State coal companies have raised the issue of discrepancies regarding surface rent | राज्य की कोयला कंपनियों ने सरफेस रेंट को लेकर विसंगतियों की बात उठाई है

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रांची10 घंटे पहले

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  • कोल मंत्रालय ने कोयला की रॉयल्टी और सरफेस रेंट को लेकर झारखंड सरकार से मांगा समय
  • सीआईएल ने कोल कंपनियों के उठाए गए मुद्दों को राज्य को भेजा
  • पांच माह पहले जमीन के एवज में राज्य सरकार को मिले थे 250 करोड़ रुपए

कोल कंपनियों और झारखंड सरकार के बीच रॉयल्टी और सरफेस रेंट को लेकर चल रहे बकाया की मांग को लेकर कोल मंत्रालय ने राज्य सरकार से फिलहाल समय देने को कहा है। सीसीएल समेत राज्य में अवस्थित कई अन्य कंपनियों ने सरफेस रेंट को लेकर विसंगतियों की बात उठाई है। राज्य सरकार के मांग पत्र पर भी सवाल खड़ा किया है। कोल मंत्रालय ने इन बिंदुओं की तहकीकात करने की आवश्यकता जताते हुए मुख्य सचिव और भूराजस्व सचिव को पत्र लिखकर समय की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों राज्य सरकार ने अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2020 तक की अवधि में कोल इंडिया को अधिग्रहित की गई 14,296 एकड़ सरकारी भूमि के एवज में 5439 करोड़ रुपए का मांग पत्र दिया था। इसके अलावा 5298 एकड़ जंगल-झाड़ भूमि के लिए भी 2787 करोड़ रुपये का दावा किया था। उसके बाद पांच माह पहले कोल इंडिया ने कोयल खनन के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के एवज में राज्य सरकार को 250 करोड़ रुपए दिए थे। राज्य सरकार ने इसके लिए कम से कम 8000 करोड़ रुपए की मांग की थी।

वित्त मंत्री ने उठाया था रॉयल्टी का मुद्दा
राज्य के वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने 11 दिसंबर 2021 को केंद्रीय वित्त मंत्री डॉ. निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में भी इन मुद्दों को उठाया था। उन्होंने केंद्रीय उपक्रमों पर बकाया राशि के भुगतान की मांग के साथ-साथ रॉयल्टी का पैटर्न बदलने और रेट बढ़ाने का आग्रह किया था। डॉ. उरांव ने लिखा था कि कोयले की रॉयल्टी एड वेलोरम रेट (मूल्य आधारित दर) के आधार पर करने का निर्णय लिया गया है। वर्ष 2012 में ही इसे 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का फैसला हुआ था, लेकिन इसे अबतक लागू नहीं किया गया है, जिससे राज्य को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है।

ब्यौरा को लेकर हुई थी सत्यापन की बात
कोयला मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच हुई बैठक में बात हुई थी कि 19 वर्ष पुराने इस मुद्दे पर आगे सत्यापन के बाद बकाया राशि का भुगतान होगा। लेकिन राज्य सरकार ने कहा था कि अधिग्रहित सरकारी भूमि के एवज में कोल इंडिया द्वारा भुगतान की जानेवाली राशि का ब्यौरा भेजा जाए।

छत्तीसगढ़ के सीएम ने भी रॉयल्टी दर बढ़ाने की रखी है मांग
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोयला रॉयल्टी की दर दर बढ़ाने की मांग की है। 8 जनवरी 2022 को उन्होंने केंद्र को लिखे पत्र में कोयला रॉयल्टी की दर 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 16 प्रतिशत करने का आग्रह किया है। साथ ही उन्होंने कोल इंडिया द्वारा हर तीन माह में आधार बिक्री मूल्य घोषित किए जाने की मांग की है। वर्ष 2014 के बाद कोयले की रॉयल्टी की दरें संशोधित नहीं हुई हैं।

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