The land which Vaibhavmani himself had registered; His report was not given to CBI-ED, now investigation will be done | वैभवमणि ने जिस जमीन की रजिस्ट्री खुद की; उसकी रिपोर्ट सीबीआई-ईडी को नहीं दी, अब होगी जांच

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रांची9 घंटे पहले

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  • हजारीबाग के पूर्व सब रजिस्ट्रार पर रांची में भी जमीन घोटाला में शामिल होने का लगा आरोप

हजारीबाग के पूर्व सब रजिस्टर वैभवमणि त्रिपाठी पर हजारीबाग कोर्ट ने आरटीआई एक्टिविस्ट को फंसाने और सूचना अधिकार के तहत जवाब नहीं देने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। त्रिपाठी के खिलाफ रांची में भी सब रजिस्ट्रार रहते जमीन घोटाले के एक मामले में सीबीआई व ईडी को गुमराह करने और घोटालेबाजों को मदद पहुंचाने की शिकायत की गई है।

निबंधन विभाग और प्रमंडलीय आयुक्त को त्रिपाठी की शिकायत मिली है। कहा गया है कि रांची में संजीवनी बिल्डकॉन से जुड़े जमीन घोटाले की जमीन की रजिस्ट्री त्रिपाठी ने भी की है।

11 अप्रैल 2012 को बरियातू थाना क्षेत्र के मौजा चिरौंदी के खाता नंबर-1, प्लॉट नंबर-173 के कुल रकबा 24 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री त्रिपाठी ने की थी, लेकिन जब सीबीआई व ईडी ने रांची के तत्कालीन सब रजिस्ट्रार त्रिपाठी से घोटाले से जुड़े दस्तावेज मांगे तब उन्होंने खुद किए गए निबंधन के दस्तावेज को छोड़कर 120 से अधिक डीड सीबीआई और ईडी को उपलब्ध करा दिए। जबकि, जिस दस्तावेज का निबंधन उन्होंने किया था, उसकी भी जानकारी उन्हें जांच एजेंसी को देनी थी।

इससे स्पष्ट है कि संजीवनी बिल्डकॉन के जमीन घोटालेबाजों से सब रजिस्ट्रार मिले हुए थे और कार्रवाई से बचने के लिए उन्होंने सीबीआई और ईडी को अपने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। इसलिए, मामले की जांच कराई जाए।

दो साल पहले हो चुकी है कार्रवाई, एक बार जेल भी गए
संजीवनी बिल्डकॉन से जुड़े जमीन घोटाले में रांची के दो पूर्व सब रजिस्ट्रार पर कार्रवाई भी हुई है। तत्कालीन सब रजिस्ट्रार सहदेव मेहरा जेल भी गए। जबकि तत्कालीन सब रजिस्ट्रार सुजीत कुमार पर विभागीय कार्रवाई की गई और दो इंक्रीमेंट भी काटा गया । लेकिन संजीवनी जमीन घोटाला मामले में जमीन की रजिस्ट्री करने के बावजूद दस्तावेज छुपाकर तत्कालीन सब रजिस्ट्रार वैभव मणि त्रिपाठी कार्रवाई से पूरी तरह बच निकले।

मेरे खिलाफ कुछ लोग साजिश कर रहे
संजीवनी बिल्डकॉन से जुड़ी जमीन की रजिस्ट्री मैंने की है या नहीं याद नहीं है। जो भी कागजात थे वो जांच एजेंसियों को दे दिए थे। कोई कागज छूटा है, मुझे नहीं पता। कुछ लोग मेरे खिलाफ साजिश कर रहे हैं।’ -वीएम त्रिपाठी, अवर निबंधक घाटशिला

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