Lucknow News: शनिधाम के दर्शन से साढ़ेसाती और ढैय्या के बुरे प्रभाव से मिलती है राहत, जानें क्‍या है मान्‍यता?

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अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. शनिधाम लखनऊ का सबसे प्राचीन और पहला शनिदेव का मंदिर है. इसके बाद लखनऊ में अन्य जगहों पर शनिदेव के मंदिरों का निर्माण कराया गया. इस मंदिर को 5 सितंबर 1971 में गोविंद राम नाम के एक पुत्र ने अपनी मां की याद में निर्माण कराया था. यह सिद्ध मंदिर लखनऊ के होटल क्लार्क अवध राणा प्रताप मार्ग पर बना हुआ है. शनिवार का दिन इस मंदिर में बेहद खास होता है. भक्तों की भारी भीड़ पूजन और दर्शन करने के लिए पहुंचती है.कहते हैं कि शनिवार के दिन जो भी भक्त यहां पर स्थापित शनिदेव की प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पित करता है उसे शनिदेव की साढ़ेसाती, ढैय्या के बुरे प्रभाव से राहत मिलती है.

शनिधाम गोमती नदी के किनारे बसा हुआ है. इसका परिसर काफी बड़ा है और यहां पर शनिदेव के अलावा राम भक्त हनुमान, पीपल का पेड़, झूलेलाल और प्राचीन शिवलिंग स्थापित है. जबकि मुराद पूरी होने पर भक्त घंटी चढ़ाते हैं. इसके अलावा कुछ ऐसे भी भक्त होते हैं जो मंदिर में दूसरे देवी देवताओं की मंदिरों का निर्माण कराते हैं.

सुबह 6 बजे खुल जाता है मंदिर
इस मंदिर के प्रमुख महंत सुरेश जोशी हैं. उनके बेटे अनुराग जोशी ने बताया कि यह मंदिर शनिवार को सुबह 6:00 बजे खुल जाता है और रात में 12:00 बजे बंद होता है. सुबह 8:30 बजे आरती होती है और रात में 8:00 बजे की जाती है. यह मंदिर साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि की महादशा में दर्शन करने से राहत दिलाता है. उन्होंने बताया कि अभी ऑनलाइन दर्शन सिर्फ यूट्यूब पर ही होते हैं जो शनिधाम लखनऊ मंदिर के नाम से है.

शनिदेव कर्म फलदाता है
इस शनिधाम में शनि देव का मुख उत्तर की ओर है. ठीक उसी प्रकार जैसे कि महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिंगणापुर में शनिधाम है. सूर्य और छाया पुत्र शनि नौ ग्रहों में से एक हैं. कहते हैं कि शनि देव न्याय के देवता हैं और साढ़ेसाती‌ में कर्मों के हिसाब से इंसान को फल देते हैं.

ऐसे पहुंचे शनिधाम
जब आप हजरतगंज चौराहे से परिवर्तन चौक चौराहा पहुंचेंगे तो आपको कैसरबाग जाने वाली रोड पर सीधा जाना है. दाहिने हाथ पर हनुमंत धाम का आपको एक साइन बोर्ड मिलेगा, तो वहीं से दाएं मुड़ते ही आपको होटल क्लार्क अवध के पीछे और हनुमंत धाम से पहले शनिधाम मिल जाएगा.

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