Muzaffarnagar: मौत का हाईवे बना मुजफ्फरनगर का NH-58, छीन रही जिंदगियां, ये रहा आंकड़ा

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रिपोर्ट- अनमोल कुमार

मुजफ्फरनगर. वैसे तो एनएच 58 बड़ा ही खूबसूरत हाईवे है. जिस पर रोशनी के साथ-साथ हरियाली भी अधिक है, लेकिन नेशनल हाईवे 58 के मुजफ्फरनगर और मेरठ के 78 किलोमीटर लंबे हिस्से में बीते 5 सालों में हाईवे पर हुई दुर्घटनाओं में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. NHAI की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग के इस 78 किलोमीटर लंबे हिस्से पर जनवरी 2018 से 31 अक्टूबर 2022 तक 2633 सड़क हादसे हुए हैं जिनमें 2499 लोग जख्मी हुए हैं.

एनएचआई के आंकड़ों के मुताबिक 2018 में मार्ग पर 459 हादसे हुए थे. जिनमें 665 लोग घायल और 70 लोगों की मौत हो गई थी. 2019 में इस मार्ग पर 687 दुर्घटनाएं हुई थी, जिसमें 653 लोग जख्मी तथा 38 लोगों की मौत हो गई थी. 2020 में 429 हादसे हुए थे. जिसमें 330 लोग घायल हुए और 36 लोगों की जान चली गई थी. 2021 मैं 540 दुर्घटना हुई थी जिसमें 436 लोग जख्मी 59 लोगों की मौत. आंकड़े बताते है कि इस साल 2022 में 31 अक्टूबर तक 78 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 512 हादसे हुए हैं. जिनमें 453 लोग घायल तथा 53 लोगों की मौत हुई है. News 18 लोकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर जब इस मामले में राहगीरों से बातचीत की तो राहगीरों ने बताया कि दुर्घटना होने का कारण ज्यादातर स्वयं वाहन चालक ही होते हैं. क्योंकि आजकल दुपहिया एवं बड़े वाहनों को वाहन स्वामी ओवर स्पीड से वाहनों को चलाते हैं और यातायात नियमों का भी पालन नहीं करते हैं. जिस कारण दुर्घटना अधिक होती है.

राहगीरों ने बताया कि कुछ लापरवाही पुलिस के द्वारा भी बरती जाती है. जिस कारण हाईवे पर दुर्घटना ज्यादा होती है. क्योंकि पुलिस के द्वारा हाईवे पर बहुत कम चेकिंग अभियान चलाया जाता है. जिस कारण वाहन स्वामी भी बेफिक्र होकर ओवरस्पीड वह बिना हेलमेट व बिना सीट बेल्ट के ही वाहनों को चलाते हैं. अगर पुलिस के द्वारा हाईवे पर भी लगातार चेकिंग अभियान चलाया जाए तो सड़क दुर्घटना कम होगी. क्योंकि सभी वाहन स्वामी वाहनों की स्पीड को नियंत्रण में रखेंगे और यातायात नियमों का भी पालन करेंगे.

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