Lata Mangeshkar: गंगा की तरह ‘सदानीरा’ हो गईं लता मंगेशकर, वाराणसी में विलीन हुईं अस्थियां

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वाराणसी. काशी को मोक्ष का द्वार का कहा जाता है. ऐसे में लोग दूर-दूर से अपना अंतिम समय वाराणसी गंगा के घाट बिताने आते हैं. सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की अस्थियां भी इसी धर्मनगरी में लाई गई. गंगा में जब उनकी अस्थियां प्रवाहित की गई तो ऐसा लग रहा था जैसे मां गंगा बाहें फैलाकर अपनी बहन सरस्वती की बेटी का स्वागत कर रही है. मान्यताओं के मुताबिक, हमारा शरीर पांच तत्वों जल, थल, अग्नि, आकाश और पवन से मिलकर बना है. मृत्यु के बाद हमारा शरीर इन्हीं पंचतत्वों मे विलीन हो जाता है.

महान गायिका लता मंगेशकर की अस्थियों को पूरे विधि विधान के साथ 3 कलशों में रखा गया था. उनकी अस्थियों को वाराणसी के अलावा नाशिक और हरिद्वार में भी प्रवाहित किया जाना है. उनकी बहन उषा मंगेशकर और परिवार के अन्य सदस्य कलश लेकर वाराणसी पहुंचे थे. यहां अहिल्याबाई घाट पर पंडित श्रीकांत पाठक ने पूजा-अर्चना के बाद गंगा की गोद में प्रवाहित कर दिया. वहीं दूसरा कलश नाशिक की गोदावरी नदी में विसर्जित किया गया.

अस्थि विसर्जन को आई थीं उषा मंगेशकर

लता मंगेशकर की आत्मा की शांति के लिए गंगा घाट पर वैदिक विधि-विधान से हवन भी किया गया. इसके बाद उषा मंगेशकर समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने बाबा विश्वनाथ का दर्शन भी किया. विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद बनारस में रहने वाला महाराष्ट्रियन समाज भी मंगेशकर परिवार से मिला और स्वर-कोकिला के निधन पर शोक प्रकट किया.

सरस्वती पूजा के दिन हमें छोड़ गईं लता

बता दें कि लता जी को लोग सरस्वती मां की अवाज मानते थे और सरस्वती पूजा के अगले ही दिन लता जी सरस्वती में ही विलीन हो गईं. लता दी का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ मुंबई के शिवाजी पार्क में किया गया था. लता मंगेशकर के परिवार ने अस्थियां को एकत्र कर 3 कलश में पूरे विधि-विधान के साथ रखा था.

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Tags: Lata Mangeshkar, Varanasi news



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