Meaning and importance of Chhattisgarhi official language

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राज म जम्मो प्रसासनिक कारज हर राजभासा म होथे अउ प्रसासनिक दृस्टि ले पूरा राज म राजभासा के अब्बड़ महत्व होथे. महात्मा गाँधी कहे रिहिन हे कि – “राष्ट्रभाषा राष्ट्र की पहचान होती हैं और राजभाषा राज्य की पहचान होती हैं.”

त हमर छत्तीसगढ़ राज म माईभाखा छत्तीसगढ़ी रिहिस.जम्मो 2 करोड़ लोगनमन म 82.56 प्रतिसत लोगनमन के जिनगी म छत्तीसगढ़ी भासा हर रचे बसे रिहिस. त सर्व सम्मति ले 28 नवम्बर सन् 2007 म छत्तीसगढ़ी भासा ल हमर राजभासा घोषित करे गिस .इही गोठ हर हमर छत्तीसगढ़िया मन बर बड़ गरब के गोठ हरे ,सम्मान के गोठ हरे. इहां के लोगन मन के एक दूसर ले संपर्क करे बर इही छत्तीसगढ़ी भासा हर अपन गुरतुर बोली ले ,सोझे जइसन बोलबे तइसने लिखबे ,जम्मो लोगनमन म रचे बसे हवय अउ समझे जात हवय. बाजार हाट ,अस्पताल ,बेपार के गोठ हावय.

हमर छत्तीसगढ़ी भासा के अपन व्याकरन हवय,शब्दकोस हवय,देवनागरी लिपि हवय.लोक गाथा अउ लोक गीत ले साहित्य अब्बड़ समृद्ध हवय. छत्तीसगढ़ी राजभासा बने ले छत्तीसगढ़ी ल बेवहार म लायबर ,राजकाज अउ सासकीय कार्यालय म ,प्राथमिक सिक्छा म छत्तीसगढ़ी म लिखई-पढ़ई ,जम्मो सिक्छा म छत्तीसगढ़ी भासा के महत्व अउ उपयेग के गोठ होय लगिस.

अभे लोगन मन ल चाही इही हमर छत्तीसगढ़ी ल अपन रोजमर्रा के जिनगी म बउरे. छत्तीसगढ़ी म हर कामकाज ,सासकीय-असासकीय जम्मो लिखा -पढ़ी अउ गोठ बात ,बेपारी अपन प्रतिस्ठान म ,बाजार-हाट म इही भासा ल बउरे उपयोग म लाने.

छत्तीसगढ़ी राजभासा के विकास बर छत्तीसगढ़ राज सरकार हर ‘छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ‘ के इस्थापना करिस.छत्तीसगढ़ी राजभासा आयोग विधेयक ल 28 नवम्बर 2007 ले पारित किए गे रिहिस. विधेयक के पास होय के सेती हर बछर के 28 नवम्बर ल ‘छत्तीसगढ़ी राजभासा दिवस’ के रूप म मनाय जाथे. इही राजभासा के परकासन 11 जुलाई 2008 के राजपत्र म किए गे रिहिस. इही आयोग के कारज 14 अगस्त 2008 ले चालू होइस .आयोग के पहली सचिव पद्म श्री डॉ. सुरेंद्र दुबे जी रिहिन.

14 अगस्त के दिन राजभासा आयोग के इस्थापना दिवस मनाय जाथे.इही इस्थापना के दिन ल मातृसक्ति माने महिला साहित्यकार मन ल समर्पित कर दिस. इही इस्थापना दिवस के दिन महिला साहित्यकार मन डहर ले महिलामन बर संचालित होथे. माईभाखा अउ मातृभासा ल महतारी भासा कहेगे हवय. ऐखर सेती छत्तीसगढ़ के नारी परानी मन के राजभासा के प्रति चिन्तन जरूरी हवय.

राजभासा आयोग के अपन तीन ठन उद्देश्य तको हवय -1.राजभासा ल संविधान के आठवीं अनुसूची म दर्जा दिलाना हवय.2.छत्तीसगढ़ी भासा ल राजकाज के भासा के रूप म उपयोग म लाने के हवय.3. त्रिभासायी भासा के रूप म सामिल पाठ्यक्रम म सामिल करे के हवय. इही उद्देश्य मन हमर राजभासा छत्तीसगढ़ी के बढ़ोत्तरी बर जरूरी हवय.
छत्तीसगढ़ी राजभासा के विकास बर ‘छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग’ हर छत्तीसगढ़ी के बिकास बर अब्बड़ उदिम करत हवय.

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार मन ल जेन हर छत्तीसगढ़ी साहित्य के सेवा करत हवय तेन ल आयोग हर “छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग सम्मान” 2010 ले सम्मानित करत हवय. छत्तीसगढ़ी अउ छत्तीसगढ़ी ले संबंधित जम्मो भासा पुस्तक ल बिसाय के योजना , ‘माई कोठी’ म जम्मो पुस्तक मन ल बिसाय जावत हे अउ लेखक मन ल पुस्तक छपाय बर 10,000रू. अनुदान राशि दिये जावत हे.

आयोग द्वारा ‘बिजहा’ कार्यक्रम तको सुरू करे गे हवय. जेमा छत्तीसगढ़ी के मानक रूप जइसे उत्तर म सरगुजा जिला, दक्छिन म दंतेवाड़ा जिला, पूरब ,पस्चिम के जिला तक फहिरे जम्मो 28 जिला म छत्तीसगढ़ी, लरिया, खलटाही, बस्तरिया,सरगुजिया, सदरी कोरबा,बिंझवारी, कलंगा,भूलिया,बैगानी,कमारी,हल्बी,गोंडी के अइसने रूप-उपरूप-सहरूप ल सकेले के योजना बनिस हवय. जेमा जम्मो छत्तीसगढ़ी के मानक रूप हर सकेलावत हे. छत्तीसगढ़ी राजभासा बने ले प्राथमिक, माध्यमिक, हाई-हायर सेंकेडरी स्तर म छत्तीसगढ़ी ल पाठ्यक्रम म समावेस करे गे हवय. अभे विश्वविद्यालय म बी.ए. अउ एम. एम अउ राज्य लोक सेवा म तको छत्तीसगढ़ी ल पाठ्यक्रम म राखे गे हवय.

कुशाभाउ ठाकरे वि. वि. म पी.जी. डिप्लोमा इन फंक्शनल छत्तीसगढ़ी म पाठ्यक्रम तको सुरू करे गे हवय.अभे जम्मो शोध करइया सोधार्थी मन तको नवा छत्तीसगढ़ राज बर नवा नवा खोज करत हवय. छत्तीसगढ़ी भासा साहित्य म शोध कार्य अउ पी-अच .डी. के डिगरी तको दिये जावत हे.

छत्तीसगढ़ी राजभासा बने ले हमर छत्तीसगढ़ी भासा पोठ्ठ हो के जम्मो कोती बगरावत हे . फेर अभीकुन हमन छत्तीसगढ़िया मन ल मिरजुर के भासा के विकास बर चिन्तन मनन ,गुनन ,बिचार करे ल परहि. काबर राजभासा के दर्जा हर अब्बड़ विसेस होथे.जइस हमन दूसर प्रान्त म जाथन त उदाहरन बर – उड़िसा प्रान्त म जाथन त ऊंहा जम्मो जगह हमन ल उड़िया भासा म लिखाय मिलथे.सूचना पटल, दुकान के नांव , स्कूल ,अस्पताल, बजार-हाट जम्मो जगह उड़िया भासा म लिखाय रहिथे अउ जम्मो लोगन मन उड़िया म गोठियावत रहिथे.

त अइसने हमर राजभासा छत्तीसगढ़ी म तको होना चाही ,अब हमन ल छत्तीसगढ़ी ल बेवहार म जम्मो जगह उपयोग करना चाही ,आमंत्रन- निमंत्रन ,पत्र के लिखई म इही भासा ल बउरना चाही.अपन राजभासा के महत्तम ल जान के गर्व करना चाही अउ माईभाखा,राजभासा छत्तीसगढ़ी के सम्मान करना चाही. अभीकुन राजभासा छत्तीसगढ़ी ल आठवी अनुसूची म लाने के गोठ हर बड़ आंदोलन के रूप लेवत हे ,जेमा देर सबेर छत्तीसगढ़ी भासा हर आठवी अनुसूची म अपन स्थान ल पा जाही अउ हमर भासा के अब्बड़ विकास होही.

राजभासा छत्तीसगढ़ी म अब त विधान सभा म मंत्री मन तको शपथ लेवत हे. छत्तीसगढ़ी म आवेदन पत्र स्वीकार के जावत हे. सासकीय निर्णय तको छत्तीसगढ़ी म होवत हे अउ आन राज म बाहिर तको भेजत हे अउ संग म अनुवाद राष्ट्रभासा म करे जावत हे. न्यायालय तको म गवाही होवत हे. छत्तीसगढ़ राज म स्कूल म प्राथमिक ,माध्यमिक म भासा के संगे संग छत्तीसगढ़ी भासा के पढ़ई होवत हवय. हाई अउ हायर सेकेण्डरी स्कूल म तको हिंदी विसय म छत्तीसगढ़ी कविता,कहानी ,जीवनी, लेख ल पढ़ाये जथे.

आकाशवाणी, दूरदर्शन, फिल्म अउ मिडिया हर छत्तीसगढ़ी म अपन कीर्ति ल स्थापित करे हवय. छत्तीसगढ़ी म फिल्म बनत हवय,लोकगीत,नाटक, लेख, कहिनी, कविता, गोठ- बात आकाशवाणी ले प्रसारित होवत हे. लोककला ल मंच मिलत हवय. पत्र-पत्रिका छत्तीसगढ़ी म छपत हे. नवा- नवा साहित्यकार मन जुड़त हे,जम्मो विकास छत्तीसगढ़ी राजभासा बर होवत हे.

राजभासा के महत्तम-

छत्तीसगढ़ी राजभासा के अब्बड़ महत्तम हवय काबर मातृभासा माई भाखा ले हमर राज के चिन्हार हवय.छत्तीसगढ़ के अस्मिता पहिचान इही हमर छत्तीसगढ़ी भासा आय. छत्तीसगढ़ राज के लोगनमन के अभिव्यक्ति के साधन आय. आज इही छत्तीसगढ़ी हर जम्मो लोगन मन के गोठ- बात ,बेपार, अस्पताल, बजार-हाट के भासा आय ,पढ़ई- लिखई के आधार आय. भासा छत्तीसगढ़ी हमर छत्तीसगढ़िया मन के सभ्यता अउ संस्कृति के चिन्हार आय, काबर भासा के बढ़ोत्तरी ले सभ्यता अउ संस्कृति के बिकास होथे. ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र म तको प्रगति होथे अउ अब्बड़ सुघ्घर साहित्य के सिरजन ले मानव सभ्यता अउ संस्कृति के विकास होथे.

छत्तीसगढ़ी भासा पूर्वी हिंदी के एक ठन साखा हरे.इंखर लिपि देवनागरी लिपि हवय अउ देवनागरी लिपि के जम्मो गुन एमा समाय हवय.लिखित बियाकरन तको हवय.छत्तीसगढ़ी भासा अब्बड़ मीठ हवय.एखर सबदकोस हर बिसाल हवय अउ हाना, लोकोक्ति, मुहावरा ले भासा हर पोठ हवय. हाना मन सिक्छापरद,सीख देवइया,लोक संस्कृति के ग्यान ले भरे हवय. जइसन- ‘चलनी म दूध दुहे अउ करम ल दोस देय’.

कमती सब्द म अपन गोठ-बात ल कहे के अपन गुन ले छत्तीसगढ़ी भासा हर पोठ होवत हे. जइसन -हिंदी के सब्द हवय-‘ मैं जा रहा हूँ.’ ऐला छत्तीसगढ़ी म कहिबोंन त – ‘ जाथवँ.’ एकेठन सब्द म कहि सकत हन.इही सब्द म लिंग के कोनो बंधन नइ हवय. भाव अउ सब्द चित्र इही भासा म देखते बनथे.जइसन- बिरबिट ले करिया,रद् -रद ले पानी गिरिस, हर्रस-हर्रस रेंगिस, खड़ोर-खरोड़ के लेगिस. अइसने आनी-बानी के सब्द छत्तीसगढ़ी साहित्य के धरोहर हवय जेन हर हिंदी साहित्य के बिकास म अपन योगदान देवत हवय.

छत्तीसगढ़ प्रदेस के जम्मो संस्कृति के गोठ-बात,तीज-तिहार,पूजा-पाठ अउ रीति-रेवाज इही भाखा म समाय हवय. छत्तीसगढ़ी भासा के साहित्य हर बर रूख सही बिसाल अउ ठंडक देथे. इंखर लोकगाथा,लोककथा,लोकगीत हर जम्मो मन के पीरा ल दूरिहा कर देथे अउ छाती म ठंडक देथे. छत्तीसगढ़ी भासा ले लोगन मन के विचार सक्ति बाढ़त जावत हे. वोखर मनन सक्ति अउ बिचार सक्ति म विकास होवत हे. हमर छत्तीसगढ़ी भासा ज्ञान प्राप्ति के तको साधन हवय. छत्तीसगढ़ी राज भासा हर अब्बड़ सार्थक हवय अउ ओखर महत्तम हर सुरूज के किरन अस दिनों -दिन बाढ़त जावत हे.

(डॉ. जयभारती चन्द्राकर वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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