Salute this idea 922 trees were to be cut for road widening but plan was made that 828 trees saved brvj

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पटना. राजधानी पटना में विकास कार्य के नाम पर सैकड़ों पेड़ काट दिए गए हैं. विशेषकर पटना बेली रोड के दोनों किनारों को चौड़ा करने की कवायद में कई बहुमूल्य व प्राचीन वृक्ष को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया. कारण पटना की सड़कों पर बढ़ते जा रहे गाड़ियों के बोझ को बताया गया. इसी तरह संजय गांधी जैविक उद्यान यानी पटना चिड़ियाघर के भी कई बेशकीमती पेड़ इसलिए खत्म कर दिए गए क्योंकि बगल में ही पटना का लोक नायक जयप्रकाश एयरपोर्ट है और विमानों की लैंडिंग व टेक ऑफ में परेशानी पेश आ रही थी. यहां कारण बताया गया कि अगर पेड़ नहीं काटे गए और शेष पेड़ों की ऊंचाई कम नहीं की गई तो कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है. हालांकि पर्यावरणविदों का मानना था कि अगर सही योजना बनाई जाती तो इन बहुमूल्य व औषधीय महत्व के पेड़ों को बचाया जा सकता था. इस निराशजनक खबर के बीच एक अच्छी और दिल को सुकून पहुंचाने वाली खबर सासाराम से आई है. यहां सड़कों का चौड़ीकरण तो किया जा रहा है, लेकिन बिना पेड़ों को काटे हुए हुए या फिर उन्हें बिना नुकसान पहुंचाए हुए.

खबर यह है कि सासाराम शहर के पुरानी जीटी रोड के एसपी जैन कॉलेज से कुम्हऊ गेट तक चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण का कार्य किया जा रहा है. इस सड़क पर करीब 922 वृक्ष ऐसे हैं जो विकास कार्य में बाधा बन रहे हैं. लेकिन, सकारात्मक बात यह है कि इन 922 वृक्षों में 752 वृक्षों को वन विभाग की पहल पर काटने के बजाए यथावत स्थान पर रखा जा रहा है. 76 वृक्षों को वन विभाग के देखरेख में बिना क्षति पहुंचाए उसे बराडीह-मोकर नहर चार्ट भूमि पर स्थानांतरित किया जा रहा है.

मिली जानकारी के अनुसार आधुनिक तकनीक से 76 वृक्षों को पथ निर्माण विभाग द्वारा नई दिल्ली के एक एजेंसी के माध्यम से ट्रांसलोकेट किया जा रहा है. इन वृक्षों को सुरक्षित बराडीह-मोकर नहर चार्ट भूमि पर ले जाकर लगाया जा रहा है. हालांकि, स्थानांतरित होने वाले पेड़ों की डाली काटी जा रही हैं. 10 फीट से नीचे तक गड्ढा कर पुराने पेड़ की जड़ को सुरक्षित किया जा रहा है. इसके लिए पहले पेड़ की जड़ के आसपास थोड़ी सी खुदाई कर पानी डाला जा रहा है. जड़ को सुरक्षित रखते हुए धीरे-धीरे खुदाई की जा रही है, इसे टाट से ढका जा रहा है.

जड़ सुरक्षित हो जाने के बाद ही पेड़ को स्थानांतरित किया जा रहा है. जैविक खाद देकर पेड़ को चिन्हित जगह पर लगाया जा रहा है. लेकिन, 94 वृक्षों का पातन यानी उन्हें गिराया जाना जरूरी हो गया. बावजूद इसके बड़ी खबर ये है कि 922-752+ 76= 828 पेड़ों को बचा लिया गया है. पथ निर्माण विभाग एवं पर्यावरण विभाग की पहल के साथ स्थानीय शासन की सकारात्मक सोच के कारण इन पेड़ों को बचाया जा रहा है. ऐसे में आम लोग इस कार्य की लोग प्रशंसा कर रहे हैं. लोगों का मानना है कि अगर पटना में भी इस तरह की सोच रखी जाती तो सैकड़ों अति महत्वपूर्ण व प्राचीनतम वृ्क्षों को बचाया जा सकता था.

डीएफओ प्रद्युम्न गौरव के अनुसार पथ निर्माण विभाग को 76 वृक्षों को ट्रांसलोकेट करने की सहमति के बाद ही एनओसी दिया गया था. उन्होंने बताया कि अधिसूचना के अनुसार किसी भी सरकारी व गैर सरकारी भूमि में किसी भी योजना के तहत आने वाले वृक्षों को यथासंभव काटने के बदले उसे ट्रांसलोकेट करने का निर्देश है. अधिसूचना का अनुपालन के तहत वन विभाग पुरानी जीटी रोड से हटाए जाने वाले वृक्षों को बराडीह-मोकर नहर चार्ट भूमि पर ट्रांसलोकेशन की प्रक्रिया की जा रही है. बहरहाल, वन एवं पर्यावरण विभाग की इस पहल की लोग जमकर सराहना कर रहे हैं और आगे कोई पेड़ न कटे इसके लिए सरकार को नई कार्ययोजना बनाने की अपील कर रहे हैं.

आपके शहर से (रोहतास)

Tags: Better environment, Forest area, Forest department, Sasaram news, Save environment, Tree, रोहतास, सासाराम



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