Up election 2022 gurjar plays decisive role in dadri assembly seat

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ग्रेटर नोएडा. भारतीय राजनीति में जाति का कितना महत्‍व है, यह अगर समझना है तो दादरी विधानसभा सीट का इतिहास देखना चाहिए. मुख्‍य धारा की सभी पार्टियां पिछले 30-35 सालों से एक ही जाति से अपना प्रत्‍याशी खड़े कर रही हैं. दरअसल गौतमबुद्धनगर की इस सीट पर गुर्जर बिरादरी का दबदबा है. लगभग 4.50 लाख वोटर में 1.75 लाख अकेले गुर्जर हैं. मुस्‍लिम वोटरों की संख्‍या 90 हजार, ब्रह्मण 70 हजार और क्षत्रिय वोटर लगभग 45 हजार हैं. खास बात यह है कि अभी तक इस सीट पर समाजवादी पार्टी को जीत नसीब नहीं हुई है.

संख्‍या बल में अधिक होने की वजह से ही गुर्जर जाति के वोटरों को लुभाने के लिए सभी पार्टियां इस बिरादरी के प्रत्‍याशी पर ही दांव खेलती हैं. 1996 और 2002 में लगातार दो बार यहां से भाजपा के नवाब सिंह नागर विधायक रहे. इसके बाद दो बार 2007 और 2012 में बसपा के सतवीर सिंह गुर्जर जीते. 2017 में वह भाजपा के तेजपाल सिंह नागर से 82 हजार वोटों से हार गए. तीसरे स्‍थान पर कांग्रेस के समीर भाटी और चौथे स्‍थान पर रालोद के रवींद्र सिंह भाटी रहे. 2012 में कांग्रेस के समीर भाटी तीसरे स्‍थान पर रहे थे, सपा के राजकुमार भाटी चौथे स्थान पर. दोनों ही गुर्जर बिरादरी से ताल्‍लुक रखते हैं.

दादरी विधानसभा क्षेत्र में सूरजपुर, बिसरख, दादरी, चिपियाना बुजुर्ग जैसे महत्‍वपूर्ण इलाके आते हैं. सबसे पहले 1956 में यहां पर चुनाव हुआ था. परिसीमन के बाद इस विधानसभा क्षेत्र की संख्‍या 62 नंबर निर्धारित की गई.

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