभी अपना नेता नहीं मान सकते, क्योंकि वरिष्ठता में वो न केवल कटारिया से ग्यारह साल बड़े हैं, बल्कि उनका राजनीतिक वजूद उनके मुकाबले इक्कीस है. बहरहाल, पार्टी ने विधायक दल की बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की. चुनावी नतीजों में जीत मिलने पर खुशी का इजहार हुआ.

प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने कहा हम सरकार को घेरने के लिए एकजुट होकर लड़ेंगे. सरकार को कानून व्यवस्था की स्थिति से लेकर कर्जमाफी तक घेरा जाएगा. बेरोजगारों को रोजगार देने में सरकार विफल हो चुकी है.

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वसुंधरा राजे जल्द आ सकती हैं जयपुर
बहरहाल, वसुंधरा राजे पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से जयपुर से दूर हैं. उनका एक दो दिन बाद जयपुर आने का कार्यक्रम बनने की संभावना है. बीजेपी एकजुट होकर कांग्रेस को घेरने की रणनीति बनाने का दावा कर रही है. मगर जितनी फूट इस वक्त कांग्रेस में हैं उससे कम भाजपा में भी नहीं. दोनों ही पार्टियों को अपनों से चुनौती मिल रही है. जाहिर है सदन में हंगामा होगा, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता.

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