Shrikhand Mahadev Yarta one pilgrims dies another injured rescued hpvk– News18 Hindi

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कुल्लू. हिमाचल प्रदेश में कुल्लू जिले में  दुनिया की सबसे कठीनतम यात्राओं में शामिल श्रीखंड महादेव यात्रा (Shrikhand Mahavdev) पर गए छह युवकों के दल में से एक युवक की मौंत हो गई है. युवक दिल्ली से था और अपने पांच साथियों के साथ श्रीखंड महादेव गया था. जहां रास्ते में गिरने से वह घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई. वहीं, एक अन्य मामले में श्रीखंड महादेव में ही 16 हजार फीट की ऊंचाई पर फंसे एक चोटिल युवक को बचाया लिया गया है. रेस्क्यू दल ने युवक को बचाया है और उम्मीद है कि वह युवक बुधवार सुबह तक अस्पताल पहुंचाया जाएगा.बर्फ में फिसलने के कारण युवक को पांव में चोट लगी थी और उसके साथी उसे छोड़ गए थे. वह ग्लेशियर में वह अकेला फंस गया था.

आखिरी पड़ाव में बेहोश मिला था युवक

आईटीबीपी की 19वीं बटालियन के एएसआई सुन्नी नेगी की अगुवाई वाली टीम ने मंगलवार सुबह करीब 8 बजे चोटिल युवक को श्रीखंड महादेव यात्रा के आखिरी पड़ाव में ढूंढने में सफलता पाई है. युवक की पहचान 25 वर्षीय सचिन, पुत्र गोविंद, गांव शदेड़ी कांगल, तहसील कुमारसैन के रूप में हुई है. युवक को फांचा पहुंचाने के बाद ज्यूरी और फिर रामपुर लाया जाएगा. एसडीएम रामपुर सुरेंद्र मोहन ने चेताया कि यदि कोई चोरी-छिपे श्रीखंड जाने की कोशिश करता पकड़ा गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

दिल्ली के युवक की जान गई

प्रशासन की मनाही के बावजूद श्रीखंड महादेव यात्रा पर निकले 6 युवकों में से दिल्ली के एक युवक की मौत हो गई है. डीएसपी आनी रविंद्र नेगी ने इसकी पुष्टि की है. 25 जून को 6 युवकों का एक दल अपनी गाड़ी निरमंड के जाओ में खड़ी कर श्रीखंड की ओर निकला था. दल में शामिल दिल्ली निवासी युवक पार्वती बाग में ग्लेशियर में गिरकर फंस गया. गंभीर चोटें लगने और अत्यधिक ठंड के कारण उसकी मौत हो गई है. सूचना मिलने के बाद पुलिस रेस्क्यू टीम के अलावा प्रशासनिक रेस्क्यू दल मौके की ओर रवाना हो गया है. जांच में पाया गया है कि इस दल में आयुष कुमार, अक्षित निवासी रोहडू़, अरुण निवासी लोअरधार आनी, सुनील कुमार पुलवाहन, चौपाल और तरुण व जय निवासी दिल्ली शामिल थे.

प्रशासन ने लगाया है बैन

दरअसल, इस यात्रा का मार्ग काफी खतरनाक है. हर बार प्रशासन मार्ग की रेकी करता है और साथ ही पुलिस और मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध रहती है. 15 से 30 जुलाई तक यह यात्रा होती है. लेकिन इस बार कोरोना के चलते प्रशासन रास्ते की रेकी नहीं कर पाया है. यह पता नहीं चला है कि रास्ता कितना खतरनाक है और कितनी बर्फ ऊंचाई पर है. ऐसे में यात्रा करना जोखिम भरा है.

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