Satta-Rabri’s special anchor commission board– News18 Hindi

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खबरीलाल ल खबर हे के छत्तीसगढ़ के राजधानी म सत्ता के ख़ास रबड़ी-लंगर लगे रिहिस. ये लंगर अजब-गजब हे. रबड़ी खवइया मन के लिस्ट जारी होइस. ये लिस्ट ल बनाय म अढ़ई साल लग गे. बहुत सोच समझ के रबड़ी बनाय गिस. टुकुर-टुकुर देखइया मन के मन साँप-सीढ़ी होगे. राजा किसम के नेता रबड़ी-लंगर के बाऊँड्री ले न बाहिर खड़े दिखिस न भीतरी म टाहलत. राजनीति म ठग विद्या समाय हे. ठगाय नेता मन के दुःख ल त वुही जानहीं जेंन ल लगत हे के हम ठगा गेंन. ‘जाके पैर न फटे बिवाई, सो का जाने पीर पराई’ अब अंटियात परे राह. तोर बिन सरकार न गिरे, न हपटे. सब हाईकमान के माया होगे.

चोक्खा राजनीति

निगम-मंडल के सूची से निराशा के गोता-खवइया गोता खावत मुंहू लटकाय हें. सूची जारी होते साठ कुरसी सुरक्षित. न हवा ,न गरेर, न आंधी ,न तूफ़ान. मुख्यमंत्रीजी एके पहलवान. चोक्खा राजनीति.

लालबुझक्कड़ किहिस-राजनीति निर्दयी होथे. बोथे कोनो, लूथे कोनो. रबड़ी के सुयश कोनो ल मिलथे. छत्तीसगढ़ म नब्बे विधानसभा क्षेत्र हे. मुख्यमंत्री के कुरसी कभू-कभू हाले डोले. कुरसी ल कोनो तिरत हे तइसे लागे. ओखर काट खोजे गिस. विधान-सभा म अकबकावत बहुमत के राहत ले  ये बात ! झट सूत्र निकलिस डेढ़ दर्जन ले जादा संसदीय सचिव घोषित होगें.

निगम-मंडल अउ आयोग के दू कोरी के आसपास नेता मन ल सत्ता के रबड़ी बांटे गिस. उन सत्ता के मजा लिहीं. कोनो ल केबिनेट मंत्री, कोनो राज्य मंत्री (?) के दर्जा मिलिस. सरकारी पद के बड़ महिमा हे. मोटा वेतन, मोटर गाड़ी, कार, बंगला, आफिस, स्टाफ लाल बत्ती शोभा,घुमत रह, आगू पाछू सुरक्षा. पावर रहे चाहे झन राहे, लगना जरूरी हे के ये सज्जन मुख्यमंत्री के ख़ास आय. छत्तीसगढ़ म जनतंत्र सेवक हें. सबो माननीय हें. रबड़ी खावत दिखहीं. ये भाग्य-विधाता प्रदेश ल धन्य-धन्य करत हें. भरपूर तामझाम मंडली के बिना सरकार के चक्का एकदम फ्री होगे. लद्दी-वद्दी म धंसे के डर खतम. सरकार के नाक लाम होगे हे. ज्यादा आंक्सीजन खिंचही. उधारी, बाढी लेवत राहव. खुद सत्ता के रबड़ी-खाव, निगम-मंडल के पद बाँट-बाँट के सब ल रबड़ी खवाव. तीन करोड़ के आबादी म दो तिहाई गरीबी रेखा वाले पिछड़ा राज्य के रोना-गाना बंद हो. सत्ता तिहार तो रोज मनाओ. सब ल खुश करो. सफेद हाथी पोसे के सुख के अनुभव करो. ‘गढ़बो नवा छ्त्तीसगढ़’ गढ़ावत हे नवा छत्तीसगढ़.’

 नकद होय के उधार :सफेद हाथी के बाढ़ीस भार

खबरीलाल के गोठ-छत्तीसगढ़ सरकार के एक झन बड़का मंत्री किहिस कोरोना काल म सरकार नवा रायपुर म सी.एम हाउस, मंत्रीजी मन के बंगला,राजभवन, पेंशनर अउ करमचारी मन के इन्क्रीमेंट अउ डी.ए. ल रोके गिस .खराब गाड़ी ल बेचे गिस. सरकार एखर ले करोड़ों रूपया बचा डरिस. हर मरीज के फोकट म ईलाज होइस. अब कोरोना के तीसर लहर बर साढ़े तीन सौ करोड़ खरचा करे जही. फेर इन्क्रीमेंट अउ डी.ए.ल नइ रोकहू ? रोके हो तेला लहूटाव. इही कोरोना काल म माननीय मन अपन पगार ल डबल करे के गौरव हासिल करिन.

लालबुझक्कड़ किहिस-अब निगम-मंडल पद के रबड़ी बाँटे म सरकारी खजाना के कतेक करोड़ रूपिया स्वाहा होही ? एखर हिसाब जनता ल बताना जरूरी नइ हे. गोबर थोपत जाव. आम नागरिक गोबर थोपे !! सपना देखे. इहाँ गाँधीजी के सुराज आ गे हे ?

घर-गोसंइन के दुःख

खबरीलाल किहिस- मेंहा वो नेता मन के दुःख से दुखी हों जेन निगम-मंडल के पद वाले रबड़ी नइ पाय हें. उन ल रेवड़ी के हकदार घलो नइ समझे गे हें. कुरसी महा-ठगिनी हम जानी. उन नेता मन के घर-गोसंइन मन ह ये कहि के अपन स्वामी त छरत हें के चूलहा म जाय तोर नेतागिरी, न कौड़ी के न काम के, नेतागिरी बिना दाम के. एक छदाम कमाना नहीं, जिनगी  पहागे जय जय बोलावत-बोलावत. मुख्यमंत्री तोला जाने न ताने ,जानतिस-तानतिस त तोरो करा बुगबुगावत लाल बत्ती होतीस. तोर आघू-पाछू सेवक झूमतिन.तेंहा त अखंड शेखइहा आस.जा कोनो काम-बुता कर. फोकट भाषन झन झोर. दिखगे नेतागिरी तोर.

अढाई साल के खिचरी चिबरी होगे

सत्ता के रबड़ी कोन बाँटत हे. रबड़ी के परसाद बांटे के बड़ पुन्न होथे. जेला ये परसाद मिलथे ओखर बड़े-बड़े आँखी नान-नान हो जथे. रबड़ी-अधिकारी ल ओहा लाल आँखी नइ देखा सके. ओखर आँखी भूइंया म गड़ जथे. भारी समर्थन के जड़ त पताल म हे. हला डोला के का कर लेबे. अब त सब सब ल रबड़ी के परसाद मिलगे हे. बचे खुंचे हें ते मन हाथ उठाहीं नहीं त का कर लेहीं ?. अढाई साल ले जेन खिचरी चुरत रिहिस. ओ खिचरी भीतर-भीतर खूब डबकिस. खिचरी डबकइया मन अपन खिचरी डबकातेच रर्हिगें. खिचरी चुरत-चुरत चिबरी होगे.

रबड़ी के ख़ास लंगर

खबरीलाल किहिस-रबड़ी के ख़ास लंगर के तियारी घलो अढइ साल ले होवत रिहिस. अढइ साल के पहिली शुरूआत म चखना बरोबर कुछ नेता अलवा-जलवा रबड़ी टेस्ट करा के लालच ज़िंदा रखे गिस. अपन ल बड़े समझइया नेता मन जय-जय के अलावा एखरे सेती कलेचुप रिहिन. भविष्य के चिंता मन कतको झन दुबरगें. उनकर संकट ये रिहिस के गली के मनखे उन ल चिन्ह नइ पात रहिन. अब कोनो मंडल अध्यक्ष होगें. कोनो फलाना आयोग के अध्यक्ष होगें त कोनो सदस्य होगें. कखरो केबिनेट मंत्री के दर्जा हे त कखरो राज्य मंत्री के दर्जा वाले. कोनो फलां आयोग के सदस्य होगें. जोन खा सकत हें तोंन रबड़ी खाव, जोंन रबड़ी के अधिकारी नइ हें तोंन टूकुर-टुकुर देखो. सरकारी सुविधा हे, अढ़इया गणित वाले पस्त होगें. उनकर कतको संगवारी रबड़ी-लंगर के आनंद म बुड़गे हें.

भूपेश बघेल मैंन आफ दी मैच

लालबुझक्कड़ किहिस- राजनीति म समय के चिन्हारी करके छक्का जड़े बर परथे. अभी सत्ता के छत्तीसगढ़िया मैच म  माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चारों डाहर राजनीति के चौका-छक्का ठोक दिस. अउ नाट आउट हे. मेंन आफ द मैच होगे हे. अढ़इया गेम खतम .भीतरी विरोधी आउट.

(डिसक्लेमर– लेखक वरिष्ठ साहित्यकार हैं और ये उनकी व्यंग्य रचना है. News18 का इससे सहमत होना जरूरी नहीं है.)

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