MATHURA: बेटियों के लिए संजीवनी बना संदीपनी स्कूल, निःशुल्क दे रहा आधुनिक और आध्यात्मिक ज्ञान

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चंदन सैनी

मथुरा. जैसे-जैसे वक्त बदल रहा है, उसी तरह से जीवन जीने के संसाधन भी बदल रहे हैं. बदलते जमाने में शिक्षा का स्तर तेजी से बढ़ा है, मगर मथुरा के वृंदावन में एक स्कूल ऐसा भी है, जो सनातन संस्कृति को लेकर आज भी चल रहा है. यहां विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ सनातन संस्कृति के बारे में पढ़ाया जाता है. वृंदावन के संदीपनी मुनि स्कूल में बच्चियों को आधुनिक शिक्षा ग्रहण कराने के साथ-साथ उन्हें सनातनी सभ्यता के बारे में भी पढ़ाया जा रहा है. संदीपनी मुनि स्कूल की ओर से यहां नि:शुल्क शिक्षा देने का कार्य किया जा रहा है.

यहीं नहीं, बच्चियों को लाने और ले जाने के लिए स्कूल बस नहीं बल्कि बैलगाड़ी लगी हुई है. यह बैलगाड़ी प्रतिदिन छात्राओं को घर से स्कूल और स्कूल से घर तक छोड़ने का कार्य करती है. यह प्रक्रिया अनवरत चली आ रही है, और लगभग 15 वर्ष से इसी तरह से बैलगाड़ियों में बच्चे स्कूल आते हैं.

छात्राओं के लिए संजीवनी है ‘संदीपनी’
न्यूज़ 18 लोकल से बात करते हुए प्रिंसिपल दीपिका शर्मा ने कहा कि बैलगाड़ियों से बच्चों को लाने-ले जाने के पीछे संदीपनी मुनि स्कूल का उद्देश्य बैलों को संरक्षण प्रदान करना है. क्योंकि दूध के लिए गाय को तो हर कोई पाल लेता है, उसकी देखभाल करता है, लेकिन गाय के बछड़े और बैलों की किसी को कोई परवाह नहीं रहती है.

दीपिका बताती हैं कि उनके स्कूल में करीब 12 बैलगाड़ी है, जो बच्चियों को प्रतिदिन स्कूल से घर और घर से स्कूल लाती-ले जाती हैं. यहां बच्चियों को सभी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है. दोपहर में उनके लिए लंच की व्यवस्था भी स्कूल की तरफ से की जाती है. स्कूल की ड्रेस और बच्चों को लाने और ले जाने के लिए भी नि:शुल्क व्यवस्था है.

स्कूल आते-जाते बच्चे करते हैं संकीर्तन
संदीपनी मुनि स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं की सबसे खास बात है कि वो इन बैलगाड़ियों में स्कूल से घर और घर से स्कूल जाते समय हरि नाम संकीर्तन करती हैं. हरि नाम संकीर्तन करते समय विद्यार्थी बड़ा आनंद लेते हैं. यहां पढ़ने वाली इन बच्चियों ने अपनी सभ्यता को संजो कर रखा हुआ है.

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