Obituary raghuvansh prasad singh was a modern leader with desi flavor nodmk3 – रघुवंश बाबू देसी अंदाज के मॉडर्न नेता थे | – News in Hindi

0
26


प्रणब मुखर्जी ने अपनी आत्मकथा के तीसरे खंड में रघुवंश बाबू के बारे में लिखा है : गणित के विद्वान प्रो. रघुवंश प्रसाद सिंह एक विलक्षण पुरुष हैं। मुझे ज्ञात हुआ है कि उनके लेक्चर के दौरान कक्षा में पिन ड्रॉप साइलेंस व्याप्त हो जाया करती थी , ‘एप्लाइड मैथेमेटिक्स’ जैसे कठिन विषय को हिंदी माध्यम में पढ़ाने-समझाने की उनकी अद्भुत क्षमता थी.

Source: News18Hindi
Last updated on: September 13, 2021, 10:38 AM IST

शेयर करें:
Facebook
Twitter
Linked IN

पटना. बिहार के राजनीति के महाराणा प्रताप आदरणीय रघुवंश प्रसाद सिंह का जन्म 6 जून 1946 को गणतंत्र की आदिभूमि वैशाली के शाहपुर में हुआ था और 13 सितंबर 2020 को उनका महापरिनिर्वाण हुआ. उनका पूरा जीवन लोहिया और कर्पूरी ठाकुर के विचारों के प्रति समर्पित रहा. गरीब और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए उनका समर्पण सदैव याद किया जाएगा. उन्होंने बिहार विश्वविद्यालय से गणित में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी, ततपश्चात 1969 से 1974 तक जगतजननी माँ जानकी की प्रकट भूमि सीतामढ़ी के ख्यातिलब्ध श्री राधाकृष्ण गोयनका कॉलेज में अप्लायड मैथेमेटिक्स जैसे कठिन विषय में प्रोफेसर के तौर काम करते रहे.

रघुवंश प्रसाद सिंह के करीबी बताते हैं कि उस समय उनकी तनख्वाह इतनी कम थी कि घर पर पैसे भेजने के बाद उनके पास दो वक्त खाने के लिए भी पैसे नहीं बचते थे. अक्सर शाम का भूजा ही रात का खाना हो जाया करता था, लेकिन पहली बार 1970 में रघुवंश प्रसाद शिक्षक आंदोलन के दौरान जेल गए. इसी दौरान रघुवंश प्रसाद सिंह को बिहार की तत्कालीन कांग्रेस सरकार प्रोफेसर के ओहदे से बर्खास्त कर दिया. इसके बाद बाबू रघुवंश जय प्रकाश नारायण के रास्ते पर चल पड़े. साल 1977 में आपातकाल हटने के बाद हुए विधानसभा चुनाव में रघुवंश बाबू को न सिर्फ सीतामढ़ी की बेलसंड सीट से टिकट मिला, बल्कि चुनावी जीत भी दर्ज की. मुख्यमंत्री पद के लिए उन्होंने कर्पूरी ठाकुर का समर्थन किया. बाद में लालू से इनकी नजदीकियां बढ़ीं.

इसके बाद रघुवंश प्रसाद सिंह ने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा. भारत के संविधान में प्रदत्त राज्य नीति के निदेशक तत्व (भाग 4; अनुच्छेद 36-51) के तहत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दर्शन ‘प्रत्येक हाथ को काम’ को साकार करने में रघुवंश बाबू का अग्रणी भूमिका रही. ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह सरकार द्वारा प्रत्येक हाथ को काम प्रदान करने के उद्देश्य से संविधान के अनुच्छेद-41 के तहत विश्व के सबसे बड़े रोजगार गारंटी कार्यक्रम ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ की आधारशीला रखी गई थी. इस फ्लैगशिप योजना की शुरुआत आंध्र प्रदेश राज्य के अनंतपुर जिले से 2 फरवरी 2006 को की गई. रघुवंश बाबू तरकस के सारे तीरों का कानून सम्मत प्रयोग करते हुए राष्ट्र के श्रमिकों को एक युग परिवर्तनकारी वैधानिक अधिकार देकर भगीरथ कार्य किया, जिससे भारत में बेरोज़गारों को साल में 100 दिन रोज़गार मुहैया होने लगा. यूपीए-1 में रघुवंश बाबू ग्रामीण विकास मंत्री थे, इसलिए इस क़ानून का असली शिल्पकार उन्हें ही माना जाता है. आज कोरोना काल में मनरेगा की प्रासंगिकता शीर्ष पर है. करोड़ों प्रवासी श्रमवीरों को समायोजित करने के मामले में यह ऐतिहासिक रोजगार गारन्टी कार्यक्रम सम्पूर्ण विश्व में प्रतिमान स्थापित कर चुका है.

वर्ष 1919 में अस्तित्व में आई जेनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने अपनी 90वें वार्षिक प्रतिवेदन में अक्षरशः कहा था कि दुनिया जब 2008-09 की अवधि में गम्भीर वैश्विक आर्थिक मंदी का सामना कर रही थी, ऐसे में भारत इस मंदी से लगभग अछूता रहा था, क्योंकि मनरेगा ने भारत में लोगों की क्रय शक्ति को बल प्रदान करने का काम किया था. यहां तक कि विश्व बैंक ने वर्ष 2014 में इस योजना को ‘ग्रामीण विकास का तारकीय उदाहरण’ पदावली से अलंकृत किया. भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी ने अपनी आत्मकथा के तीसरे खण्ड में अपने कर्मयोगी मंत्रिमंडलीय साथी रघुवंश बाबू के बारे में लिखा है : ‘गणित के विद्वान प्रो. रघुवंश प्रसाद सिंह एक विलक्षण पुरुष हैं। मुझे ज्ञात हुआ है कि उनके लेक्चर के दौरान कक्षा में पिन ड्रॉप साइलेंस व्याप्त हो जाया करती थी , ‘एप्लाइड मैथेमेटिक्स’ जैसे कठिन विषय को हिंदी माध्यम में पढ़ाने-समझाने की अद्भुत क्षमता थी उनकी. ‘भारतवर्ष की आत्मा देश के 6.42 लाख गांवों में बसती है जब कभी भी जहाँ कहीं भी गरीब-गुरबा और ग्रामीण भारत की बात चलेगी बाबू रघुवंश सिंह हमेशा याद किए जाएंगे.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)


<!–

–>

First published: September 13, 2021, 10:23 AM IST



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here