Marital Rape: बलात्कार से जुड़े कानून में पत्नी का अधिकार क्या सेक्स वर्कर से भी कम है, दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी | Delhi High Court asked what is the right of wife less than ‘sex worker’ | Patrika News

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दिल्ली हाई कोर्ट ने मैरिटल रेप मामले में सुनवाई को दौरान अहम टिप्पणी की है। बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि क्या एक पत्नी को निचले पायदान पर रखा जा सकता है जो एक सेक्स वर्कर की तुलना में कम सशक्त हो सकता है। अदालत ने ये भी पूछा है कि किस तरह एक विवाहित महिला को सेक्स से इंकार करने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है।

नई दिल्ली

Published: January 14, 2022 04:10:33 pm

दिल्ली हाईकोर्ट में मैरिटल रेप मामले में सुनवाई को दौरान अदालत ने अहम टिप्पणी की है। दरअसल कोर्ट ने कहा है कि कैसे एक शादीशुदा महिला को संभोग से इनकार करने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है. जबकि, बगैर सहमति के संबंध बनाने पर अन्य को बलात्कार का मामला दर्ज कराने का हक है। बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट वैवाहिक बलात्कार के अपराधिकरण की मांग कर रही याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। ये सुनवाई जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस हरि शंकर की पीठ ने की।

जस्टिस शकधर ने कहा कि सेक्स वर्कर को भी अपने ग्राहक को ना कहने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जब पति की बात आती है, तो एक महिला, जो पत्नी भी है, उसे इस अधिकार से कैसे दूर रखा जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि, दलील के तौर पर सेक्स वर्कर का उदाहरण दिया गया, लेकिन जिस तरह सेक्स वर्कर कभी भी ना कह सकती है तो क्या पत्नी को इससे नीचे रखा जा सकता है। वहीं एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील राजशेखर राव ने कहा कि कोई जबरदस्ती करता है, तो ‘सेक्स वर्कर्स’ को शख्स के खिलाफ आरोप लगाने का अधिकार है।

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याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वकील करुणा नंदी ने कहा कि शादी के मामले में ‘सेक्स’ की उम्मीदें हैं, इसलिए सेक्स वर्कर के साथ भी ऐसा ही है। हालांकि, जस्टिस हरि शंकर ने कहा कि दोनों चीजों को एक जैसा नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने आगे कहा, ‘इस बात में कोई शक नहीं है कि महिला ने भुगता है, लेकिन हमें उस व्यक्ति के परिणामों को ध्यान में रखना होगा, जो 10 साल की सजा के लिए उत्तरदायी है। उन्होंने कि, ‘मैं फिर दोहरा रहा हूं कि धारा 375 प्रावधान यह नहीं करता कि रेप पर सजा नहीं मिलनी चाहिए। सवाल यह है कि क्या इसे बलात्कार की तरह सजा दी जानी चाहिए?’

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उन्होंने ये भी कहा कि इस बात पर अगर हम राजी है तो ये भी ध्यान रखना होगा कि हम एक विधायी प्रावधान को खत्म कर हां कह रहे हैं। और हम यह कह रहे हैं कि 375 में शामिल हर चीज लागू होनी चाहिए, फिर भले ही पार्टियां आपस में शादीशुदा क्यों न हों।

इसपर राव ने तर्क दिया कि बलात्काकर, बलात्कार होता है और बलात्कारी, बलात्कारी रहता है। ऐसे में कोई भी तर्क सच्चाई को बदल नहीं सकता। इसके साथ ही राव ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट लगातार ये कहता आया है कि दुष्कर्म महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करता है। ऐसे में ये समाज के खिलाफ अपराध है।

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