New Labor Rules India 2026: देश के संगठित और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक बेहद शानदार और बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकार द्वारा तैयार किए गए नए लेबर कोड (New Labor Code) के तहत अब कामकाजी माता-पिता (Working Parents) को अपने छोटे बच्चों की देखभाल के लिए एक विशेष वित्तीय मदद मिलने जा रही है।
अक्सर देखा जाता है कि आज के दौर में पति और पत्नी दोनों के कामकाजी होने की वजह से छोटे बच्चों की सही देखरेख करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी समस्या को हल करने और महिला कार्यबल (Female Workforce) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने क्रेच सुविधा (Crèche Facility) और क्रेच अलाउंस का ऐतिहासिक नियम लागू किया है। इसके अलावा नए लेबर कोड में कामकाजी घंटों (Working Hours) और इन-हैंड सैलरी को लेकर भी कई अहम बदलाव किए गए हैं। आइए इन सभी नए नियमों को आसान शब्दों में विस्तार से समझते हैं।
क्या है क्रेच अलाउंस नियम (Crèche Allowance Rule)?
नए लेबर कोड के तहत ‘ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSHWC) सेंट्रल रूल्स 2026’ के नियम 37(Viii)(b) के मुताबिक, जिन कंपनियों या संस्थानों में तय मानक के अनुसार क्रेच (शिशुगृह) की इन-हाउस सुविधा नहीं है, उन्हें अपने कर्मचारियों को प्रति बच्चा आर्थिक मुआवजा देना होगा।
- कितनी मिलेगी राशि: शुरुआत में इस भत्ते की न्यूनतम राशि ₹500 प्रति महीना तय की गई थी, लेकिन हालिया रिपोर्टों और संशोधनों के अनुसार केंद्रीय ड्राफ्ट में कामकाजी माता-पिता को अब ₹1,000 प्रति माह तक का क्रेच अलाउंस दिए जाने का प्रावधान किया जा रहा है।
- किसे मिलेगा विशेष लाभ: इस योजना का मुख्य उद्देश्य एकल माता-पिता (Single Parents) और विधवा महिलाओं को संबल देना है जिनके 6 साल से कम उम्र के बच्चे हैं।
- दो से अधिक बच्चों पर भी लाभ: यह नियम बेहद लचीला है। यदि किसी कर्मचारी के दो बच्चे हैं, तो उन्हें यह लाभ मिलेगा ही। लेकिन, यदि दूसरी डिलीवरी के समय किसी महिला को जुड़वां (Twins) बच्चे हो जाते हैं और बच्चों की संख्या दो से अधिक भी हो जाती है, तब भी वे इस विशेष भत्ते की हकदार बनी रहेंगी।
किन कंपनियों और सेक्टर्स पर लागू होगा यह नियम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह नया नियम केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के अंतर्गत आने वाले विभिन्न प्रतिष्ठानों पर समान रूप से प्रभावी होगा। मुख्य रूप से यह निम्नलिखित सेक्टर्स में काम करने वाले कर्मचारियों और मजदूरों पर लागू है:
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- भारतीय रेलवे (Railways) और हवाई परिवहन सेवाएं (Air Transport)
- बैंकिंग (Banks) और इंश्योरेंस कंपनियां (Insurance)
- टेलीकॉम सेक्टर (Telecom) और आईटी कंपनियां
- माइंस (खदानें) और ऑयल सेक्टर (Oil Infrastructure)
हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम! कामकाजी घंटों में बड़ा बदलाव
नए लेबर कोड में कर्मचारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस को सुधारने के लिए कार्य अवधि (Working Hours) का एक नया विकल्प पेश किया गया है।
अब कंपनियों में हफ्ते में अधिकतम 48 घंटे काम करने का नियम कड़ाई से लागू होगा। यदि कोई कंपनी चाहे, तो अपने कर्मचारियों से दिन में अधिकतम 12 घंटे तक काम ले सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कर्मचारियों को हफ्ते में केवल 4 दिन काम (4-Day Work Week) करना होगा, जबकि बाकी के 3 दिन पूरी तरह से वीकली ऑफ (Holiday) रहेगा। हालांकि, जो कंपनियां दिन में 8 घंटे शिफ्ट चलाती हैं, वहाँ पहले की तरह ही 6 दिन का वर्किंग शेड्यूल जारी रहेगा।
इन-हैंड सैलरी घटेगी लेकिन पीएफ (PF) और रिटायरमेंट फंड होगा मजबूत
सैलरी स्ट्रक्चर को लेकर नए लेबर कोड में जो सबसे बड़ा बदलाव है, वह है बेसिक सैलरी का नियम। अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी (Basic Pay) उसके कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होना अनिवार्य कर दिया गया है।
सैलरी पर असर: बेसिक सैलरी बढ़ने का सीधा असर आपके प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी के योगदान पर पड़ेगा। आपकी सैलरी से पीएफ का हिस्सा ज्यादा कटेगा और कंपनी को भी आपके पीएफ खाते में ज्यादा योगदान देना होगा। इससे भले ही हर महीने आपके हाथ में आने वाली इन-हैंड सैलरी (Take-home Salary) थोड़ी कम हो जाए, लेकिन आपके रिटायरमेंट के समय मिलने वाला फंड (PF & Gratuity Corpus) पहले के मुकाबले दोगुना मजबूत हो जाएगा।
ग्रेच्युटी (Gratuity) का नया और आसान नियम
आमतौर पर पुराने नियमों के मुताबिक, किसी भी रेगुलर कर्मचारी को कंपनी की तरफ से ग्रेच्युटी का लाभ तभी मिलता था जब वह लगातार 5 साल की सेवा पूरी कर लेता था। लेकिन नए लेबर कोड में कॉन्ट्रैक्ट या निश्चित अवधि (Fixed-Term Employees) पर काम करने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत दी गई है। अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को केवल 1 साल की नौकरी पूरी करने पर भी ग्रेच्युटी का पूरा लाभ दिया जाएगा, जबकि परमानेंट या रेगुलर स्टाफ के लिए यह अवधि अभी भी 5 वर्ष ही रखी गई है।