Kashi Vishwanath Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मामले में नया मोड़,किताबों के हवाले से दावा यहां था श्रृंगार गौरी का मंदिर?

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रिपोर्ट-अभिषेक जायसवाल,वाराणसी

वाराणसी: काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी (KashiVishwanath- Gyanvapi) से जुड़े श्रृंगार गौरी मामले में अब नया मोड़ आ गया है.काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने अब श्रृंगार गौरी (Shringar Gauri) के मंदिर के स्थान को लेकर सवाल उठाए हैं.उन्होंने बकायदा इसको लेकर काशी के मंदिरों से जुड़े दो पुस्तक काशी वैभव और काशी गौरव का हवाला दिया है.कोर्ट में श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन पूजन मामले में सुनवाई के बीच इस नए दावे ने नए विवाद को खड़ा कर दिया है.

आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि कुबेरनाथ सुकुल की पुस्तक वाराणसी वैभव के पेज नम्बर 221 पर लिखा है कि श्रृंगार गौरी का मंदिर काशी विश्वनाथ के ईशान कोण में स्थित मां अन्नपूर्णा मन्दिर में है.आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि वाराणसी वैभव काशी के मंदिरों के इतिहास पर आधारित एक प्रामाणिक पुस्तक है जिसके शोध के बाद बिहार राजभाषा परिषद ने इसे छपवाया है.

नगर निगम बताए पता
इस पुस्तक के अलावा धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य शिवानंद सरस्वती की पुस्तक ‘काशी गौरव’ में लिखा है कि प्राचीन श्रृंगार गौरी का मंदिर बांसफाटक मुहल्ले के डी 3/58 में स्थापित है.हालांकि आचार्य अशोक द्विवेदी का कहना है कि इन दोनों किताबों के जिक्र के अनुसार नगर निगम को ये पता लगाना चाहिए कि श्रृंगार गौरी के वास्तविक मंदिर की असली जगह क्या है ?

विद्वानों से लेनी चाहिए सलाह
अशोक द्विवेदी का मानना है कि विवादित स्थल पर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनायी गयी है इस पर कोई संशय नहीं है.लेकिन वहां श्रृंगार गौरी का मंदिर है इस बात का क्या प्रमाण है ? मुकदमे से जुड़े वादी पक्षको इस मामले में पहले विद्वानों से सलाह लेनी चाहिए.

कोर्ट में चल रहा मुकदमा
बताते चलेंकि वाराणसी सिविल कोर्ट में इन दिनों रेखा सिंग बनाम उत्तर प्रदेश सरकार याचिका पर लगातार सुनवाई हो रही है.इस याचिका पर हाल में ही सिविल कोर्ट ने ज्ञानवापी परिक्षेत्र में स्थित देव विग्रहों की जानकारी के लिए कमीशन की कार्रवाई के जरिए वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया था जिसको लेकर हंगामा मचा है.हालांकि इस मामले में अब भी कोर्ट में लगातार सुनवाई हो रही है.



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