Know, how many Danger Buildings in all six zones of North MCD

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नई द‍िल्‍ली. द‍िल्‍ली में हर साल मॉनसून (Monsoon) के दौरान जर्जर ब‍िल्‍ड‍िंग्‍स (Danger Building) के ग‍िरने की खबरें सामने आती रहती हैं. लेक‍िन तीनों एमसीडी (MCD) खासकर नॉर्थ और ईस्‍ट एमसीडी के अंतर्गत आने वाले जोनों में डेंजर ब‍िल्‍ड‍िंग की भरमार है. बावजूद इसके न‍िगमों की ओर से इस पर कोई ठोस कार्रवाई करने की जरूरत महसूस नहीं की जाती है. न‍िगम अध‍िकारी इन ब‍िल्‍डिंगों का सर्वे जरूर करते हैं, लेक‍िन जान माल की रक्षा कैसे हो, इस पर कोई गौर नहीं क‍िया जाता है. नतीजन आए द‍िन हादसों में लोगों की जान चली जा रही है.

नॉर्थ द‍िल्‍ली नगर निगम (North MCD) की बात की जाए तो इस साल अध‍िकार‍ियों ने डेंजर ब‍िल्‍ड‍िंगों के सर्वे में केवल 424 इमारतों को खतरनाक चिन्हित किया है. जो अपने आप में बेहद हैरान कर देने वाला है. निगम के अधिकार‍ियों के द्वारा क‍िया जा रहा डेंजर ब‍िल्‍ड‍िंगों का सर्वे सिर्फ कागजी हर माना जा रहा है.

हाल ही में रक्षा बंधन के द‍िन भी वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में भी ऐसी ही घटना हुई थी जिसमें इमारत का कुछ हिस्सा गिर जाने की वजह से एक मजदूर की मौत हो गई थी.

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बताया गया क‍ि वजीरपुर की यह पूरी इमारत पिछले काफी लंबे समय से जर्जर थी. पिछले कई सालों से हर साल दिल्ली के अंदर विशेष तौर पर नॉर्थ एमसीडी के क्षेत्र में हर साल कई इमारतें बरसात के मौसम में ही भरभरा कर गिर जाती है. लेकिन उसके बावजूद भी निगम के द्वारा ऐसी घटनाओं की पुनरावृति को रोकने के लिए कोई भी सख्त कदम जमीनी स्तर पर नहीं उठाया गया है. हालांकि कागजों के ऊपर आदेश देखने को जरूर मिलते हैं.

हर साल बरसात के मौसम आने से 2 महीने पहले ही नॉर्थ एमसीडी के द्वारा खतरनाक इमारतों को लेकर अपने बिल्डिंग विभाग के द्वारा एक सर्वे कराया जाता है. इस सर्वे के तहत निगम के सभी अधिकारियों को खतरनाक इमारतों को चिन्हित करके उसकी जानकारी रिपोर्ट में देनी होती है. हर साल इसी तरह से निगम में रिपोर्ट तैयार की जाती है.

नॉर्थ एमसीडी के क्षेत्र में हैं कुल 83 लाख से ज्‍यादा प्रॉपर्टीज
इस बीच देखा जाए तो इस साल भी निगम के द्वारा ऐसे ही एक रिपोर्ट तैयार की गई थी जिसके तहत नॉर्थ एमसीडी के क्षेत्र में कुल 83 लाख 4100 से ज्यादा प्रॉपर्टीज हैं. जिसमें से निगम अधिकारियों द्वारा कुल 6 लाख 55 हज़ार 219 संपत्तियों का औचक निरीक्षण कर उनमें से खतरनाक इमारतों को चिन्हित कर लिया गया था.

NDMC की 424 इमारतें खतरे के निशान से ऊपर, तुरंत र‍िपेयर‍िंग की जरूरत
निगम के अधिकारियों द्वारा जो रिपोर्ट बनाई गई है, उस रिपोर्ट के अनुसार नॉर्थ दिल्ली के क्षेत्र में करीब 265 इमारतें ऐसी हैं. जिन्हें रिपेयर की आवश्यकता है और उसके बाद उन्हें ठीक करवाया जा सकता है. वहीं 424 इमारतें खतरे के निशान से ऊपर है. जिन को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है. इसके चलते निगम ने इन खतरनाक इमारतों के मद्देनजर डीएमसी एक्ट 348, 349 के तहत नोटिस जारी किए थे.

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इन जोनों में हैं इतनी डेंजर इमारतें
निगम अधिकारियों द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में इस साल सबसे ज्यादा खतरनाक इमारतें रोहिणी जोन में चिन्हित की गई है. जिनकी कुल संख्या 142 है. जबकि उसके बाद सबसे ज्यादा खतरनाक इमारतें करोल बाग जोन में हैं जिनकी संख्या 96 है. वहीं, सिविल लाइन जोन में खतरनाक इमारतों की संख्या 83 है और केशव पुरम जोन में खतरनाक इमारतों की संख्या 75 है. जबकि नरेला जोन में खतरनाक इमारतों की संख्या 7 है.

सिटी एसपी जोन में 100 साल से ज्‍यादा इमारतों की भरमार, डेंजर स‍िर्फ 21 म‍िली
इसके अलावा सिटी एसपी जोन की बात करें तो इसको इतिहास कई सौ साल पुराना है. इस पूरे जोन में 100 साल से ज्‍यादा पुरानी इमारतों की संख्या अनगिनत है. उस जोन में केवल 21 इमारतें खतरनाक स्तर के ऊपर चिन्हित की गई हैं, जो अपने आप में चौंकाने वाली हैं.

कुछ दिन पहले नंद नगरी इलाके में भी ग‍िरी थी जर्जर इमारत
इस बीच देखा जाए तो डेंजर ब‍िल्‍ड‍िंग को लेकर पूर्वी द‍िल्‍ली नगर न‍िगम (East MCD) के आंकड़े भी कुछ कम चौंकाने वाली नहीं हैं. कुछ दिन पहले नंद नगरी इलाके में एक जर्जर भवन गिरने की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. साथ ही 3 लोग घायल भी हुए थे. यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी कई हादसे सामने आ चुके हैं.

लेकिन हादसे के बाद भी निगम अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया. अधिकारी आनन-फानन में वार्ड का निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट तैयार कर अपने वरिष्ठ अधिकारी को देते हैं. लेकिन इसके बाद भी ऐसे सैकड़ों भवन सूची से रह जाते हैं. जो जर्जर हालात में होने के बावजूद भी निगम के अधिकारियों से खतरनाक घोषित नहीं होते.

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EDMC ने डेढ़ लाख से ज्‍यादा मकानों को क‍िया था सर्वे, नहीं म‍िला एक भी डेंजर
ईडीएमसी के मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल का कहना है क‍ि बीते सप्ताह जो आंकड़े निगम अधिकारियों की तरफ से उपलब्ध कराए गए हैं. उसके मुताबिक ईडीएमसी के शाहदरा साउथ जोन में करीब 61,000 मकानों का सर्वे किया गया. जबकि शाहदरा नॉर्थ जोन में करीब 91,000 मकानों का सर्वे किया गया. लेक‍िन हैरान करने वाली बात यह है क‍ि इनमें से एक भी मकान को सर्वे में र‍िपोर्ट में डेंजर नहीं बताया गया है. इन आंकड़ों पर मेयर अग्रवाल ने भी हैरानी जताई है.

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