Switzerland का वेब डेवलपर हरिद्वार में बन गया बेन बाबा, भिक्षा मांगकर सीखता है अध्यात्म का पाठ

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स्विट्जरलैंड के नागरिक होने के बावजूद भी बेन फर्राटे से हिंदी बोलते हैं.

मिलिए हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh 2021) में शामिल होने आए  बेन बाबा से.  5 साल पहले इनका स्विट्जरलैंड (Switzerland) से मोह भंग हुए और ये पैदल भारत आ गए. बेन कभी वेब डेवलपर हुआ करते थे. अब अध्यात्म में रमे हुए हैं.

पुलकित शुक्ला 

हरिद्वार. उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार में आस्था के महासंगम कुंभ (Haridwar Mahakumbh) मेले में दूरदराज से साधु महात्मा पहुंच रहे हैं. सभी साधुओं की अपनी-अपनी कहानी है, लेकिन कुंभ नगरी में इन दिनों एक खास बाबा भी आए हुए हैं जो स्विट्जरलैंड के रहने वाले हैं. 29 साल के वेब डिजाइनर बेन का नाम भारत में आकर बेन बाबा पड़ गया है. बेन बाबा की कहानी काफी दिलचस्प है. 5 साल पहले बेन का अपने काम और स्विट्जरलैंड से मोह भंग हो गया और वह पैदल ही भारत की ओर चल पड़े. हजारों किलोमीटर की यात्रा और कई देशों से गुजरने के बाद बाघा बॉर्डर से बेन भारत में दाखिल हुए और तब से यहीं बस गए हैं. बेन हिमाचल में रहते हैं और फिलहाल हरिद्वार के कुंभ मेले में आए हुए हैं.
लोग बेन से बात करते हैं. उनके साथ फोटो सेल्फी खिंचवाते हैं और प्यार से उन्हें बेन बाबा कहते हैं. बेन कहते हैं कि उनसे बात करने और उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो जाती है लेकिन वे शांत और अकेलेपन में रहना चाहते हैं. हालांकि वे सबके साथ प्यार से बात करते हैं.

फोन नहीं रखते, नंगे पांव घूमते हैं29 साल का स्विट्जरलैंड का रहने वाला यह वेब डिजाइनर रोज नंगे पैर ही कई किलोमीटर तक पैदल घूमता है. खास बात यह है कि बेन अपने पास मोबाइल फोन भी नहीं रखते. सिर्फ एक छोटा सा झोला और एक स्टील का लोटा ही उनकी जरूरत है. बेन का कहना है कि वह भिक्षा मांग कर अपना गुजारा करते हैं. उनका कोई भी ठोर ठिकाना नहीं है. जहां भी रात हो जाती है वे खुले आसमान के नीचे वहीं सो जाते हैं.

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बेधड़क बोलते हैं हिंदी

खास बात ये है कि स्विट्जरलैंड के नागरिक होने के बावजूद भी बेन फर्राटे से हिंदी बोलते हैं और किसी के साथ भी आसानी से हिंदी में बात कर लेते हैं. अपनी हिंदी के बारे में बेन बताते हैं कि 4 साल पहले उन्होंने किताबों का अध्ययन करके खुद ही हिंदी सीखी. फिलहाल बेन बाबा हरिद्वार कुंभ मेले में पूरे आनंद से घूम रहे हैं और धर्म, अध्यात्म में रमे हुए हैं. उनका कहना है कि भविष्य में जरूर वे कभी अपने देश स्विटजरलैंड लौटकर अपने लोगों को धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर ले जाने का प्रयास करेंगे.



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