Message of humanity behind marriage of 21 differently abled couples

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उदयपुर. सामूहिक विवाह समारोह जैसे आयोजन अमूमन होते रहते हैं, लेकिन उदयपुर में बीते 11 सितंबर को जो आयोजन हुआ, उसे आप भव्य कह सकते हैं. गीत-संगीत, कृष्ण-राधा की फूलों की होली पर आधारित नृत्य प्रस्तुति के बीच देश के अलग-अलग राज्यों से आए 21 दिव्यांग जोड़ों की शादी हुई. फिल्मी सेट सरीखे माहौल में इन जोड़ों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई, वहां मौजूद उनके घरवालों और बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया. दिव्यांगों और वंचितों के लिए पिछले कई वर्षों से काम कर रहे नारायण सेवा संस्थान का यह 36वां आयोजन था.

कोरोना महामारी के बीच इस तरह का आयोजन किए जाने के पीछे संस्थान तर्क भी देता है. नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि दिव्यांग जोड़े समाज में पहले से ही उपेक्षा जैसी स्थितियों को झेलते रहे हैं, लेकिन यहां आने के बाद उन्हें ऐसे हालात का सामना नहीं करना पड़ता है. उन्होंने बताया कि इस विवाह समारोह में आए सभी दिव्यांग जोड़ों को दानदाताओं की ओर से घर के सामान और अन्य वस्तु दिए गए. अग्रवाल ने कहा कि नारायण सेवा संस्थान 19 साल से ‘दहेज को कहें ना’ अभियान चला रहा है, इस समारोह के जरिये यह संदेश भी दिया गया.

11 सितंबर को उदयपुर में स्थित संस्थान के मुख्यालय में 21 दिव्यांग जोड़ों का सामूहिक विवाह हुआ.

36वें सामूहिक विवाह समारोह में दिव्यांग रोशन लाल भी शामिल हुए थे, जो इन दिनों REET परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. रोशन ने कमला को अपना जीवन साथी बनाया. उन्होंने बताया कि जिस तरह इस संस्थान से मुझे मदद मिली, अगर हम जैसे लोगों को ऐसी सहायता मिले, तो बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है. मुझे विश्वास है कि मैं एक दिन अच्छा शिक्षक बन पाऊंगा. रोशन ने संस्थान द्वारा कौशल विकास प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रमों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी.

गुजरात के सूरत के रहने वाले मनोज कुमार भी दिव्यांग हैं, जिनके पैर का ऑपरेशन यहां हुआ. वे कहते हैं कि इस संस्थान के जरिये ही मैंने संत कुमारी जैसी जीवन साथी को पाया है. नवविवाहिता संत कुमारी ने भी कहा कि हर दिव्यांग चाहता है कि समाज में उसके साथ समान और न्यायपूर्ण व्यवहार किया जाए. लेकिन अक्सर यह नहीं हो पाता. संत कुमारी ने यहां सिलाई की ट्रेनिंग ली है, वह शादी के बाद अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहती हैं.

नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल कहते हैं, ‘दिव्यांग सामूहिक विवाह समारोह एक ऐसा आयोजन है जो हमारे दिल के बहुत करीब है. हम ‘दहेज को कहें ना!’ अभियान के 19वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं और हमें इस बात की खुशी है कि हमारे प्रयासों को लोगों ने सराहा है. संस्थान ने अब तक 2109 जोड़ों को एक खुशहाल और समृद्ध वैवाहिक जीवन जीने में मदद की है. वर्षों से हम निशुल्क सुधारात्मक सर्जरी, राशन किट का वितरण, दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग शिविरों का संचालन कर रहे हैं. साथ ही, कौशल विकास कक्षाओं और सामूहिक विवाह समारोहों के साथ-साथ प्रतिभा विकास गतिविधियों के माध्यम से दिव्यांगों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं.’

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