retired dgp rls yadav says police commissioner system will make police strong, here know how- पुलिस कमिश्नर सिस्टम से क्या होगा फायदा, क्या 10 साल बाद पावरफुल होगी पुलिस – News18 हिंदी

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भोपाल. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को भोपाल-इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की घोषणा की. 2012 से लेकर अभी तक वे तीन बार विधानसभा में इस सिस्टम को लागू करने की बात कह चुके थे. लेकिन, IAS अफसरों के विरोध के बाद यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी. सरकारी स्तर पर यह कवायद पिछले 10 साल से चल रही है. पुलिस मुख्यालय कई बार पुलिस कमिश्नर सिस्टम के लिए गृह विभाग को प्रस्ताव भेज चुका है.

रिटायर्ड डीजीपी आरएलएस यादव ने NEWS 18 पर इस सिस्टम के फायदे बताए. उन्होंने कहा कि इस सिस्टम से अपराध पर लगाम लगेगी. काम का बंटवारा होने से जिम्मेदारी बढ़ेगी और पुलिस के काम करने की स्पीड भी बढ़ेगी. इस सिस्टम से IAS के पावर नहीं छीने जाएंगे. इसका सीधा फायदा जनता को होगा. गौरतलब है कि साल 2008 में पुलिस कमिश्नर सिस्टम का IAS लॉबी ने विरोध किया था. इसके बाद 2009 में इदौर और भोपाल में SSP सिस्टम शुरू किया गया. यह सिस्टम भी ज्यादा दिन नहीं चला. दिसंबर 2012 में फिर डीआईजी सिस्टम लागू कर दिया गया. इस बीच ओडिशा, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में कमिश्नर प्रणाली लागू कर दी गई.

सिस्टम से पुलिस को होगा ये फायदा

रिटायर्ड डीजीपी यादव ने बताया कि कमिश्नर सिस्टम लागू होने से पुलिस को लाठीचार्ज और धारा 144 लागू करने के लिए कलेक्टर के आदेश का इंतजार नहीं करना होगा. गुंडों को जमानत मिलेगी या नहीं यह पुलिस की कोर्ट में तय होगा. पुलिस कमिश्नर प्रशासनिक निर्णय लेने में सक्षम होगा. प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के मामलों में मजिस्ट्रेट के अधिकार DCP और ACP के पास आ जाएंगे. सरकार जरूरत के हिसाब से DCP पदस्थ करेगी, जो एसपी रैंक के होंगे. आर्म्स, आबकारी और बिल्डिंग परमिशन की NOC देने जैसे अधिकार भी पुलिस के पास होंगे. इस सिस्टम से साइबर क्राइम को रोकने में मदद भी मिलेगी.

इस तरह की होगी प्रणाली

टगौरतलब है कि पुलिस कमिश्नर सिस्टम के पिरामिड में डीजी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, एडीजी स्तर के अधिकारी को पुलिस कमिश्नर बनाया जा सकता है. उसके नीचे एडीजी या आईजी स्तर के दो ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर होंगे. पिरामिड में एडिशनल पुलिस कमिश्नर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी आईजी या डीआईजी स्तर अफसरों को मिलेगी. इसी तरह डिप्टी पुलिस कमिश्नर डीआईजी या एसपी स्तर के होंगे. जूनियर आईपीएस या वरिष्ठ एसपीएस अधिकारियों को असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर बनाया जा सकेगा.

5.6 फीसदी आबादी पर लागू होगा सिस्टम

सबसे पहले पुलिस कमिश्नर सिस्टम इंदौर और भोपाल में लागू किया जा सकता है. यानि मध्यप्रदेश की कुल आबादी में से केवल 5.6 फीसदी पर ही कमिश्नर सिस्टम लागू होगा. प्रदेश की सात करोड़ 26 लाख आबादी में से भोपाल की 18.86 लाख और इंदौर की 21.93 लाख आबादी है. भोपाल की आबादी प्रदेश की कुल आबादी का 2.59 प्रतिशत है और इंदौर की आबादी 3.01 प्रतिशत है.

देश मे कहां-कहां लागू है सिस्टम

देश के 71 शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है. देश के 19 महानगरों की आबादी 20 लाख से ज्यादा है. इनमें 14 महानगर ऐसे हैं, जहां पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है. 20 लाख से ज्यादा आबादी वाले छह शहर जिनमें पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू नहीं है, उसमें मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, बिहार का पटना और उत्तर प्रदेश का कानपुर, लखनऊ और गाजियाबाद शामिल हैं. जबकि, 34 शहर ऐसे हैं जिनकी आबादी 10 से 20 लाख के बीच है. इनमें से 26 शहर ऐसे हैं, जहां पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है. देश में 31 शहर ऐसे भी हैं जहां की आबादी 10 लाख से कम है इसके बाद भी इन शहरों में यह व्यवस्था लागू है.

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Tags: Bhopal news, Mp news



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