MP में कब थमेंगी जहरीली शराब से मौतें? पता नहीं माफिया कब टंगेंगे, कब लटकेंगे?

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मध्य प्रदेश में जहरीली शराब से मौतों के बढ़ते आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

POISONOUS LIQUOR ISSUE: एमपी में बीते 3 महीनों में जहरीली शराब से अलग-अलग जिलों में करीब 60 लोगों की मौत और उनके परिवारों का चीत्कार यह बता रहा है कि मध्यप्रदेश में शराब माफिया कितना बेखौफ है और इस माफिया के आगे सरकार और उसका सिस्टम कितना लाचार है.

भोपाल. “पता नहीं मध्य प्रदेश में माफिया कब गड़ेंगे, कब टंगेंगे, कब लटकेंगे? 8 मार्च तो बीत गया, पता नहीं उमा भारती कब शराबबंदी अभियान शुरू करेंगी?” सूबे की जनता के जेहन में यह सवाल उठना बेहद लाजिमी है, क्योंकि एक हफ्ते के भीतर भिंड और ग्वालियर में जहरीली शराब दर्जनभर से ज्यादा लोगों की जान ले चुकी है, 4 लोगों की आंखों की रोशनी पर हमला कर चुकी है. बीते 3 महीनों में जहरीली शराब से अलग-अलग जिलों में करीब 60 लोगों की मौत और उनके परिवारों का चीत्कार यह बता रहा है, कि मध्यप्रदेश में शराब माफिया कितना बेखौफ है और इस माफिया के आगे सरकार और उसका सिस्टम कितना लाचार है.

इसी साल जनवरी में मुरैना में जहरीली शराब से 28 लोगों की मौत के तांडव और मचे हाहाकार को कोई नहीं भूला होगा. उसके बाद छतरपुर में जहरीली शराब से आधा दर्जन मौतें भी याद ही होंगी. जहरीली शराब कुछ माह पहले उज्जैन में 16 और रतलाम में 11 की जान ले चुकी है. इन सब घटनाओं में जहरीली शराब से मौतों ने न जाने कितने बच्चों को अनाथ और परिवारों को बेआसरा किया है, यह सब सिस्टम के बही-खातों में दर्ज तो होगा ही. अब होली से रंगपंचमी के बीच भिंड के लहार विधानसभा क्षेत्र में जहरीली शराब से 7 लोगों और फिर इसी तरह से ग्वालियर में हुई 2 मौतों ने दिल दहलाकर रख दिये हैं.

होली की खुशियां मातम में बदलीं

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भाईदूज के दिन ही छिन गए भाई

ग्वालियर के महाराजपुरा सर्किल के वार्ड नंबर 62 में चंदूपुरा खेरिया में रहने वाले विजय सिंह परिहार के बाद गुरुवार को 40 साल के प्रदीप परिहार ने भी दम तोड़ दिया. सीएसपी के प्रदीप और उसके कुछ साथियों ने भाईदूज पर एक पार्टी करने के लिए हाइवे से एक ढाबे से शराब खरीदी थी. शराब जहरीली थी और उसे पीने के बाद से ही लोगों की तबियत बिगड़ने लगी और 4 लोगों को कम दिखने लगा. कलेक्टर कौशलेन्द्र सिंह ने भी माना है कि शराब पीने से दो लोगों की मौत हुई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही असलियत पता चलेगी.

भाईदूज के दिन ही छिन गए भाई

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हर घटना के बाद ही एक्शन क्यों?

बता दें कि जनवरी में जब मुरैना में जहरीली शराब से 28 मौतें हुईं थीं, तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ढीले सिस्टम की चाबियां कसते हुए काफी सख्त तेवर दिखाए थे. उन्होंने एक नहीं, कई मंचों से शराब माफिया सहित हर तरह के माफिया को ललकारा था, और कहा था, “अरे सुन ले रे ओ माफिया, अब मामा आ गया है, माफिया प्रदेश छोड़ दे, वरना माफिया को टांग दूंगा, लटका दूंगा और 10 फीट जमीन के नीचे गाड़ दूंगा”. इसके बाद सरकार की कुछ दिनों सख्ती भी दिखी और राज्य के अनेक जिलों में अवैध शराब के खिलाफ अभियान छेड़ा गया तथा बड़ी मात्रा में अवैध शराब और देशी शराब बनाने वाली भट्टियां पकड़ी भी गईं, लेकिन वक्त गुजरने के साथ-साथ हालात पहले जैसे हो गए. गाहे-बगाहे जहरीली शराब का तांडव और मौतों का कोहराम सामने आ जाता है. सवाल यह है कि हर घटना के बाद ही सरकार क्यों जागती है? क्यों आनन-फानन एक-दो सरकारी कारिंदों की बलि देकर, शराब भट्टियों की धरपकड़ और छापेमारी मामले को ठंडा कर दिया जाता है?

हर घटना के बाद ही एक्शन क्यों?

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अवैध शराब का काला कारोबार

बता दें कि हर जिले, हर थाने, हर हल्के के पुलिस, आबकारी और प्रशासन से जुड़े अफसरों से लेकर छोटे कारिंदों तक सबको पता होता है, कि अवैध शराब कहां से आ रही है, कौन अवैध शराब से भट्टी चलवा रहा है, कौन बिकवा रहा है. पूरे नेटवर्क का पता होने के बावजूद किसी बड़ी घटना के होने तक सब चुप्पी साधे बैठे रहते हैं. सियासत के गलियारों में हमेशा से यह आरोप लगते रहे हैं कि सरकार और सिस्टम भ्रष्ट नेता, अफसरों की माफिया से गठजोड़ होने और नियमित रिश्वत मिलने की वजह से माफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती. ऐसे में लोगों को सीएम शिवराज की माफिया के खिलाफ सख्ती की बात भी बेमानी लगती है. संभवतः वह सख्ती चाहते भी हों, लेकिन सिस्टम का घुन उनके कहे को अमलीजामा नहीं पहनाने देता.

अवैध शराब का काला कारोबार

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कहां है उमा भारती का शराबबंदी अभियान ?

मुरैना जहरीली शराब कांड में 28 मौतों के बाद बेहद सख्त तेवरों में दिखीं भाजपा नेत्री, साध्वी उमा भारती ने शराब को कलंक और तमाम झगड़ों और महिलाओं-बच्चों पर हिंसा की जड़ बताते हुए प्रदेश में 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन से शराबबंदी अभियान छेड़ने का खुला ऐलान किया था. उन्होंने कहा था कि अभियान का पूरा प्लान बन चुका है. हम सिर्फ पूर्ण शराबबंदी के पक्षधर है. मैं इस अभियान की शुरुआत सबसे पहले अपने गृहक्षेत्र की शराब दुकान बंद करा कर करूंगी. इस ऐलान से उनकी पार्टी भाजपा में भी बेचैनी फैली और शिवराज सिंह से लेकर तमाम नेताओं के बयान आने लगे कि केवल शराबबंदी से कुछ नहीं होगा, बल्कि नशा छोड़ने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा. बाद में उमा भारती की शिवराज सिंह से एक मुलाकात हुई और उसके बाद पूर्ण शराबबंदी वाले तेवरों में भी टर्न महसूस किया गया. जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. उमाभारती के कथन और संकल्प को लेकर यह सवाल उठ रहे हैं कि उमाजी आपके प्रदेश में शराबबंदी लागू कराने के अभियान का क्या हुआ? (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.)

कहां है उमा भारती का शराबबंदी अभियान ?

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