OMG! क्या आपने कभी देखा-सुना है 7000 साल पुराना पेड़? खोखले तने के बावजूद हरे हैं सारे पत्ते

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रिपोर्ट – कृष्ण गोपाल द्विवेदी

बस्ती. भादेश्वर नाथ गांव में 7000 वर्ष से भी अधिक पुराना कटाय का पेड़ है! माना जाता है कि यह द्वापर युग का वृक्ष है. जब भगवान शिव का शिवलिंग कुवानो नदी के तट पर स्थित घने जंगल में अवतरित हुआ था. धीरे-धीरे करके सारे जंगल साफ हो गए लेकिन यह पेड़ आज भी अस्तित्व में है. यह पेड़ न सिर्फ अस्तित्व में है बल्कि पूरी तरह से हरा भरा भी है. गर्मी के मौसम में इस वृक्ष पे फल भी लगते हैं और फल लगे वृक्ष का दृश्य काफी मनमोहक लगता है. इसका फल इतना मीठा होता है कि लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. ये वृक्ष अन्दर से पूरी तरह से खोखला है. बावजूद इसके आज भी मज़बूती के साथ खड़ा है. इसके पत्ते पूरी तरह से हरे भरे हैं.

भादेश्वर नाथ मन्दिर के पुजारी सुशील गिरि बताते हैं कि जब सन 1728 में हमारे पूर्वज यहां आए थे. उससे पहले से ही यह पेड़ अस्तित्व में है. वो भी नहीं जानते थे कि यह पेड़ कितने वर्ष पुराना है. द्वापर युग में जब यहां जंगल हुआ करता था तो शायद उसी जंगल का यह पेड़ है. यह पेड़ शुरू से ही अन्दर से पूरी तरह खोखला था. पुजारी ने आगे बताया कि इस पेड़ में ज़रूर देवी देवता का वास है. नहीं तो ऐसे परिवेश में यह पेड़ हरा भरा नहीं रहता. इसलिए जो भी भक्त यहां आता है. वह जरूर इस वृक्ष पर धूप अगरबत्ती और पूजा पाठ करता है.

आखिर कितनी है इस पेड़ की उम्र?

गिरि ने आगे बताया कि बचपन में वह और उनके साथी पूरी तरह पेड़ के अन्दर घुस जाते थे. लेकिन धीरे धीरे मिट्टी पटाई होने के कारण यह काफी ऊपर तक पट गया है. लोग बताते हैं कि यह पेड़ जितना ऊपर है, इसकी जड़ उससे भी दोगुनी ज़मीन के नीचे है. मन्दिर के दूसरे पुजारी जय प्रकाश गिरि ने बताया कि हमारे पूर्वज बताते थे कि जैसे यह पेड़ आज है, वैसे उनके समय में भी हुआ करता था. यह एक जंगली पेड़ है. जिसको लोग कटाय के नाम से जानते थे. इनके मुताबिक यह पेड़ 2000 साल से भी पुराना है.

क्षेत्रीय वनाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि इस पेड़ की उम्र के बारे में बता पाना काफी मुश्किल है, लेकिन इस प्रजाति के वृक्ष की औसत आय 70 वर्ष होती है.

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