Panchayat Election Results: बसपा की वापसी और सपा को राहत, पर बीजेपी के ल‍िए परेशानी बने नतीजे

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जालौन. उत्‍तर प्रदेश के जालौन में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की 25 पंचायतों की सीटों का परिणाम सामने आ चुका है, जिसमें अपना अस्तित्व ढूंढ रहीं बसपा-सपा ने तो कई सीटों पर जीत के साथ अपनी बढ़त बनाई है, जबकि बीजेपी 25 में से सिर्फ 6 सीटों पर सिमट कर रह गई. बीजेपी ने मैदान में अपने कई सूरमा उतारे थे लेकिन वह भी बीजेपी पार्टी के जीत के सपने को साकार न कर सकें. अगले साल विधानसभा चुनाव है और ऐसे में बीजेपी पार्टी किस बात का दम भरकर सत्ता में वापसी का रास्ता तलाश रहीं हैं, जबकि गांव की सरकार बनाने वाले वोटर्स ने अपना रुझान साफ कर दिया है. बीजेपी जिस पार्टी को अपने विपक्ष के रूप में नकार चुकी थीं, उसी बीएसपी ने जिले की सर्वाधिक 7 सीटों पर बढ़त हासिल कर जिले में जीत का परचम लहराया है. जिला पंचायत की 25 सीटों में से मात्र 6 सीटे भाजपा के खाते में आई है और बाकी की 19 सीटों पर बीजेपी को शिकस्त का सामना करना पड़ा. वहीं अपना अस्तित्व को तलाशने में जुटी बसपा ने 7, सपा ने 4 और कांग्रेस ने 1 सीट पर जीत हासिल की है, हालांकि परिणामों से ये साफ हो गया है कि यूपी में जनादेश का मूड कब बदल जाएं यह कोई तय नहीं कर सकता.

कोरोना में भी हुई थीं जिले में 71% वोटिंगजिले में हुई 26 अप्रैल को 574 ग्राम पंचायत व 25 जिला पंचायत के लिए वोटिंग हुई थीं और इस दिन हुई ताबड़तोड़ वोटिंग का फैसला बीती देर रात आया जो कि काफी चौंकाने वाला रहा. अपने आप को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी कहे जाने वाली बीजेपी पार्टी को पंचायत की 25 सीटों में से सिर्फ 6 पर ही जीत हासिल हुई, जोकि सिर्फ एक चौथाई हिस्सा ही होता है. यहां के वोटर ने जिस हिसाब से वोट किया है. उसमें तो बसपा ने अपना ग्राफ बढ़ाया है. हालांकि कांग्रेस सिर्फ अपना खाता ही खोल सकी और सपा मुकाबले में बसपा से एक कदम पीछे रही. बसपा आ गई रेस में पंचायत चुनाव का परिणाम काफी रोमांचक रहा, जिसमें बीजेपी ने 25 सीटों के लिए अपने दमदार प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था. अगर यूपी की बात करे तो खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बंगाल में चुनाव में व्यस्त रहे और यूपी के पंचायत चुनाव में उनके सपनों का महल ढह गया. वैसे प्रदेश के अध्यक्ष स्वतंत्र देव का भी जिले में अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है, लेकिन बीजेपी की यह तस्वीर भी पंचायत की सीटों पर जीत दिलाने में नाकाफी साबित हुई.
देश मे जारी किसान आंदोलन तो कहीं, बीजेपी की हार का फैक्टर नहीं देश के किसान को देश की ‘हार्टलाइन’ कहा जाता है और देश के किसान को धरने में बैठे हुए है. कई महीने बीत चुके हैं और इसमें 100 से ज्यादा किसानों की मौत भी हो चुकी है. फिर भी केंद्र सरकार उनकी शर्तों को मानने को राजी नहीं हो रहीं है. ऐसे में बुंदेलखंड के सात जिलों में जालौन की भी अपनी अहम भूमिका है. क्योंकि पिछली विधानसभा व लोकसभा चुनाव में लोगों ने संसदीय क्षेत्र से लेकर विधानसभा तक प्रत्याशी को जीत दिलाकर अपने सर आंखों पर बैठाया था, लेकिन इस पंचायत चुनाव में जीते तीनों विधानसभा के विधायकों ने अपनी एड़ी चोटी का जोर लगाया लेकिन फिर भी एक बड़ी जीत हासिल न कर सकें. ऐसे में कही न कही यह कहना भी सही होगा कि किसान की आग लोगों के जहन में है और इन चुनावों में लोगों ने सरकार को इस बात का अहसास भी करा दिया है. गांव के रास्ते ही बनती हैं राज्यों की सरकार, विपक्षी पार्टियों ने दिखाया बीजेपी को आईना वैसे तो यह चुनाव सत्ताधारी बीजेपी के साथ-साथ विपक्षी समाजवादी पार्टी, बीएसपी और कांग्रेस के लिए भी अहम था. क्योंकि इसी चुनाव से 2022 के सिंघासन का रास्ता साफ होगा. प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. गांव की सरकार के हुए इस चुनाव में पार्टियों की असली ताकत जिला पंचायत से तय करेंगी, लेकिन अफसोस बीजेपी जिला पंचायत की 25 सीटों पर पिछड़ती दिखाई दे रहीं हैं. लेकिन अच्छी बात यह रहीं कि बसपा सपा के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल कर बीजेपी को आईना दिखाने का काम किया है. प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिष्ठा लगीं दांव पर, तो कैसे बनेगी अगली सरकार जिले में बीजेपी को पठखनी मिली है जिला पंचायत की 25 सीटों में भाजपा को सिर्फ 6 में ही जीत मिल पाई भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के लिए जालौन प्रतिष्ठा वाला जिला रहा है, क्योंकि उनकी कर्मभूमि जालौन ही है साथ ही जिले के तीन विद्यायक और एक सांसद पूरे दमखम के साथ पंचायत चुनाव में अपनी गोटियां बिछाते दिखाई दिए डूबा सूरज कहीं जाने वाली बसपा जिले में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है. बसपा ने 7 सीटों पर अपनी जीत दर्ज कर अपने कार्यकर्ताओं को ऑक्सीजन देने का काम किया है. इसके साथ ही 6 निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत मिली है और 4 सीटों सपा को भी मिली है 1 कांग्रेस औऱ 1 जनता दल बीपी को मिली है. हालांकि कांग्रेस के लिए भी यह चिंतन का विषय है कि आखिर पूरे जिले में से सिर्फ एक सीट जीत कर यूपी की सत्ता हासिल करने के सुहावने सपने देख रही हैं.



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