Varanasi: जिन्होंने की थी कभी हत्या अब सिखा रहे जिंदगी देने की कला, जानिए कैसे?

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रिपोर्ट- अभिषेक जायसवाल

वाराणसी: जेल में बंद कैदी और बंदी रक्षक अब मुश्किल समय में लोगों की जान बचा सकेंगे.सुनने में ये थोड़ा अटपटा जरूर लग रहा होगा लेकिन ये अब सम्भव होगा.इसके लिए वाराणसी (Varanasi) के सेंट्रल जेल (Central Jail) में बंद कैदियों और बंदी रक्षकों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) और बेसिक लाइफ सपोर्ट का हुनर सिखाया जा रहा है. डॉक्टरों की टीम जेल में बंद 200 लोगों को इसकी ट्रेनिंग दे रही है. ये वही कैदी हैं जिन्होंने कभी हत्या और दूसरे गुनाह किए थे. लेकिन अब वो जीवन देने की कला सिख कर लोगों की जान बचाएंगे.

इस ट्रेनिंग के बाद एक्सीडेंट या हार्ट अटैक के वक्त जब मरीज की सांस न चले और धड़कन न मिले तो इस बेसिक लाइफ सपोर्ट के जरिए लंग्स और हार्ट को एक्टिव किया जा सकता है. आम तौर पर इसकी जरूरत तब पड़ती है जब इमरजेंसी के वक्त में मेडिकल और डॉक्टरों की टीम मौके पर समय से नहीं पहुंच पाती तो इस कला के जरिए मरीजों की जान को बचाया जा सकता है.

आसानी से सिख सकते हैं ये कला
वाराणसी के सेंट्रल जेल में जाने माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ कामरान ने बताया कि इन दिनों हार्ट अटैक के कारण मौतों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में इस कला के जरिए मरीजों की जान को बचाया जा सकता है.बेसिक लाइफ सपोर्ट एक आसान प्रक्रिया है जिसे कोई भी आम इंसान आसानी से सिख सकता है.इसी के तहत जेल में बंद कैदियों और उनकी देखरेख करने वाले बंदी रक्षक और पुलिस कर्मियों को इसकी ट्रेनिंग दी जा रही है.

पहले पुलिसकर्मियों और बच्चों को दी थी ट्रेनिंग
बताते चले कि इसके पहले डॉ कामरान की टीम ने वाराणसी के पुलिसलाइन में पुलिसकर्मियों और स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों को इसकी ट्रेनिंग दे चुके हैं.उन्होंने बताया कि बेसिक लाइफ सपोर्ट की जरूरत किसी भी वक्त पढ़ सकती हैं इसलिए इसकी जानकारी सभी को होनी चाहिए.



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