Saharanpur: इस मदरसे में संस्कृत-उर्दू की दी जाती है तालीम, सभी धर्मों के बच्चे आते हैं पढ़ने

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निखिल त्यागी

सहारनपुर. उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक मदरसा ऐसा है जहां उर्दू और संस्कृत दोनों की शिक्षा दी जाती है. सहारनपुर के ग्राम सड़क दूधली में स्थित इस्लामिया जिया उल कुरान मदरसा का संचालन खुर्शीद मलिक चिश्ती करते हैं. इस मदरसे में आठवीं कक्षा तक की शिक्षा दी जाती है. खुर्शीद मलिक ने बताया कि आस-पास के लगभग 10 गांवों के हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समेत हर धर्म और जाति के बच्चे इस मदरसे में पढ़ने आते हैं. मदरसे में लगभग साढ़े तीन सौ बच्चे पढ़ते हैं.

उन्होंने बताया कि मदरसा इस्लामिया जिया उल कुरान में हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी और संस्कृत सभी भाषाएं पढ़ाई जाती हैं. यहां हर बच्चे को किसी भी भाषा में पढ़ने की आजादी है. किसी भी धर्म का बच्चा किसी भी भाषा में पढ़ना चाहे तो वो पढ़ सकता है. मदरसे में उर्दू और संस्कृत भाषा पर खास जोर दिया जाता है. उन्होंने दोनों भाषाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि पटवारी को 50 या 100 साल पुराना तहसील का रिकॉर्ड पढ़ना हो तो उसको उर्दू का ज्ञान होना जरूरी है, क्योंकि पुराने रिकॉर्ड उर्दू में होते हैं. इसलिए उर्दू का ज्ञान बच्चों को होना जरूरी है. बच्चों को उर्दू भाषा पढ़नी व लिखनी आनी चाहिए.

बच्चों को सारे विषय आने चाहिए

चिश्ती ने बताया कि यह मदरसा आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत है. सरकार से मदरसे को तीन अध्यापक मिले हैं. मुस्लिम बच्चों को उर्दू और दीनी तालीम के साथ-साथ सारे विषय आने चाहिए इसलिए प्रधानमंत्री ने तीन-तीन अध्यापक उन मदरसों को दिए हैं जो रजिस्टर्ड हैं, और मदरसे में बच्चों को सभी विषयों को पढ़ाते हैं. उन्होंने बताया इन मदरसों को चलाने का उद्देश्य है कि सभी बच्चे तरक्की करें.

Tags: Madarsa, Saharanpur news, Sanskrit, Up news in hindi



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