Raksha Bandhan: रक्षाबंधन पर ‘काल’ बनी भद्रा, बहनें भूल कर भी ना बांधे भाई को राखी, जानें शुभ मुहूर्त

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रिपोर्ट : सर्वेश श्रीवास्तव

अयोध्या. हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का पर्व बड़े त्योहारों में से एक होता है. हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. रक्षाबंधन में बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती हैं. बहन के राखी बांधने के बदले में भाई जीवन भर रक्षा करने का वचन देता है और उसे तोहफा भी देता है. तो चलिए जानते हैं कि कब बहनें बांधे भाई को राखी, क्या है शुभ मुहूर्त ?

इस बार रक्षाबंधन का त्योहार 11 अगस्त को मनाया जाएगा, लेकिन उसी शुभ मुहूर्त में भद्र काल का भी योग बन रहा है. ऐसे में बहनों को भद्र काल का विशेष ध्यान देना चाहिए. ज्योतिषी के अनुसार रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल होने पर राखी नहीं बांधें. भद्रा काल को अशुभ माना जाता है. इस दौरान कोई भी शुभ कार्य भद्रा काल में नहीं किया जाता है.

भद्रा काल में क्यों नहीं बांधें राखी ?
ज्योतिषाचार्य कौशल्या नंद बताते हैं कि ज्योतिष के अनुसार कुछ सुयोग और कुछ कुयोग बनाया गया है. इसमें अच्छे योग से काम करने का फल अच्छा होता है. विघ्न बाधा नहीं उत्पन्न होती. उसी तरह से भद्रा काल है. इसमें शुभ कार्य नहीं किए जाते. भद्रा काल में दो कर्म सदा वर्जित हैं. एक श्रावणी, दूसरी फागुनी. श्रावणी का मतलब सावन की पूर्णिमा. दरअसल श्रावणी में राजा का हनन होता है और फागुनी में आग लगने का डर रहता है. इस तरह के कष्ट आने की संभावनाएं भद्रा काल में रहती हैं. रक्षाबंधन के दिन की भद्रा ज्यादा वर्जित मानी गई है.

जानिए कब है शुभ मुहूर्त ?
ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि 11 अगस्त दिन गुरुवार को दोपहर 2:14 से 3:07 पर विजय मुहूर्त रहेगा. शाम 5 बजकर 17 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 16 मिनट तक भद्रा काल पूछ रहेगी. रात्रि में 8:00 बजे तक भद्रा मुख रहेगी. विजय मुहूर्त पर बहनें भाई को राखी बांध सकती हैं.

(नोट: यहां दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है NEWS 18 LOCAL इसकी पुष्टि नहीं करता.)

Tags: Ayodhya News, Raksha bandhan



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