Lucknow News: नॉन वेज खाने वालों की नहीं है इस मंदिर में एंट्री, अगर पहुंच गए तो…

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लखनऊ: ओडिशा के कोणार्क के अलावा लखनऊ में भी 1100 साल पुराना पौराणिक सूर्य देव का मंदिर है. जहां दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. रामायण कालीन इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जब लक्ष्मण सीता माता को वन में छोड़ने जा रहे थे तो कुछ वक्त तक उन्होंने इसी मंदिर में विश्राम किया था. आज यह मंदिर पूरी तरह से सुनसान है.

इस मंदिर के महंत कुरुक्षेत्र गिरी महाराज का कहना है कि इस मंदिर में जिस मांसाहारी भक्त ने प्रवेश किया वह बर्बाद हो गया. यही वजह है कि यहां पर बहुत कम लोग आते हैं. यहां मंदिर के महंत 3008 ब्रह्मलीन महंत जंगम गिरी महाराज ने कड़ी तपस्या की थी. वे भी इस मंदिर में किसी को प्रवेश नहीं करने देते थे.

हैरान कर देने वाली बात यह भी है कि इन सब के बावजूद इस पूरी मंदिर के बाहर और अंदर कहीं पर भी ऐसा बोर्ड हमें लगा नहीं मिला जिससे इसमें प्रवेश करने से पहले किसी भी भक्तों को इस मान्यता के बारे में जानकारी हो. यहां के फूल विक्रेता अशोक कुमार सैनी का भी यही कहना है कि यहां बहुत कम लोग आते हैं और सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर के बाहर ही यहां के महंत भी बैठते हैं. हालांकि हम किसी भी मान्यता की पुष्टि नहीं करते हैं क्योंकि शास्त्रों के मुताबिक सूर्यदेव एक ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा उपासना करने से इंसान समाज में मान सम्मान और प्रतिष्ठा हासिल करता है.

शनिदेव भी हैं विराजमान
यूं तो आपने शनिदेव की कई मूर्तियां देखी होंगी लेकिन यहां पर जो शनिदेव हैं उनका मनोकामना पूर्ण स्वरूप विराजमान है. एक बेहद प्राचीन पीपल का वृक्ष है जिसके नीचे गौरी शिव शंकर हैं. नौ देवियां भी मौजूद हैं, सरस्वती मां भी हैं. राम दरबार भी है और एक प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे हनुमान जी विराजमान हैं. जिनके कंधे पर प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी हैं.

ऐसे पहुंचे यहां
यह मंदिर डालीगंज पुल के पास स्थित है. कैसरबाग रोड पर यह मंदिर है. यहां पर आप किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से जैसी हजरतगंज की ओर बढ़ने लग जाएंगे तो कुछ मीटर दूर पर आपको यह मंदिर नजर आ जाएगा.

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FIRST PUBLISHED : November 15, 2022, 08:36 IST



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