Lucknow: घड़ियाल के नन्हे मेहमानों से गुलजार हुआ कुकरैल, 3 साल बाद देशभर की नदियों में करेंगे राज

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रिपोर्ट-अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. यूपी की राजधानी लखनऊ का कुकरैल घड़ियाल सेंटर इन दिनों घड़ियाल के नन्हे मेहमानों से गुलजार हो गया है. दरअसल यहां पर 129 घड़ियालों (बच्चों) ने अपनी आंखें खोली हैं. 9 जून को इन घड़ियालों का जन्म हुआ है. यह नन्हे घड़ियाल इन दिनों जमकर धमाचौकड़ी मचा रहे हैं और सभी के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. नए मेहमानों को अधिकारियों ने कड़ी निगरानी में रखा है और इनकी देखरेख कर रहे हैं. फिलहाल ये सभी नन्हे मेहमान अभी छोटी मछली खा रहे हैं.साथ ही इनको शिकार करना भी सिखाया जा रहा है. फिर इन्हें तैयार करने के बाद देश भर की नदियों में छोड़ दिया जाएगा.

बहरहाल, 7 अप्रैल को पांच मादाओं ने 180 अंडे दिए थे. अधिकारियों की नजर पड़ने पर उन्होंने इन अंडों को सुरक्षित इनक्यूबेशन रूम में रख दिया था. हालांकि इन 180 अंडे में से 129 अंडे ही सुरक्षित अधिकारियों को मिले थे. बाकी के अंडे खराब हो गए थे. इनक्यूबेशन रूम में रखकर इन अंडों को करीब 30 से 35 डिग्री के बीच में 1 महीने तक बालू के अंदर दबाकर सेंका जाता है. 8 जून को बालू के अंदर से आवाज आने पर अधिकारियों ने 9 जून की सुबह 6 से 7 बजे के बीच में सभी अंडों को बालू से बाहर निकाल कर रख दिया और इसी दौरान इन 129 अंडों में से एक-एक करके घड़ियालों के नन्हे बच्चे बाहर आ गए. इन बच्चों को इसके बाद हैचलिंग पाउंड में डाल दिया गया, जहां पर अभी तक ये हैं. अब ये बच्चे 22 दिन से ज्यादा के हो गए हैं.

10 दिन बाद खाते हैं मछली
कुकरैल के अधिकारियों ने बताया कि घड़ियाल के बच्चे जन्म के 10 दिन तक अपनी मां के पेट से मिले भोजन पर ही जिंदा रहते हैं. 10 दिन बाद उन्हें खाने में बेहद छोटी मछलियां दी जाती हैं, ताकि ये उन्हें आसानी से खा सकें. इतना ही नहीं कुकरैल में इन बच्चों को मछली का शिकार करके उन्हें खाना भी सिखाया जाता है, इसीलिए इन्हें जिंदा मछली दी जाती हैं.

3 साल तक यहां रखते हैं
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट नीरज कुमार ने बताया कि घड़ियाल सेंटर कुकरैल राज्य का अनूठा सेंटर है, जहां पर घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुए का कुनबा लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि यहां पर घड़ियाल के बच्चों को 3 साल तक रखा जाता है. 3 साल के बाद जब यह करीब डेढ़ मीटर की लंबाई हासिल कर लेते हैं, तब इन्हें डिमांड के अनुसार देशभर की नदियों में छोड़ दिया जाता है.

Tags: Lucknow news, Wildlife news in hindi



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