Positive News: जब.. सकारात्मक सोच के बूते 88 साल के हरिशरण ने 81 साल की पत्नी के साथ दी कोरोना को मात

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88 की उम्र में कोरोना को मात देने वाले पटना के सिन्हा दंपत्ति

Corona Positive Story: पटना के चित्रगुप्त नगर के रहनेवाले 88 साल के हरि शरण सिन्हा और उनकी 81 साल की धर्मपत्नी सुशीला सिन्हा की पांच बेटियां हैं जिन्होंने सही समय पर अपने माता-पिता का ख्याल रखा और उनका इलाज करवाया.

पटना. उम्र के जिस ढलान पर आकर लोग जीने की उम्मीदें छोड़ दिया करते हैं वैसे समय में अगर कोई बुजुर्ग दम्पति अपने हौसलों के दम पर कोरोना (Corona Positive Story) जैसी खतरनाक बीमारी को मात दे दे तो उसे चमत्कार नहीं तो क्या कहेंगे. ये कहानी उस बुजुर्ग दम्पति की है जिसने कभी मुश्किलों से हार नहीं मानी और जब कोरोना (Corona Patients) ने उन्हें जकड़ लिया तब भी वो बिना घबराए अपने बच्चों से कहते हैं कि ये हमारा कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा. वाकई ये इनका हौसला ही तो है. ये कहानी है 88 साल के बुजुर्ग हरिशरण सिन्हा और उनकी 81 साल की धर्मपत्नी सुशीला सिन्हा की जिन्होंने अपने हौसलों के दम पर और प्राणायाम के बूते कोरोना को आज ना सिर्फ मात दे दी है बल्कि लोगों को एक बड़ा संदेश भी दे रहे हैं कि अगर आप अपने भीतर हौसला बनाए रखेंगे तो किसी भी कठिनाई पर पार पा सकते हैं. अपने मजबूत हौसले और प्राणायाम के बूते कोविड को हराकर अस्पताल से घर लौटा बुजुर्ग दम्पति.. पटना के चित्रगुप्त नगर के रहनेवाले 88 साल के हरि शरण सिन्हा और उनकी 81 साल की धर्मपत्नी सुशीला सिन्हा को कुछ दिनों पहले कोरोना हो गया था. जब उनके परिवारवालों को इन दोनों में कोरोना के लक्षण दिखाई पड़े तो बिना देर किए इन लोगों ने पटना के एक अस्पताल बिग अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में एडमिड करा दिया.उस समय बुजुर्ग दम्पति को बुखार और खांसी हो रहा था. अस्पताल में इस बुजुर्ग दम्पति का 7 दिनों तक इलाज चलता रहा, कई बार ऑक्सीजन की कमी हुई बावजूद इसके ये कभी नहीं घबराए. उल्टे अपने परिवारवालों को फोन पर ये समझाते रहे कि मेरी चिंता मत करो, मास्क पहनो और प्राणायाम-योगा करते रहो. हरिशरण सिन्हा की पांच बेटियां हैं जिन्हें वो अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करते हैं. उनकी एक बेटी सुमन हैं जो इस समय अपने मां-पापा की देखभाल में लगी हैं. वो बताती हैं कि कोविड के होने से लेकर अस्पताल में इलाज कराने के दरम्यान भी उनके पापा हरिशरण सिन्हा कभी कोरोना से डरे नहीं और तो और अस्पताल में दूसरे बेड पर पड़ी मेरी मां का भी वो हौसला बढ़ाते रहे. सुमन बताती हैं कि उनके माता-पिता दोनों को पहले से हार्ट डिजीज, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की बीमारी है बावजूद इसके वो इस खतरनाक बीमारी को मात देकर अस्पताल से घर लौट आए हैं. ये किसी चमत्कार से कम नहीं है और ये सब हरिशरण सिन्हा के अपने हौसले का भी बड़ा असर है. बुजुर्ग दम्पति आज सबके लिए मिशाल बन गए हैं. बिग हॉस्पिटल के डॉक्टर, नर्स और सारे स्टाफ को दुआएं देते हुए लोगों से अपील कर रहे हैं कि इस कोरोना को अगर हराना है तो अपने मन को मजबूत करके अपने हौसलों को बढ़ाना होगा तभी इस खतरनाक कोरोना को हम मात दे सकते हैं.



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