Varanasi malaiyo sweets famous in all over india winter s delicious sweet know how to make malaiyo nodvm

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वाराणसी- उत्तर प्रदेश का वाराणसी शहर अपने आप में कई इतिहास और धार्मिक मान्यताएं समेटे हुए है. एक तरफ जहां राजनीतिक नजरिए से ये शहर सुर्खियों में रहता है, तो दूसरी ओर धार्मिक दृष्टि से इसे मोक्षनगरी की संज्ञा दी गई है. वाराणसी, बनारस, काशी, बाबानगरी और ऐसे न जाने कितने नामों से जाना जाने वाला यह शहर अपनी रहन-सहन और खान-पान दोनों के लिए मशहूर है. बनारसी पान हो या चाट, या फिर लवंगलता और खाने की दूसरी चीजें, यहां की हर चीज खास है. इसी खासियत को और विशेष बनाती है एक अनोखी मिठाई, जिसे लोग मलइयो के नाम से जानते हैं. मलइयो में ऐसा काफी कुछ है, जो इसे खास बना देता है. जी हां, यह सिर्फ ठंड के दिनों में मिलती है और मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से इतर इसमें प्रकृति का योगदान बड़ा दिलचस्प है. प्रकृति का योगदान इसलिए क्योंकि इसके तैयार होने में ओस की बूंदों की बड़ी भूमिका होती है.

आपको यह तथ्य अनोखा लगेगा ही, क्योंकि मलइयो के अलावा शायद ही ऐसी कोई मिठाई है जो ओस से बनती हो. आम तौर पर कुल्हड़ में मिलने वाले मलइयो का एक चम्मच जैसे ही आपकी जीभ पर जाएगा, आपकी स्वाद-इंद्रियां अद्भुत प्रकार की अनुभूति पाएगी. चीनी मिले दूध को रातभर ओस में रखने के बाद इससे निकला झाग ही मलइयो होता है. इसे खाने के बाद आप अनुभव करेंगे कि क्यों अन्य शहरों के मुकाबले बनारस बड़ी तेजी से लोगों के मन-मस्तिष्क में उतर जाता है. खाने के शौकीनों के लिए बनारस किसी स्वर्ग से कम नहीं है. आजकल सर्दी खूब पड़ रही है, ऐसे में बनारस की इस खास मिठाई मलइयो का जिक्र लाजिमी है.

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सेहत के लिए भी फायदेमंद

नवंबर से फरवरी के बीच बनारस की कई दुकानों पर आपको मिट्टी के कुल्हड़ में झागदार केसरिया दूध नजर आएगा. दरअसल, यही वो खास मिठाई है, जिसे मलइयो के नाम से जाना जाता है. बनारसी मलइयो (Varanasi Malaiyo) का स्वाद लेने के लिए दूर-दूर से लोग बनारस आते हैं. ये मिठाई सिर्फ जुबां के लिए नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है.

रातभर ओस पड़ने से खास बनता है मलइयो

बनारसी खानपान को लेकर विख्यात शरद श्रीवास्तव बताते हैं कि इसको बनाने का तरीका भी मलइयो को खास बनाता है. कच्चे दूध को विक्रेता रात में बढ़िया से खौलाकर खुले आसमान के नीचे रखते हैं. फिर सर्दियों में ओस की बूंदों से इसमे झाग पैदा हो जाता है और सुबह इसके केसर, इलायची, दूध, पिस्ता, बादाम आदि ड्राई फ्रूट्स डालकर बड़ी बड़ी मथनी से मथा जाता है.

शरद ने आगे बतया कि कि आयुर्वेद में भी जिक्र है कि ओस की बूंदों में मिनरल्स होते हैं,  जो आंख की रोशनी बढ़ाने के साथ त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है. लक्सा के पहलवान मलइयो वाले बताते हैं कि इसमे बादाम समेत दूसरी मेवा होने के कारण न केवल ये शरीर को गर्मी प्रदान करता है बल्कि ताकत और स्फूर्ति भी देता है.

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