Meerut:-See, cow based farming is the best option for more production at low cost – News18 हिंदी

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मेरठ:-खेती farming की बात की जाए तो आज के दौर में कुछ किसान farmer रासायनिक खेती chemical farming आधारित खेती करते हैं, तो कुछ किसान जैविक खेती organic farming की तरफ तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. लेकिन आज हम आपको ऐसी खेती के बारे में बताएंगे जो कि इन दोनों ही नियमों से बिल्कुल अलग है.जी हां पश्चिम उत्तर प्रदेश West Uttar Pradesh के मेरठ Meerut से 25 किलोमीटर दूर किला परीक्षितगढ़ Fort Parikshitgarh में एक किसान द्वारा गौ आधारित indigenous cow based खेती कर रहें हैं.जिससे किसान को काफी फायदा हो रहा है.किसान बृजेश कुमार त्यागी ने बताया कि गौ आधारित प्राकृतिक खेती के माध्यम से जहां कम लागत में बेहतर फसल होती है. वहीं जमीन की उर्वरक क्षमता भी बढ़ रही है और पानी की खपत कम होती है.

देसी गाय के गोमूत्र और गोबर का करते हैं खेती में उपयोग

किसान बृजेश कुमार त्यागी द्वारा आम, लीची, अमरूद सहित अन्य प्रकार के फलों की खेती कर रहे हैं.उन्होंने न्यूज़ 18 लोकल की टीम से खास बातचीत करते हुए बताया कि वह खेती करते समय देसी गाय के गोमूत्र व गोबर का उपयोग करते हैं. उन्होंने कहा कि देसी गाय का ताजा गोबर खेती के लिए बहुत उपयोगी है. वहीं गोमूत्र जितना पुराना होगा, उतना ही असरदार होगा. गाय के गोबर में समाहित सुगंध एवं पोषण से केंचुए आकर्षित होते हैं.जो भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए निरंतर कार्य में लगे रहते हैं.भूमि में केंचुए की संख्या जितनी अधिक होगी भूमि की उर्वरा शक्ति उतनी ही अधिक होती है.

पानी की खपत कम और जमीन की क्षमता में हो रहा है विस्तार
किसान के अनुसार उन्होंने 2004 में इस तरह से खेती की शुरुआत की थी.वह गुजरात में नौकरी करते थे.लेकिन उन्होंने नौकरी को छोड़कर सोचा कि वह अपनी खेती करेंगे.जिसके लिए उन्होंने पुरातन प्राकृतिक पद्धति को अपनाया.उन्होंने कहा कि आज के दौर में किसान रासायनिक खाद को अधिक उपयोग करते हुए जमीन को खोखला बनाते जा रहे हैं. जिससे कि जो कीटाणु जमीन के लिए आवश्यक होते हैं .वह नीचे धरातल पर जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज फसल को पानी की भी अति आवश्यकता होती है. वहीं जैविक खेती की बात की जाए तो उसमें खाद की मात्रा अधिक होती है. लेकिन गौ आधारित खेती ऐसी है. जहां बेहतर फसल होती है. वही खर्चा भी कम बैठता है. उन्होंने बताया कि पहले तो वह सिर्फ अकेले ही अपनी 13 एकड़ जमीन में यह फसल ऊगा रहे थे. लेकिन अब किला परीक्षित गढ़ में अन्य किसानों को भी इसके बारे में जागरूक कर रहे हैं. वर्ष 2019 से विभिन्न सेमिनार को अटेंड करते हुए गौ आधारित खेती को ही आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं.

रिपोर्ट विशाल भटनागर मेरठ

आपके शहर से (मेरठ)

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश

Tags: Farmer, मेरठ



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