Movement to open the border with the farmers delsp

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गाजियाबाद. प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद यूपी गेट पर रास्‍ता रोके किसानों को हटाने के लिए दिल्‍ली बॉर्डर में रहने वाले लोग रास्‍ता खोलो आंदोलन चलाएंगे. इस आंदोलन के लिए इंदिरापुरम, कौशांबी, वैशाली, वसुंधरा और राजनगर एक्‍सटेंशन की आरडब्‍ल्‍यू  ने एकजुट होकर सोशल मीडिया में अभियान शुरू किया है. इसके अलावा सांकेतिक रूप में धरना देने की शुरुआत कौशांबी से हो चुकी है.

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद किसान यूपी गेट पर डटे हुए हैं. इस वजह से गाजियाबाद  से दिल्‍ली की ओर जाने वाले वाहन चालकों को परेशानी हो रही है.  80000 के करीब वाहन चालकों का रोजाना घंटों का समय बर्बाद हो रहा है. मांगें पूरी होने के बाद भी किसानों द्वारा रास्‍ता न खोलने से लोगों में नाराजगी है. दिल्‍ली बॉर्डर की कॉलोनियों के लोग इसके खिलाफ आंदोलन चलाने की तैयारी कर रहे हैं. सोशल मीडिया के माध्‍यम से आंदोलन शुरू कर दिया है. इस आंदाेलन का नाम रास्‍ता खोलो आंदोलन दिया गया है. इसके इसके तहत इंदिरापुरम कौशांबी, वैशाली, वसुंधरा के लोग किसानों पास जाकर आग्रह करेंगे कि रास्‍ता खोलकर उनका समय और रोजाना पेट्रोल में खर्च होने वाला अतिरिक्‍त रुपया बचाने में मदद करें.

सांकेतिक धरना शुरू

रास्‍ता खोलने को लेकर आरडब्‍ल्‍यूए ने सांकेतिक धरना भी शुरू कर दिया है. कौशांबी में नंदा टॉवर के पास लोगों ने सांकेतिक धरना दिया और किसानों से रास्‍ता खोलने का आग्रह किया.

सोशल मीडिया में चल रहा है यह मैसेज

प्रिय साथियों, हमारे किसान भाइयों की पिछले क़रीब एक साल से नए कृषि क़ानूनों को वापिस लेने की माग थी, जिसके कारण उन्होंने ग़ैर क़ानूनी (संशोधन दरकार) तरीक़े से दिल्ली border के नए बने Highway को जाम किया हुआ है. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से उनकी मांगें मान ली हैं, लेकिन किसान भाइयों ने अभी भी रास्ता खोलने से मना कर दिया है. इस रास्ता बंदी के कारण हम लोगों का करोड़ों रुपया का petrol/diesel और समय अब तक बर्बाद हो चुका है. हमारी तकलीफ़ न तो सरकार महसूस कर रही है, न अदालत और न ही किसान भाई महसूस कर रहे हैं. अब बर्दाश्त नहीं होता है. तो क्यों न हम लोग भी एकजुट हो कर इस अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं? क्यों न एक बार UP Gate पर चल कर किसान नेताओं को बताए कि हमारी परेशानी भी देखें.

Tags: Kisan, Kisan Aandolan, Kisan Andolan, New Agricultural Law



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