Rumi Darwaza Lucknow : रूमी गेट के बिना अधूरा है लखनऊ! 7 साल बाद लौटी रौनक, जानें पूरा मामला

0
15


रिपोर्ट: अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. सिग्नेचर बिल्डिंग यानी रूमी गेट (रूमी दरवाजा) के बिना यूपी की राजधानी लखनऊ अधूरी है. कहते हैं कि लखनऊ आए और रूमी गेट नहीं देखा तो क्या देखा. हालांकि यही रूमी गेट पिछले 7 साल से अंधेरे में था, जिसे लखनऊ की मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने एक बार फिर से रोशनी से जगमग करवा दिया है. बता दें कि बिजली का बिल न भरने की वजह से इसकी लाइट काट दी गई थी, लेकिन मंडलायुक्त ने यहां पर निरीक्षण करने के बाद एलडीए समेत नगर निगम और दूसरे अधिकारियों को आदेश दिया था कि बिजली का बिल बाद में देखा जाएगा पहले लाइटों को चालू किया जाए. इसके बाद एलडीए की ओर से इसकी लाइटों की मरम्मत की गई और आखिरकार अरसे बाद रूमी दरवाजा रोशनी से जगमगा उठा. इसे देखने के लिए न सिर्फ लखनऊ बल्कि दूरदराज से पर्यटक पहुंचते हैं.

इतिहासकार रवि भट्ट ने बताया कि रूमी गेट को अवध के चौथे नवाब आसफउद्दौला ने 1784 में बनवाया था. उस वक्त भयंकर अकाल पड़ गया था और लोग भुखमरी से परेशान थे. ऐसे में उन्होंने राहत प्रोजेक्ट के तौर पर बड़ा इमामबाड़ा और रूमी गेट का निर्माण कार्य कराया था. इसे बनने में करीब दो साल लग गए थे. जबकि रूमी गेट को तुर्किश गेट भी कहा जाता है.

60 फीट ऊंचा है रूमी दरवाजा
रूमी दरवाजे की ऊंचाई 60 फीट है. इसमें इंडो इस्लामिक शैली के अलावा राजपूत शैली भी नजर आती है. इसकी सबसे आश्चर्य करने वाली बात यह है कि रूमी गेट दोनों ओर से देखने में एकदम अलग लगता है. जब बड़े इमामबाड़े की ओर से देखा जाए तो यह बड़े इमामबाड़े के प्रवेश द्वार जैसा ही लगता है और जब इसे घंटाघर की ओर से देखा जाए, तो यह है एक गले के हार की तरह नजर आता है. यह पुराने लखनऊ में बड़े और छोटे इमामबाड़े को जोड़ता है.

Tags: Lucknow city facts, Lucknow news, UP Tourism



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here