Muslim woman challenged right of talaq ul sunnat High Court seeks response from center govt nodssp

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नई दिल्‍ली. दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी को किसी भी समय बेवजह तलाक (Talak-Ul-Sunnat-तलाक-उल-सुन्नत) देने के ‘पूर्ण विवेकाधिकार’ को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को केंद्र से जवाब मांगा. न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने नोटिस जारी किया और केंद्र को याचिका के संबंध में जवाब देने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया.

मुस्लिम महिला (विवाह संरक्षण अधिनियम) 2019 के तहत पति द्वारा पत्नी को किसी भी तरह से ‘तीन बार तलाक’ बोल कर, तलाक दिया जाना गैर-कानूनी है. इसे ‘तलाक-ए-बिद्दत’ कहा जाता है.

याचिकाकर्ता महिला ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि यह प्रथा ‘मनमानी, शरीयत विरोधी, असंवैधानिक, भेदभावपूर्ण और बर्बर’ है. साथ ही अदालत से अनुरोध किया कि किसी भी समय अपनी पत्नी को तलाक देने के लिए पति के पूर्ण विवेकाधिकार को मनमाना घोषित किया जाए.

बता दें कि 1 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक की प्रथा को खत्म करने के लिए संसद में ट्रिपल तलाक बिल पारित किया.

कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दिशा निर्देश देने की अपील की गई थी
तलाक-उल-सुन्नत के तहत पति द्वारा अपनी बीवी को किसी भी समय बिना कारण तलाक देने के एकाधिकार को चुनौती देने का मामला में दिल्ली हाई कोर्ट ने दाखिल पुनर्विचार याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पहले ही इस अर्जी को खारिज कर दिया था.

दरअसल कोर्ट में दाखिल अर्जी में तलाक-उल-सुन्नत द्वारा तलाक के संबंध में जांच और संतुलन के रूप में विस्तृत दिशा-निर्देश या कानून जारी करने के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई थी.

Tags: DELHI HIGH COURT, Triple Talaq law



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