Pilibhit: पीलीभीत की गलियों में गूंज रहा गिलीगिली भालो-भालो, जानिए क्या है इसका मतलब?

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रिपोर्ट – सृजित अवस्थी

पीलीभीत. आपने सोशल मीडिया पर कच्चा बादाम गाना तो सुना ही होगा. यह पिछले दिनों खूब वायल हुआ था. वहीं, यूपी के पीलीभीत की सड़कों पर इन दिनों एक अलग ही आवाज गूंज रही है. दरअसल एक युवक गिलीगिली भालो-भालो बोलकर फेरी लगा रहा है. लोगों को एक बार में तो कुछ समझ नहीं आ रहा है, लेकिन फिर भी युवक के इस अनोखे अंदाज की काफी चर्चा है. आखिर युवक क्या कर रहा है? क्या बोल रहा है? आइए जानें…

दरअसल पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले से आया युवक पपुन घोष है, जो बड़े ही निराले अंदाज में फेरी लगाकर हथकरघा से बने खादी के कपड़े बेच रहा है. इस निराले अंदाज से लोग उसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं और तमाम लोग खादी के कपड़े खरीद भी रहे हैं.

भाषा पर अनोखा अंदाज भारी
NEWS 18 LOCAL से बात करत हुए पपुन घोष बताते हैं कि वो मूल रूप से बंगाल के रहने वाले हैं. ऐसे में उन्हें हिंदी भाषा का ज्ञान न के बराबर है. फिर भी पपुन हिंदी पट्टी के कई जिलों में खादी के कपड़े बेचते हैं, क्योंकि वह हर किसी का ध्यान इस अनोखे अंदाज से अपनी ओर खींच लेते हैं. एक बार बात करने पर लोग खादी को देखते हैं. किफायती दाम और अच्छी क्वालिटी के चलते लोग इसे जमकर खरीद रहे हैं. जबकि गिलीगिली भालो-भालो का मतलब होता है अच्‍छा कपड़ा ले लो.

आत्मनिर्भर भारत अभियान से मिली प्रेरणा
सड़कों पर खादी बेचते पपुन घोष ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों आत्मनिर्भर अभियान की शुरुआत की थी. तभी से वह आत्मनिर्भर बनने के लिए अपने घर-बार को छोड़कर खादी बेचने के लिए निकल पड़े हैं. गौरतलब है कि खादी के कपड़ों का निर्माण उनके परिवार के लोग चरखा चलाकर करते हैं.

Tags: Khadi, Pilibhit news



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